success story : हरदीप गिल व शांतनु शर्मा बने सेना में अधिकारी, परिवार में खुशी की लहर

सेना में कमीशन प्राप्त कर 87 वर्षीय दादी का सपना किया साकार

success story : पिछले दिनों देहरादून भारतीय सैन्य अकादमी (आइएमए) में 157वीं पासिंग आउट परेड का आयोजन हुआ हुआ। चार दिन पहले हुए इस कार्यक्रम 525 कैडेट पास आउट हुए। इसमें 491 युवा सैन्य अधिकारी भारतीय थल सेना में को मिले हैं। इनमें से एक हैं उत्तर प्रदेश के मेरठ निवासी शंतनु शर्मा और हरियाणा के जींद जिला निवासी हरदीप गिल।

यूं तो शंतनु शर्मा के पिता पब्लिक स्कूल में मुख्याध्यापक है, लेकिन उनकी पृष्ठभूमि किसान की ही है। ऐसे में किसान परिवार के बेटे शांतनु शर्मा अब सेना में अफसर बने हैं। वहीं हरदीप गिल की मां ने कड़े संघर्ष कर बेटे को इस मंजिल तक पहुंचाया है। हरदीप के पिता की मौत करीब 20 साल पहले हो गई थी, जब वे मात्र 2 साल के थे।

शांतनु शर्मा अपने परिवार में पहले ऐसे युवा हैं, जो सेना में गए हैं। वे भी आफिसर के पद है। शांतनु शर्मा की दादी उन्हें सेना में अधिकारी बनाना चाहती थी। शांतनु शर्मा ने सेना में कमीशन प्राप्त कर अपनी 87 वर्षीय दादी का सपना भी साकार किया है। इससे शांतनु शर्मा के घर पर दिवाली जैसी खुशी मनाई जा रही है। आसपास के लोग व रिश्तेदार भी घर पर पहुंच कर शुभकामनाएं दे रहे हैं। वहीं शांतनु शर्मा की इस सफलता के पीछे उनके पूरे परिवार का हाथ है।

success story :  परिवार ने दिया साथ, बेटे बढ़ाया मान

शांतनु शर्मा को सेना में अधिकारी बनाने के पीछे पूरे परिवार की मेहनत है। उनका पैतृक गांव मेरठ का घसौली है। हालांकि परिवार फिलहाल छावनी स्थित रेड क्वार्टर में रह रहा है। परिवार में सेना में अधिकारी बनने वाले वे पहले सदस्य हैं। शांतनु शर्मा की इस उपलब्धि के पीछे उनकी 87 वर्षीय दादी का वर्षों पुराना सपना रहा कि उनका पोता सेना में अफसर बने। अब पोते शांतनु शर्मा ने यह सपना साकार कर दिखाया है।

success story : पढ़ाई में शार्प रहा शांतनु

परिवार के सदस्यों ने बताया कि शांतनु पढ़ाई में शार्प रहा। उन्होंने सेंट मेरीज एकेडमी से 10वीं की पढ़ाई पूरी की। इसमें उन्होंने 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वहीं कृष्णा पब्लिक स्कूल से कक्षा 12 की पढ़ाई विज्ञान संकाय में की और इस परीक्षा में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। 12 में की शिक्षा के दौरान ही शांतनु शर्मा ने एनडीए की लिखित परीक्षा, एसएसबी और मेडिकल की परीक्षा एक साथ दी। इन तीनों को ही उन्होंने पहले प्रयास में उत्तीर्ण कर अपनी मेहनत को दिखा दिया। एनडीए खड़कवासला में तीन वर्षों की कठोर सैन्य प्रशिक्षण और स्नातक शिक्षा के बाद शांतनु का चयन आईएमए, देहरादून के लिए हुआ, जहां से उन्होंने अधिकारी बनकर अपने परिवार के सपनों को पूरा किया है।

success story : बहन ने भी की मदद

शांतनु शर्मा का परिवार शिक्षित है। हालांकि उनकी मां गृहिणी हैं शांतनु की सफलता के पीछे उनका ही हाथ सबसे अधिक रहा है। वहीं शांतनु के ताऊ व ताई पेशे से चिकित्सक हैं। ताऊ सर्जन और ताईजी स्त्री रोग विशेषज्ञ। शांतनु की उनकी बहन डा. माला शर्मा भी चिकित्सक हैं। उन्होंने प्रशिक्षण काल में बार-बार पर काउंसलिंग और निरंतर प्रेरणा देकर अपने भाई काे आगे बढ़ने में मदद की। डा. माला ने एमबीबीएस इसी साल पूर्ण किया है और फिलहाल वे स्पेशलाइजेशन में लगी हुई हैं। शांतनु के पिता सतीश शर्मा वर्तमान में एक पब्लिक स्कूल में प्रधानाचार्य हैं।

हरदीप गिल व शांतनु शर्मा बने सेना में अधिकारी, परिवार में खुशी की लहर
हरदीप गिल व शांतनु शर्मा बने सेना में अधिकारी, परिवार में खुशी की लहर

success story : मां के संघर्ष ने बेटे को बनाया सेना में अधिकारी

वहीं सेना में हरियाणा के जींद जिला के नरवाना क्षेत्र के गांव अलीपुर के हरदीप गिल भी सेना में अधिकारी बने हैं। उनकी सफलता के पीछे उनकी मां संतरो देवी के संघर्ष की कहानी बहुत लंबी है। करीब 20 साल पहले संतरो के पति का निधन हो गया था। जब हरदीप गिल महज 2 साल के थे। संतरो देवी ने तीन बेटियों और महज दो साल के बेटे हरदीप गिल को अकेले ही संघर्ष करते हुए पाला। संतरो देवी ने परिस्थितियों से हार नहीं मानी और अपने बच्चों को सफल बनाने के लिए रात दिन मेहनत की। संतरो देवी सरकारी स्कूल में मिड-डे मील वर्कर हैं। यहां सिर्फ नाम मात्र ही मानदेय मिलता है। इस काम के साथ संतरो देवी ने मेहनत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

success story : सरकारी स्कूल में की पढ़ाई

परिस्थितियों से जुझते हुए बच्चों ने भी मां के संघर्ष से प्रेरणा लेते सफलता के झंडे गाड़े हैं। हरदीप गिल ने अपने गांव के स्कूल से पढ़ाई करने के बाद IGNOU से स्नातक की परीक्षा पास की। परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए हरदीप ने भी मां का साथ दिया और पढ़ाई के साथ खेतों में काम किया। इन संघर्षों के बदौलत आज वे सेना में लेफ्टिनेंट बन गए हैं।

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