Samrat Vikramaditya Global Award : सम्राट विक्रमादित्य जैसे शासक को मिलेगा 1 करोड़ रुपये का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

मध्यप्रदेश सरकार ने शुरू की पहल मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने की घोषणा

Samrat Vikramaditya Global Award : जब भी विश्व भर में बेहतर न्याय व्यवस्था की बात होती है तो सम्राट विक्रमादित्य का नाम जरूर आता है। सम्राट विक्रादित्य की राजधानी उज्जैन होती थी और उनकी न्याय प्रियता ने उनको और भी महान बनाया। अब उनके सम्मान में मध्य प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि एक करोड़ एक लाख रुपये का सम्राट विक्रमादित्य अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाएगा।

यह पुरस्कार हर साल दिया जाएगा। हालांकि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा अभी तक विक्रम अलंकरण पुरस्कार दिए जाते हैं। यह पुरस्कार ऐसे विशिष्ट व्यक्तित्वों को मिलता है, जिनमें सम्राट विक्रमादित्य के नवरत्नों’ की प्रतिभा दिखती हो। नवरत्नों में चिकित्सका के क्षेत्र के लिए धन्वंतरि, साहत्यक के लिए कालिदास, खगोल के लिए वराहमिहिर, वास्तु के लिए शंकु, व्याकरण के लिए वररुचि, नीति के लिए घटकर्पर, कथा के लिए बेतालभट्ट, तत्वज्ञान के लिए क्षपणक और शब्दकोश के लिए अमरसिंह जैसे विद्वान शामिल रहे।

महाशिवरात्री पर उज्जैन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के शुभारंभ समारोह में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी घोषणा की है। भारत में दिया जाने वाला यह पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का पुरस्कार होगा। यह पुरस्कार ऐसे विशिष्ट वैश्विक व्यक्तित्वों को दिया जाएगा, जिनके जीवन और कार्यों से सम्राट विक्रमादित्य के उच्च आदर्शों की झलक मिलती हो। यह कार्य सुशासन, दानशीलता, प्रज्ञा, न्यायप्रियता, विज्ञानबोध, संस्कृति-प्रेम और लोक कल्याण के क्षेत्र में हो सकते हैं।

सम्राट विक्रादित्य के बारे में

सम्राट विक्रादित्य का नाम भारत के महान शासकों में शामिल है। इतिहास के अनुसार ईसा पूर्व दूसरी शताबदी में मालवा राज्य में गर्दभिल्ल नामक राजा का शासन था। इस राज्य का इतिहास है कि देवराज इंद के पुत्र गंधर्वसेन और उनके दो पुत्र भर्तहरी और विक्रमसेन थे। ऐसा बताया जाता है कि शकों के राजा नहपान द्वारा मालवा को अपने कब्जे में लिया।

इस युद्ध में राजा गंधर्वसेन वीरगति को प्राप्त हो गए, लेकिन रानी वीरवती और दोनों राजकुमार निकलने में सफल रहे। 20 साल के बाद विक्रमसेन यानी सम्राट विक्रामदित्य ने मालवा को शकों से आजाद करवा कर अपना राज्य स्थापित किया। उनकी ताकत इतनी बढ़ी कि आसपास के कई राज्यों को मिलाकर विशाल राज्य बना लिया। उन्होंने सभी शकों को हरा दिया। इसी दिन से विक्रम संवत की शुरुआत हुई है। जो आज भारतीय कैलेंडर है। इसको विक्रम संवत कहा जाता है।

सरकार जारी करेगी अधिसूचना

इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा जल्द ही अधीसूचना जारी की जाएगी। वहीं इस पुरस्कार के साथ ही राज्य सरकार द्वारा 21 लाख रुपये का सम्राट विक्रमादित्य राष्ट्रीय सम्मान भी दिया जाएगा। यह पुरस्कार 5- 5 लाख रुपये के 3 प्रादेशिक शिखर सम्मान से अलग होगा। पुरस्कारों की पूरी प्रक्रिया के लिए सरकार द्वारा महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ बनाई जानी है। इसके लिए अधिसूचना जारी करने की तैयारी की जा रही है। इसके तहत सरकार का प्रयास है कि 19 मार्च से पहले प्रक्रिया पूरी हो। ताकि गुड़ी पड़वा के मौके पर यानी 19 मार्च को रामघाट-दत्त अखाड़ा घाट पर होने वाले कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार प्रदान किया जा सकें।

क्यों दिया जा रहा है पुरस्कार

इस दौरान उज्जैन पहुंचे मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने इस इन पुरस्कारों की योजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, साहत्य, संस्कृति, कला, और वैश्विक स्तर पर भारतीय वैचारिक प्रभाव को प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से यह पुरस्कार शुरू किए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ऐसी विभूतियों को उज्जैन की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा जाएगा। इससे सम्राट विक्रमादित्य की विचारधार का विस्तार होगा।

एक करोड़ एक लाख रुपये का पुरस्कार होगा अंतरराष्ट्रीय

यह पुरस्कार सरकार द्वारा 3 स्तर पर दिया जाएगा। सबसे पहला पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिया जाएगा। यह पुरस्कार 1 करोड़ 1 लाख रुपये का होगा। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार होगा, जिसमें 21 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं राज्य स्तरीय पुरस्कार में 3 लोगों को शामिल किया जाएगा। यह पुरस्कार 5-5 लाख रुपये के होंगे।

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