Gohana Western Bypass : गोहाना के पश्चिमी बाईपास के लिए नहीं मिल रही जमीन, खटाई में परियोजना
भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों ने जताई असहमति
Gohana Western Bypass : हरियाणा के तेजी से उभरते शहर गोहाना में बनने वाले पश्चिमी बाईपास की परियोजना फिर से लटक गई है। क्योंकि इसके लिए किसान जमीन देने को तैयार नहीं है। ऐसे में इस परियोजना पर काम शुरू नहीं हो पा रहा है। जमीन अधिग्रहण के लिए 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी है, लेकिन इतने किसानों की ओर से सरकार को सहमति नहीं मिली है।
यह परियोजना गोहाना शहर को जाम से मुक्ति दिलवाने के लिए बनाई है। हालांकि शहर का पूर्वी बाईपास कई वर्षों से चल रहा है, लेकिन पश्चिमी बाईपास की परियोजना अभी तक खटाई में है। क्योंकि शहर का बस स्टैंड भी अंदर ही है, ऐसे में जींद की ओर से जाने वाले वाहनों को शहर के बीचोंबीच निकलना पड़ता है। इसके कारण पुरानी मंडी, पुराने बस स्टैंड सहित कई क्षेत्रों में जाम रहता है। इससे निपटने के लिए यह योजना तैयार की गई है। किसानों की सहमति के लिए प्रशासन द्वारा काफी प्रयास किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है।
शहर की व्यवस्था बेहतर करने के लिए परियोजना बनाई गई कि रोहतक पर महरा गांव से शहर के पश्चिमी तरफ स्थित जींद रोड के बीच बाईपास बनाया जाए। इसके लिए राज्य सरकार की परियोजना के अनुसार जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाईपास के निर्माण में करीब 116 एकड़ जमीन चाहिए है। हालांकि शुरुआती सर्वे के दौरान, किसानों ने लगभग 220 एकड़ ज़मीन देने पर सहमति जताई थी। इसके बाद जब फाइनल अलाइनमेंट के तहत जमीन को चिह्नित किया गया, तो कई किसान अपनी जमीन देने काे तैयार नहीं हैं।

Gohana Western Bypass : संयुक्त खाते बन रहे परेशानी का कारण
इस परियोजना के लिए जो जमीन चिह्नित की गई है, उसमें कुछ जमीन के मालिक एक से अधिक लोग हैं। ऐसे में इसी जमीन के कुछ मालिक भूमि देने को तैयार हैं, लेकिन कुछ मना कर रहे हैं। यही कारण है कि जमीन अधिग्रहण का मामला सिरे नहीं चढ़ पा रहा है। इसके कारण कुछ जगहों पर सहमति के बावजूद जमीन सरकार को नहीं मिल पा रही है। इससे जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया अटकी हुई है।
Gohana Western Bypass : मुआवजा राशि पर भी नहीं सहमति
हालांकि कुछ किसान किसी भी सूरत में जमीन नहीं देना चाहते, लेकिन कुछ को मुआवजा राशि पर आपत्ति है। इसके साथ ही यहां बनने वाले बाईपास के बाद बन रही नई संभावनाओं को देखते हुए जमीन का अधिक मुआवजा चाहते हैं। यह बाईपास बनने से विशेषकर नई अनाज मंडी और शहर के बीच में लगने वाली वाहनों की भीड़ से काफी राहत मिल सकती है।
Gohana Western Bypass : यातायात व्यवस्था के लिए बाईपास जरूरी
गोहाना दिल्ली एनसीआर का तेजी से बढ़ता हुआ शहर है। इसको जिला बनाने की मांग भी लंबे समय हो रही है। यह शहर बेसक उपमंडल है, लेकिन नौ शहरों के केंद्र में स्थित है। सोनीपत, पानीपत, रोहतक, खरखौदा, गन्नौर, जींद, महम, जुलाना और सफीदों इसके साथ लगते शहर हैं। इन शहरों के बीच चलने वाले अधिकतर वाहन गोहाना से होकर ही निकलते हैं। शहर में बड़े वाहनों की वजह से भी भारी ट्रैफिक जाम की व्यवस्था रहती है।
Gohana Western Bypass : 6 साल पहले मिली थी मंजूरी
गोहाना के पश्चिमी बाईपास के लिए सरकार से 2019 में प्रशासनिक मंज़ूरी मिली थी। हालांकि, उस समय किसानों द्वारा कलेक्टर रेट से काफी अधिक मुआवजे की मांग की और परियोजना को रद्द कर दिया गया। इसके बाद 2025 में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई। लोक निर्माण विभाग के एसडीओ अशोक कुमार का कहना है कि बाईपास के लिए जमीन नहीं देने वाले किसानों की संख्या पर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। नियमानुसार जमीन अधिग्रहण के लिए 70 प्रतिशत किसानों की सहमति जरूरी है।










