Uttarakhand development : उत्तराखंड ने पकड़ी विकास की रफ्तार
नया राज्य बनने के बाद हुआ 21 हजार किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण
Uttarakhand development :
जब भी हम कहीं बाहर घूमने की योजना बनाते हैं तो हमारे जहन में उत्तराखंड का नक्शा उभरने लगता है। आज उत्तराखंड अपनी अलग पहचान के साथ जहां पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, वहीं सड़क निर्माण से लेकर अन्य आधारभूत ढांचे के विकास में भी अपनी अलग पहचान बना रहा है। (Uttarakhand News) उत्तराखंड का गठन नौ नवंबर 2000 को हुआ। इन 25 सालों में उत्तराखंड ने विकास की नई यात्रा तय की है। इसमें सड़क नेटवर्क बहुत महत्वपूर्ण है। इन 25 सालों में उत्तराखंड में 21 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कें बनाई गई। इससे गांवों के लोगों को तो बेहतर सुविधा मिली ही है, साथ ही बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी उत्तराखंड के अंदर तक जाकर समझने का मौका मिला है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 सालों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर ही बदल दी है। प्रदेश में 21,316 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण हुआ और इस पर 11,134 करोड़ रुपये सरकार द्वारा खर्च किए गए। इस प्रयास से 1864 गांवों का जुड़ाव हो सका है। (Uttarakhand News) हालांकि अभी बहुत काम करना बाकी भी है। इसके लिए सरकार ने चौथे चरण के लिए योजना बनाई है। इसके तहत 1490 गांवों को भी जोड़ा जाना है। इसके लिए योजना बनाई गई है। इसके बावजूद 2203 गांवों तक सड़क मार्ग की पहुंच बनाना सरकार के लिए काफी कठिन है। इससे पार पाने के लिए प्रदेश की सरकार ने केंद्र से नियमों में छूट देने की मांग की है। यदि ऐसा होता है तो इन गांवों तक भी सड़क पहुंचाई जा सकती है।
Road Development : विशेष भौगोलिक संरचना
उत्तराखंड अपनी विशेष भौगोलिक संरचना के लिए जहां पर्यटकों की पहली पसंद बन रहा है, वहीं यह परिस्थितियां सड़क निर्माण जैसे कार्य के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं।(Uttarakhand News) यहां गांवों का आकार व लोकेशन काफी अलग है। इसके चलते फिलहाल सरकार 250 से अधिक जनसंख्या वाले 1490 गांवों तक सड़क मार्ग की सुविधा देने की योजना पर काम कर रही है। इसके लिए चौथे चरण की योजना बनाई जा रही है।

Development :1864 गांवों में सड़क निर्माण की योजना
वर्ष 2000 में नया राज्य बनने बाद सरकार द्वारा गांवों को सड़कों से जोड़ने के योजना बनाई गई। इसके लिए राज्य सरकार के साथ प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) से भी काफी मदद ली है। राज्य के गठन के बाद इस योजना के अंतर्गत 1864 गांवों में सड़क निर्माण की योजना बनाई गई। (Uttarakhand News) नियमानुसार इस योजना के तहत 250 से अधिक जनसंख्या वाले गांवो को ही शामिल किया जा सकता है। चयनित गांवों में अब तक 21,316 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा चुकी हैं। इस पर 11,134 करोड़ रुपये सरकार द्वारा खर्च किए गए हैं। वहीं अब योजना का चौथा चरण किया गया है। पहले जहां 2001 में हुई जनगणना के आधार पर गांवों की जनसंख्या तय हुई। इसके बाद 2011 की जनगणना होने पर 250 से अधिक जनसंख्या वाले 1490 गांव चयनित हुए हैं। अब इनके लिए काम शुरू किया जाना है। इसके लिए तैयारी की जा रही है।
PMGSY : नियम आ रहा विकास में आड़े
बेशक राज्य में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत काफी काम हुआ है, लेकिन यहां गांवों की स्थिति अलग है।
उत्तराखंड सरकार के अनुसार 407 गांव ऐसे हैं, जिनकी जनसंख्या 249 तक ही है। वहीं 150 से कम जनंसख्या वाले भी 1796 गांव प्रदेश में हैं। इन गांवों में सड़क के लिए नियम रूकावट बन रहे हैं। चूंकि जनसंख्या 250 तक नहीं है, ऐसे में इनको शामिल नहीं किया जा सकता। इसलिए अब प्रदेश सरकार ने नियम में विशेष छूट की मांग की है।

महत्वपूर्ण पर्वतीय स्थल
उत्तराखंड देश का प्रमुख पर्वतीय स्थल है। उत्तराखंड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ साथ शुद्ध पर्यावरण के लिए भी काफी आकर्षक है। ऐसे में लाखों लोग पर्यटन के लिए इस राज्य का रूख करते हैं। गढ़वाल और कुमाऊं दो मंडलों में बंटा उत्तराखंड राज्य लोगों के मन का भाता है। (Uttarakhand News) यह राज्य पहले उत्तर प्रदेश का ही हिस्सा था। इस क्षेत्र की अलग भौगोलिक परिस्थित ही इसको शुरू से अलग पहचान दिलवा रही है। हालांकि उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग 1938 से ही उठती रही है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के श्रीनगर में हुए सम्मेलन में पर्वतीय क्षेत्र को अलग करने की मांग की गई। हालांकि 1990 इसको लेकर आंदोलन तेज हो गया। लंबे संघर्ष के बाद उत्तराखंड को अपनी पहचान मिल पाई है।










