हरियाणा में सशक्त होंगी ग्राम पंचायतें
कैबिनेट ने पास किए कई फैसले

हरियाणा में ग्राम पंचायतों को सशक्त किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा सरकार की कैबिनेट की बैठक में फैसले पास किए गए। इसके तहत ग्राम पंचायत 250 एकड़ तक भूमि के उपयोग का प्लान तैयार कर सकेंगी।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षत में हुई कैबिनेट की बैठक में इस सहित कई अन्य प्रमुख फैसले लिए गए। कैबिनेट की बैठक में हरियाणा हाउसिंग बोर्ड का विलय हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) में करने का भी फैसला लिया गया। इस दौरान आवास संबंधी कार्यों को सरल बनाने के फैसलों को भी मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने हाउसिंग बोर्ड संशोधन विधेयक 2025 को मंजूर किया।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में कई बड़े व महत्वपूर्ण फैसलों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि हरियाणा हाउसिंग बोर्ड को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के साथ विलय किया जाएगा। इसके लिए हरियाणा हाउसिंग बोर्ड (संशोधन) विधेयक, 2025 के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई है। इस संशोधन के लागू होने से शहरी विकास और आवास संबंधी कार्य सरल हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने चालू वर्ष 2025-26 के बजट भाषण में हाउसिंग बोर्ड हरियाणा को भंग कर उसके कार्य एचएसवीपी में समायोजित करने की घोषणा की थी। इससे शहरी विकास एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की योजना है। प्रदेश कैबिनेट की बैठक करीब ढाई घंटे चली। बैठक में 17 अक्टूबर को सोनीपत में नायब सरकार का एक साल पूरा होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम पर भी विस्तार से योजना बनाई गई। सोनीपत में होने वाले इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष तौर पर पहुंच रहे हैं।
कैबिनेट बैठक के दौरान सरकार ने शामलात भूमि में चार प्रतिशत हिस्सा 60प्रतिशत या अधिक दिव्यांग व्यक्तियों के लिए आरक्षित भी तय करने का फैसला लिया। इसके अलावा बीस वर्षों के लिए गो अभ्यारण्य के लिए 5100 रुपये प्रति एकड़ वार्षिक दर पर भूमि पट्टे पर देने की मंजूरी दी गई है। वहीं फैसला हुआ कि महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। ग्राम सभा की बैठकों में सदस्यों की
40 प्रतिशत भागेदारी सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया। कैबिनेट की बैठक में हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 के माध्यम से हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई। इस संशोधन के अनुसार किसी भी सरकारी योजना के पात्र लाभार्थियों पर विचार और उन्हें मंजूरी देने के लिए होने वाली ग्राम सभा की बैठक का कोरम ग्राम सभा के सदस्यों का 40 प्रतिशत होगा। हालांकि, पहली और दूसरी स्थगित बैठकों में कोरम क्रमशः ग्राम सभा के सदस्यों का 30 प्रतिशत और 20 प्रतिशत से होगा। इस निर्णय से पंचायती राज व्यवस्था में पारदर्शिता और कार्यप्रणाली में सुधार की संभावना है।
हरियाणा हाउसिंग बोर्ड
प्रदेश सरकार के मंत्रीमंडल की बैठक में पंजाब फैक्ट्री नियम, 1952 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दिया गया है। इस संशोधन से कारखानों में कुछ प्रक्रियाओं में महिलाओं को कार्य करने की अनुमति देने की प्रक्रिया की जाएगी। इसके तहत नियमों के तहत देय शुल्क को अब ऑनलाइन माध्यम से जमा कराने की सुविधा दी जाएगी। इस संशोधन से लैंगिक असमानता समाप्त करने की पहल की जा रही है। इससे महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और इंजीनियरिंग, केमिकल्स व विनिर्माण जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी, जहां पहले महिलाओं की मागीदारी सीमित थी। संशोधन में यह भी सुनिश्चित होगा कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं खतरनाक श्रेणी के कार्यों से बाहर रहे, जिससे उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की पूर्ण सुरक्षा बनी रहे। सरकार द्वारा 15.12.2020 को हाउसिंग फार आल विभाग बनाया गया। इसका उद्देश्य राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गो की आवास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करना है। इसके तहत हरियाणा आवास बोर्ड अधिनियम, 1971 (1971 का 20) तथा उसके अधीन बनाए गए नियमों का प्रशासन करना।हरियाणा आवास बोर्ड का प्रशासन करना। आवास योजनाओं का कार्यान्वयन, जिसमें भूमि अधिग्रहण एवं विकास योजना, निम्न आय वर्ग के लिए आवासीय योजना। मध्यम आय वर्ग के लिए आवासीय योजना। किराये के लिए आवासीय योजना। ग्रामीण आवास योजना औद्योगिक सब्सिडी आवासीय योजनाएं शामिल हैं।
एचएसवीपी
यह संस्था प्रदेश में काफी पुरानी है। शहरी क्षेत्र में आवासीय सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए संस्था काम करती है। एचएसवीपी इसका नया नाम है। इससे पहले शहरी संपदा विभाग वर्ष 1962 में बनाया गया। शहरी क्षेत्रों के नियोजित विकास कार्यों के लिए यह संस्था बनाई। पहले यह टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के तहत में कार्य करता था। इसके कामकाज को पंजाब शहरी संपदा विकास और विनियम अधिनियम, 1964 द्वारा विनियमित किया गया था। इसके तहत बनाए गए नियम और विभिन्न विकास गतिविधियों को राज्य सरकार के विभिन्न विभागों जैसे पीडब्ल्यूडी (बी एंड आर) विभिन्न स्थानों पर शहरी संपदा के विकास में कई एजेंसियों की भागीदारी समन्वय की कमी रहती थी। इससे अधिकांश शहरी संपदाओं की वृद्धि धीमी हो गई। विशेष रूप से भूखंड-धारकों और सामान्य रूप से जनता को अनावश्यक असंतोष का कारण बना। इसके बाद हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1977 के तहत 13-01-1977 को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1977 के तहत काम, जिम्मेदारियों को अलग-अलग सरकारी विभागों द्वारा संभालने के लिए अस्तित्व में आया। इसको हरियाणा अर्बन डेवलेपमेंट एथोरिटी के रूप में हुुडा कहा जाता था। वर्तमान प्रदेश की भाजपा सरकार ने इसका नाम हिंदी व अंग्रेजी में एकरूपता से एचएसवीपी कर दिया।










