Asrani : असरानी के अंतिम संस्कार में महज 20 लोग हुए शामिल

अंतिम इच्छा के अनुरूप हुआ अंतिम संस्कार

हिंदी फिल्मों के हांस्य कलाकार के रूप में अपनी खास जगह बनाने वाले अभिनेता गोवर्धन असरानी का निधन दीवाली के दिन 20 अक्टूबर हो हो गया। वे 84 वर्ष के थे। हमेशा ही लोगों को हंसाने वाले व दमदार अभियान के दम पर फिल्म जगत में अपनी खास जगह बनाने वाले असरानी का अंतिम संस्कार बेहद सारे तरीके से महज 20 लोगों की मौजूदगी में किया गया। बताया जाता है कि यह असरानी की अंतिम इच्छा थी। उन्होंने अपनी पत्नी को इसके बारे में पहले ही बता दिया था। परिवार के लोगों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान किया और सिर्फ परिवार के लोग ही अंतिम संस्कार में शामिल रहे।

असरानी का नाम आते ही शोले फिल्म का वह सीन आंखों के आगे आ जाता है, जिसमें वे जेलर की भूमिका में होते हैं। इसको लेकर कई साक्षात्कारों में भी स्वयं असरानी ने कई बार काफी कुछ बताया है। इसमें असरानी विश्व प्रसिद्ध तानाशाह हिटलर के लुक में रहे और उनकी तरह ही बोलते हुए पूरी फिल्म में अपनी विशेष जगह बनाई। हालांकि इस फिल्म में कई अन्य दमदार अभिनेता रहे, लेकिन असरानी की अदाकारी ने अपनी अलग पहचान छोड़ी।

हिंदी सिनेमा में अपनी विशेष पहचान रखने वाले अभिनेता गोवर्धन असरानी का निधन दीवाली 20 अक्टूबर के दिन दोपहर बाद करीब चार बजे हुआ। हालांकि इससे करीब एक घंटा पहले ही उनके सोशल मीडिया अकाउंट से दीवाली की बधाई भी दी गई थी। (Asrani) वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। इसकी जानकारी उनके भतीेजे अशोक असरानी द्वारा सार्वजनिक की गई।असरानी मूल रूप से राजस्थान के जयपुर के रहने वाले थे और उन्होंने स्नातक तक पढ़ाई की थी।

बहुत कम लोग जानते हैं कि असरानी की फिल्मी दूनिया की शुरूआत अदाकार के रूप में नहीं पाश्र्व गायक के रूप में हुई। उन्होंने इसके बाद गायन को छोड़ कर एक्टिंग को चुना और इसमें भी छा गए। असरानी ने करीब 300 फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मी सफर की शुरूआत गुजरानी फिल्म अलाप में गायक के रूप में हुई। इसमें उन्होंने दो गाने गाए। यह फिल्म 1977 में आई थी। इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध पाश्र्व गायक किशोर कुमार के साथ फूल खिले हैं गुलशन गुलशन गीत भी गाया।

अभिनेता गोवर्धन असरानी का निधन
अभिनेता गोवर्धन असरानी का निधन

असरानी की अच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार बेहद सादे तरीके से हो। ऐसे में निधन के बाद जल्दी ही उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि असरानी की मौत का समाचार सुन कर उनके फैंस के साथ हिंदी सिनेमा जगत के लोगों को काफी दुख हुआ, लेकिन जल्द ही उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। असरानी की यही इच्छा थी। उन्होंने अपनी पत्नी को कह दिया था कि उनका अंतिम संस्कार कुछ लोगों के बीच ही हो। ऐसे में उनके अंतिम संस्कार में परिवार के लोगों के साथ कुछ दोस्त ही शामिल हुए।

जाने माने अदाकार असरानी पांच दिन अस्पताल में दाखिल रहे। उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। हालांकि उनका स्वास्थ्य पिछले करीब 15 दिन से नासाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही मुंबई स्थित जुहू के आरोग्य निधि अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।

गोवर्धन असरानी ने बालीवुड़ में अपने अभिनय की अमिट छाप छोड़ी। उनका अभिनय बहुत ही सहज व वास्तविक रहा। यही कारण रहा कि वे लोगों में बहुत प्रसिद्ध हुए। 1975 में आई फिल्म शोले सुरपहीट रही,लेकिन इस फिल्म में असरानी द्वारा बोला गया डायलोग हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं आज भी बहुत प्रसिद्ध है। उन्होंने अपने जमाने के सुरपरस्टार राजेश खन्ना के साथ 25 से अधिक फिल्मों में काम किया। हालांकि असरानी को पहली फिल्म 1967 में हरे कांच की चूड़ियां करने का मौका मिला। इसके बाद 1971 में आई फिल्म गुड्डी और 1972 में बनी फिल्म परिचय में उन्होंने जिस प्रकार हांस्य अभिनेता के रूप में काम किया, उनकी अलग ही पहचान बन गई।

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