Over 8000 poor children have missed their studies

गरीब बच्चों को नहीं मिल रहा लाभ

haryana education शिक्षा के अधिकार कानून के तहत शिक्षा का अधिकार मिलने के बाद भी गरीब बच्चों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। कानून के तहत निजी स्कूलों में शिक्षा लेने पहुंचे गरीब छात्र- छात्राओं को स्कूल शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। शिक्षा सत्र का आधा साल निकल गया है। अभी तक गरीब विद्याथिर्यों के लिए इस योजना का लाभ शुरू नहीं हुआ है। 

सरकार की ओर से राज्य भर के 2664 निजी स्कूलों को दाखिले के लिए लाभ की श्रेणी में आने वाले 8070 बच्चों को दाखिला देने के लिए भेजा गया। लेकिन निजी स्कूलों ने इन छात्र- छात्राओं को अपने यहां दाखिल करने से मना कर दिया। बेशक निजी स्कूलों द्वारा इसके लिए अधूरे दस्तावेज, सीट नहीं बची होने व आवेदन में कमी जैसे कारण बताए गए हैं। यही कारण है कि सरकार द्वारा निजी स्कूलों में भेजे गए छात्र- छात्राएं अभी तक अपने स्कूल में जा ही नहीं पाए हैं।

हरियाणा प्रदेश में पर दस हजार 700 निजी क्षेत्र के विद्यालयों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 11 हजार 803 छात्र- छात्राओं को शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के तहत प्रवेश दिया जाना था। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे छात्र छात्राओं का निर्धारण व चयन भी किया जा चुका था। साथ ही इनके लिए प्राथमिकता व वरियता के आधार पर स्कूल भी निर्धारित किए थे। इसके बाद जब यह छात्र- छात्राएं अपने डाक्युमेंट लेकर आबंटित किए गए स्कूल में पहुंचे तो कुछ स्कूलों ने इनके आवेदनों में ही कमियां निकाल दी। इसके आधार पर ही इन बच्चों को प्रवेश देने से मना कर दिया।

इसको लेकर प्रदेश के मौलिक शिक्षा निदेशक के अधिकारियों के साथ दो बार बैठक भी हो चुकी है, लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला। ऐसे में स्कूल आबंटित होने के बाद भी यह बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ऐसे में बच्चों को कागजों में तो लाभ मिल गया, लेकिन जमीनी स्तर पर इसकी प्रतीक्षा की जा रही है। 

सिर्फ जुर्माना लगाने के निर्देश तक शिक्षा विभाग

हालांकि  शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के दाखिलों के लिए अपने स्तर पर औपचारिकताएं की जा रही हैं, लेकिन इसका कोई भी परिणाम नहीं निकल पाया है। मौलिक शिक्षा निदेशक दो बार बैठक कर चुके हैं। इससे भी कोई परिणाम नहीं आया। वीडियो कांफ्रेंसिंग से प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा हो चुकी है। निजी स्कूलों का व्यवहार देख कर अभी तक विभाग के अधिकारी नाराजगी जता रहे हैं। साथ ही जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह आदेश भी सिर्फ कागजी रही रहे और बच्चों को उनका शिक्षा का अधिकार नहीं मिल पा रहा है। नियमानुसार बच्चों के दाखिले के लिए तीन किलोमीटर के दायरे में स्थित निजी स्कूलों का चयन किया गया है। शिक्षा विभाग के मुख्यालय की ओर से छात्र छात्राओं की सूची भी जारी की गई है। इतनी प्रक्रिया होने के बाद भी निजी स्कूल इस श्रेणी के लाभपात्र विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं। हालांकि मौलिक शिक्षा निदेशक का कहना है कि यह मामला उनके संज्ञान में है। विभाग द्वारा कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं। अब फिर से अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी रिपोर्ट ली जाएगी। 

स्कूलों के सरकार द्वारा जारी किए गए दिशा निर्देशों को भी नहीं माना है। शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्रक्रिया जनवरी में शुरू होनी थी, लेकिन तीन महीने देरी से मार्च महीने के अंत में जा कर शुरू हुई। आधा शिक्षा सत्र बीतने के बाद भी दाखिले नहीं हो पाए हैं। जबकि मार्च महीने में तो छात्र छात्राओं के प्रवेश होने चाहिंए थे। 

यह है नियम 

दरअसल शिक्षा के अधिकार कानून के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीट आर्थिक रूप से गरीब वर्ग के छात्र छात्राओं के लिए आरक्षित होती हैं। सरकार के निर्देश के अनुसार यह व्यवस्था प्रदेश के सभी निजी स्कूलों पर एकरूपता से मान्य है। अगर कोई भी माता-पिता निर्धारित नियमों को पूरा करता है तो उसके बच्चे को चयनित स्कूल में प्रवेश देना स्कूल की जिम्मेदारी है।

चलती रहती है खींचतान

इस योजना के तहत लाभार्थी छात्र छात्राओं को दाखिला देने को लेकर सरकार व निजी स्कूलों के बीच खींचतान रहती है। निजी स्कूलों द्वारा बच्चों को पढ़ाने पर सरकार द्वारा निर्धारित फीस का भुगतान किया जाता है। निजी स्कूल संचालकों द्वारा इसकी मांग की जाती रही है। हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष वजीर ढांडा का कहना है कि आज तक स्कूलों को सरकार द्वारा भुगतान नहीं दिया गया है। इसके बावजूद निजी स्कूल जनहित में बच्चों को दाखिले देते हैं। 

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