India’s first hydrogen train : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी का इंतजार
इस साल के शुरू से ही हाईड्रोजन ट्रेन चलने की रही चर्चा अभी तक नहीं आया शेड्यूल
India’s first hydrogen train : सोनीपत-जींद रूट पर चलने वाली देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को अभी तक हरी झंडी का इंतजार है। हालांकि ट्रेन व हाईड्रोजन प्लांट दोनों ही तैयार हैं, लेकिन अभी तक ट्रेन के संचालन को लेकर शेड्यूल नहीं बना है। ऐसे में ट्रेन दिल्ली के शकूर बस्ती यार्ड में खड़ी है। वहीं यात्रियों को देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन के चलने का इंतजार है।
देश की पही हाईड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए हरियाणा के जींद जंक्शन पर हाइड्रोजन प्लांट बनाया गया है। यह बन पर तैयार हो चुका है। क्योंकि हाईड्रोजन प्लांट जींद में बना है, ऐसे में पहली ट्रेन जींद से गाेहाना होते हुए सोनीपत तक चलाने की योजना है। साल 2025 के शुरूआत से ही हाईड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना बनती रही, लेकिन अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ पाई है।
जींद में बनाए गए प्लांट से प्रति दिन 430 किलोग्राम हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा सकता है। यह देश की पहली ट्रेन होगी। हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल होगी। क्योंकि ट्रेन में डीजल की बजाय हाईड्रोन गैस का प्रयोग होगा। ऐसे में ट्रेन से धुआं नहीं निकलेगा। इस ट्रेन में एक समय में 2638 यात्री सफर कर सकेंगे।

India’s first hydrogen train : भारतीय रेल के इतिहास में नया अध्याय
यह ट्रेन भारतीय रेल के इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगी। हालांकि विश्व के कई देशों में हाईड्रोजन ट्रेन चलाई जा रही हैं, लेकिन भारत अब इस श्रेणी में पांचवां देश बनने जा रहा है। हालांकि हाईड्रोजन प्लांट की टेस्टिंग में गैस बननी शुरू हो चुकी है, लेकिन अभी तक प्रयोग के लिए उत्पादन शुरू नहीं किया गया है। जींद जंक्शन पर बने इस प्लांट पर 70 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। हाइड्रोजन ट्रेन के कोच चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी में बनाया गया है। यह ट्रेन डेढ़ माह पहले ही शकूरबस्ती स्टेशन पर पहुंच चुकी है। ट्रेन के निर्माण पर करीब 82 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।
India’s first hydrogen train : 3000 किलोग्राम गैस भंडारण की क्षमता
हालांकि यह परियोजा फिलहाल पायल प्रोजेक्ट के रूप में है, लेकिन इसको आने वाले दिनों में विस्तार दिया जा सकता है। सबसे पहले जींद-गोहाना-सोनीपत रूट पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाई जाएगी। इस ट्रेन में 2638 यात्री सफर कर सकेंगे। जींद के हाईड्रोजन प्लांट में 3 हजार किलोग्राम गैस भंडारण की क्षमता रखी गई है। जींद-गोहाना-सोनीपत रेलवे मार्ग 89 किलोमीटर लंबा है। हाइड्रोजन ट्रेन की गति 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा रहने की संभावना है। हाइड्रोजन से चलने के कारण इस ट्रेन से शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा। ईंजन में ईंधन जलने के के बाद धुआं नहीं, भांप बाहर आएगी। इस ट्रेन के इंजन की क्षमता 1200 HP है। विश्व भर में हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन में यह सबसे अधिक है।

India’s first hydrogen train : भारतीय रेल को शून्य कार्बन उत्सवर्क बनाने की योजना
हालांकि फिलहाल इस ट्रेन को सिर्फ एक ही रूट पर चलाया जाना है, लेकिन भारतीय रेल द्वारा शून्य कार्बन उत्सवर्क बनाने की पहल है। आने वाले दिनों में अन्य रूट पर भी इस प्रकार की ट्रेन चलाई जा सकती हैं। जब तक जर्मनी, चीन और ब्रिटेन जैसे देशों में हाइड्रोजन रेल चलती हैं।
India’s first hydrogen train : रेलवे ट्रैक बना रहा बाधा, ताेड़ ढूंढ रहे अधिकारी
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद व सोनीपत के बीच चलाई जानी है। वहीं इस रूट की अधिकतम गति सीमा ही 75 किलोमीटर प्रति घंटा की है। जबकि ट्रेन को 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से चलाया जाना है। ऐसे में रेलवे ट्रैक सबसे बड़ी बाधा बना गया है। अब अधिकारी इसका तोड़ ढूंढ रहे हैं। ऐसी स्थिति में ट्रेन चलाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। इसके लिए रेलवे द्वारा पटरियों की ग्रेडिंग के साथ सिग्नल व्यवस्था, ब्रिज स्ट्रक्चर को भी अपडेट करना होगा। वहीं हाईड्रोजन प्लांट तैयार हो चुका है, लेकिन इसका उद्घाटन अभी तक नहीं किया गया है। इसको पांच एकड़ में बनाया गया है।










