Sahibganj ganga bridge : झारखंड में बन रहा आशा का पुल

अगले साल पूरा होगा साहिबगंज का पुल, मिलेंगे गंगा के दो छोर

Sahibganj ganga bridge : विकास के मामले में पीछे रह गए कई क्षेत्र अब इस मामले में आगे बढ़ रहे हैं। इसका उदाहरण है झारखंड। झारखंड राज्य के साहिबगंज और इसके आसपास के ज़िलों के लोग कई दशकों से गंगा के दो किनारों पर अलग-अलग जीवन जी रहे थे। अब इन दोनों किनारों को जोड़ने की परियोजना पर काम शुरू हो गया है और अगले साल तक यह परियोजना पूरी होने की उम्मीद है। इसके तहत झारखंड में एनएच -133- B को बिहार में एनएच 131-A से जोड़ा रहा है।

इस क्षेत्र के लोग के लिए यह परियोजना बहुत ही महत्वपूर्ण है। बेशक यह दूरी अधिक लंबी नहीं हो, लेकिन इसको पार करने में संघर्ष बहुत लंबी रहता है। अब तक सिर्फ जलमार्ग से ही इस दूरी को पार किया जा सकता था, लेकिन अब सड़क मार्ग से भी यह संभव हो जाएगा। यहां के लोगों का कहना है कि गंगा को पार करने के लिए नाव 100 रुपये लगते हैं, लेकिन यह राशि बहत बड़ी है। ऐसे में जरूरी काम विशेषकर इलाज के लिए ही इस रास्ते का प्रयोग लोग करते हैं। अब यहां पुल बनने से नदी को पार करने की यह समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे कटिहार तक पहुंंचना आसान हो जाएगा।

इस पुलिस की लंबाई 8 किलोमीटर है और इस पर 1 977.66 करोड़ रूपये खर्च होंगे। वित्तीय वर्ष 2026-2027 में यह परियोजना पूरी होगी। जिस प्रकार की परियोजनाएं हम दिल्ली के आसपास या उत्तर भारत में देख रहे हैं, ऐसी ही परियोजना अब दूर दराज के क्षेत्रों में भी बन रही है। देश में नदियों को एक संसाधन के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन कई लोगों के लिए यह आपदा भी बनती हैं। विशेषकर इनको पार करने में काफी पैसा और समय लगता है। इसको पार किए बना वे बड़े शहरों तक नहीं पहुंच पाते। यहीं पर बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य के लिए लोग जाते हैं। ऐसे में झारखंड में बनने वाला यह पुल काफी महत्वपूर्ण होगा।

अभी तक झारखंड और बिहार के बीच का सफर बहुत आसान नहीं है। विशेषकर बारिश के मौसम में यह खतरे से भरा रहता है, लेकिन अब यह समस्या समाप्त हो जाएगी। इससे हर मौसम में दोनों राज्यों के बीच सीधा संपर्क होगा। साथ में यह पुल बनने से माल ढुलाई आसान होगी। विशेषकर झारखंड के संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों से खनिज ढुलाई में तेजी आएगी। परिवहन व्यवस्था तो आसान होगी ही इससे समय और इंंधन की भी बचत होगी।

झारखंड में बन रहा आशा का पुल
झारखंड में बन रहा आशा का पुल

Sahibganj ganga bridge : शादियां भी नहीं हो पाती समय पर

इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि कभी-कभी तो यहां शादियां भी समय पर नहीं हो पाती। नदी को पार करने के लिए यदि समय पर स्टीमर नहीं मिले तो बहुत लंबा चक्कर लगाना पडृात है। इससे शादियां भी रह जाती हैं। अब इस क्षेत्र के लोगों के लिए यह पुल नई उम्मीद बन कर आ रहा है।

Sahibganj ganga bridge : देश का तीसरा सबसे लंबा पुल

साहिबगंज में गंगा नदी पर बन रहा यह पुल पुल लंबाई के मामले में देश का तीसरा सबसे लंबा पुल होगा। इसकी लंबाई 6 किमी होगी। यह पुल झारखंड को बिहार से जोड़ रहा है। असम में चार साल पहले बने भूपेन हजारिका सेतु
9.15 किलोमीटर लंबा है। यह सबसे अधिक लंबा पुल है। अरुणाचल प्रदेश में दिबंग रिवर पुल दूसरे नंबर पर आता है। इसकी लंबाई 6.2 किलोमीटर है। अब साहिबगंज में 6 किलोमीटर लंबा पुलि बन रहा है। यह पुलिस झारखंड के साहिबगंज को बिहार के कटिहार को जोड़ेगा। इसका शिलान्यास 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। हालांकि इस पुल के निर्माण का ठेका चीनी कंपनी को मिला था, लेकिन जब भारत-चीन के बीच तनाव हुआ तो इसको रद कर दिया गया। अब इसका काम दिलीप बिल्कान द्वारा किया जा रहा है।

Sahibganj ganga bridge : एक्स्ट्रा डोज तकनीक

गंगा नदी पर बर रहा यह पुल एक्स्ट्रा डोज तकनीक से बनाया जा रहा है। देश में पहली बार इस तकनीक से सबसे बड़ा पुल बनाया जा रहा है। हालांकि बिहार में आरा-छपरा के बीच गंगा नदी में पहले इस तकनीक से पुल बनाया जा चुका है। इसकी लंबाई 1920 मीटर है। एक्स्ट्रा डोज तकनीक में केबल के सहारे पुल के लोड को बैलेंस किया जाता है। साहिबगंज में बन रहे पुल को 46 पिलर पर टिकाया जाएगा। प्रत्येक पिलर जमीन के अंदर 70 मीटर नीचे तक होगा। एक पिलर का व्यास गरीब 12 मीटर है।

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