Indian Railways :  धुंध नहीं रोक पाएगी ट्रेन की स्पीड

डिजिटल डेशबोर्ड के साथ नई प्रणाली से बढ़ेगी सुरक्षा

Indian Railways : सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। रेल में यात्रा करने वालों को धुंध के कारण अब ट्रेन लेट होने का डर सताने लगा है। साथ ही रेलवे द्वारा इस मौसम में कई ट्रेन बंद भी कर दी जाती हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके लिए भारतीय रेल द्वारा सुरक्षा में व्यापक सुधार किए गए हैं नई सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 के तहत ट्रेनों में विशेष उपकरण के साथ डिजिटल डेशबोर्ड की सुविधा दी जाएगी। इससे जहां ट्रेन की गति पूरी रहेगी, वहीं सुरक्षा भी पुख्ता होगी।

Railway Safety : राजस्थान के रास्ते दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग देश के सबसे व्यस्त रेल ट्रैक में आता है। इस रूट पर इस बार धुंध रेल यात्रियों को परेशान नहीं कर सकेगी। इसके लिए रेलवे द्वारा नागदा व मथुरा स्टेशन के बीच 549 किलोमीटर लंबे रेलमार्ग को अत्याधुनिक कवच 4.0 सुरक्षा प्रणाली से लैस किया गया है। (Railway News) इसी प्रणाली के तहत ट्रेनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोटा से मथुरा रेल खंड पर 324 किलोमीटर तक व्यवस्था की गई थी। यह कार्य जुलाई माह में किया गया और इसके बाद कोटा से नागदा तक के रूट पर भी इसको लागू कर दिया है। नई सुरक्षा प्रणाली कवच 4.0 से लैस ट्रेन कोटा-वडोदरा एक्सप्रेस को सुबह 11 बजे कोटा से चलाया गया। अब नई व्यवस्था होने के बाद इस ट्रैक पर रेल गाड़ियों को संचालन मथुरा से नागदा तक 160 किमी प्रति घंटा की गति से किया जा सकता है।

Indian Railways : धुंध में नहीं दिखते सिग्नलस

धुंध के कारण सबसे अधिक परेशानी लोको पायलट्स को सिग्नलस देखने में आती है। इसके कारण ट्रेन की गति को नियंत्रित रखना पड़ता है। ऐसा नहीं करने पर बड़ा हादसा हो सकता है। इससे बचने के लिए ट्रेन की गति कम रखी जाती है, ताकि सभी सिग्नलस सही प्रकार से देख कर ट्रेन का संचालन किया जा सके। (Railway News) हालांकि रेलवे का यह रूट मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश व राजस्थान राज्यों से निकलता है, लेकिन यह सुरक्षा व्यवस्था अभी राजस्थान व उत्तर प्रदेश में की गई है। इसके लिए कचच डैशबोर्ड पर ही लोको पायलट को सिग्नल देखने की सुविधा होगी। ऐसे में पायलट को सिग्नलस देखने के लिए इंजन से बाहर झांकने की जरूरत नहीं हरेगी। कवच 4.0 को 160 किमी प्रति घंटे की गति तक के लिए अनुमति दे दी गई है।

Fog will not be able to stop the speed of the train
Fog will not be able to stop the speed of the train

Railway Safety : स्वेदशी प्रणाली करेगी सुरक्षा

धुंध में रेलगाड़ियों को सुरक्षित यात्रा के लिए तैयार करने वाली याह सुरक्षा प्रणाली स्वचालित है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसको भारत में ही तैयार किया गया है। इसके डिजाइन से लेकर विकास व निर्माण सारा काम स्वदेशी है। इस प्रणाली को अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन द्वारा करीब एक साल पहले ही अनुमोदन दिया जा चुका है।
रेलवे बोर्ड द्वारा पहले ही जोधपुर – फुलेरा और जोधपुर -जालोर-समदड़ी-धनेरा के बीच 126 किमी लंबे ट्रैक पर रेलवे क्रैश बैरियर लगाने को मंजूरी दी चुकी है।  (Railway News) ट्रेन की गति बढ़ने के कारण सुरक्षा के यह मानक जरूरी हो जाते हैं। रेलवे क्रैश बैरियर धातु से निर्मित सुरक्षा उपकरण हैं। इनको रेलवे ट्रैक के किनारे लगा कर ट्रेनों को पटरी से उतरने से रोकने के साथ-साथ बाहरी वस्तुओं को टकराने से बचाना भी होता है। इससे ट्रेन के साथ-साथ यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। साथ ही यह बैरियर गतिज ऊर्जा को भी अवशोषित करते हैं। इससे टकराव की स्थिति में गंभीरता कम होती है और जोखिम घट जाता है।

धुंध नहीं रोक पाएगी ट्रेन की स्पीड
धुंध नहीं रोक पाएगी ट्रेन की स्पीड

Railway Safety : वंदे भारत ट्रेन भी चलेगी तेज गति से

रेल यात्रियों के साथ ट्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगे क्रैश बैरियर नहीं होने से दिल्ली – जोधपुर वंदे भारत ट्रेन भी अधिकतम 108 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल पा रही है। हालांकि यह ट्रेन जयपुर -दिल्ली के बीच पूरी गति से चलती है। इस रूट पर अब क्रैश बैरियर लगने से यह ट्रेन 130 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति चल सकेगी। इसके अलावा उत्तर पश्चिम रेलवे ने जोधपुर – फुलेरा के बीच भी क्रैश बैरियर लगाने का काम शुरू कर दिया है।इससे लोगों व पशुओं के ट्रैक पर आने का खतरा नहीं रहेगा।

 

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