Rakhigarhi 7000 Year Old Smart City : राखी गढ़ी की जमीन से फिर मिला प्राचीन इतिहास, पहली बार दो मीटर चौड़ी दीवार मिली

मिट्टी में दफन है 7 हजार साल पुराना स्मार्ट सिटी

Rakhigarhi 7000 Year Old Smart City : हरियाणा के हांसी जिला का गांव राखी गढ़ी अपने अंदर इतिहास का खजाना छिपाए हुए है। यहां चल रही खुदाई में हर दिन नए प्रमाण व चमत्कार सामने आ रहे हैं। आज हम जिन स्मार्ट सिटी का सपना देख रहे हैं, राखी गढ़ी की प्राचीन सभ्यता में ऐसे स्मार्ट सिटी 7000 साल पहले ही बस गए थे। अब यहां हो रही खुदाई में इसके प्रमाण मिल रहे हैं। अब खुदाई के दौरान यहां पर 2 मीटर चौड़ी दीवार भी मिली है। हालांकि इससे पहले कंकाल से लेकर अन्य वस्तुएं मिल चुकी है।

राखी गढ़ी यूं तो हांसी जिले का गांव है, लेकिन जींद जिला के पास लगता है। बात की जाए चंडीगढ़ से इसकी दूरी करीब 150 किलोमीटर दूर है। अब यहां पर सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बड़ा केंद्र विकसित हो रहा है। राखी गढ़ी में मिले प्रमाणों से पहले सबसे प्राचीन सभ्यता सिंघु घाटी को माना जाता था। यह 5 हजार साल पुरानी है, जबकि यहां मिले अवशेषों ने साफ कर दिया है कि राखी गढ़ी की सभ्यता 7 से 8 हजार साल पुरानी है। ऐसे में सरकार यहां पर ग्लोबल टूरिज्म हब के रूप में भी विकास की योजना बना रही है।
Rakhigarhi 7000 Year Old Smart City: Ancient history found again from the land of Rakhigarhi, for the first time a two-meter wide wall was found.
राखी गढ़ी की जमीन से फिर मिला प्राचीन इतिहास, पहली बार दो मीटर चौड़ी दीवार मिली

हो चुका है उद्घाटन

हरियाणा सरकार द्वारा यहां बड़ा म्यूजियम तैयार किया गया है। वहीं भारत सरकार द्वारा भी राखी गढ़ी को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए खास परियोजना तैयार की जा रही है। क्योंकि राखी गढ़ी में हड़प्पा नालेज सेंटर का उद्घाटन किया जा चुका है, ऐस में काफी लोग आते भी हैं। राखी गढी की प्राचीन सभ्यता के प्रमाण बताते हैं कि यहां पर अद्भुत इंजीनियरिंग और ड्रैनेज सिस्टम की विकसित था। यानी यह क्षेत्र स्मार्ट सिटी की तर्ज पर विकसित रहा है।

बदल गया इतिहास

यहां चल रही खुदाई यूं तो लंबे समय से जारी है, लेकिन इस क्षेत्र को हड़प्पा संस्कृति के विस्तार के रूप में माना गया है। वहीं पिछले दो दशकों से राखी गढ़ी में कई रहस्यमयी प्रमाण सामने आए हैं। इससे इतिहास बदल गया है। यह स्थान अब तक की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में शामिल हो गया है। इसका काल करीब 7 से 8 हजार साल पुराना है। सामने आए प्रमाण के आधार पर कहा जा सकता है कि राखी गढ़ी सबसे प्राचीन संस्कृति का हिस्सा रही है। यह सरस्वती नदी के किनारे स्थित है। वर्तमान में सरस्वती नदीं भी विलुप्त हो चुकी है। हालांकि खुदाई के दौरान नदी के अवशेष सामने आए हैं।

धौलवीरा से ज्यादा बड़ा शहर

देश में हुई पुरातात्विक खोजों के आधार पर मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के बाद गुजरात के धौलवीरा को प्राचीन इतिहास का सबसे बड़ा शहर आंका गया था। वर्तमान में हुई खोज के आधार पर साफ हुआ है कि राखी गढ़ी की जमीन में दफन शहर धौलवीरा से बड़ा है। पुरातत्वविदाें की मानें तो यह भारत के सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। माना जा रहा है कि यह शहर करीब 224 हेक्टेयर में फैला हुआ था।
Rakhigarhi 7000 Year Old Smart City: Ancient history found again from the land of Rakhigarhi, for the first time a two-meter wide wall was found.
राखी गढ़ी की जमीन से फिर मिला प्राचीन इतिहास, पहली बार दो मीटर चौड़ी दीवार मिली

सुनियोजित नगर व्यवस्था

आज हम शहरों का नियोजन कर स्मार्ट सिटी की परिकल्पना कर रहे हैं। वहीं राखी गढ़ी 7 से 8 हजार साल पहले ही स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित था। यहां बनी सड़कें सीधी पाई गई हैं और एक दूसरे को समकोण पर काटती हैं। यह परिवहन व्यवस्था के लिए काफी अच्छा माना जाता है। वहीं यहां बसा प्राचीन शहर ग्रिड पैटर्न पर था। घरों, गलियों और सार्वजनिक स्थलों की योजना पहले ही निर्धारित की जा चुकी थी। इसके अलावा यहां पर पानी की निकासी की व्यवस्था भी काफी आधुनिक रही है। इसके लिए नालियां पक्की बनाई गई थी। इनको पूरी तरह से ढ़का गया था। इनमें छेद भी पाए गए हैं, जिससे पता लगता है कि यह व्यवस्था नालियों की सफाई के लिए की गई थी।

पक्की ईंटों से हुआ निर्माण

यहां पर निर्माण पक्की ईंटों से किया गया है। ईंट भी समान आकार में प्रयोग की गई है।  इसके अलावा स्मार्ट सिटी के अनुसार ही पानी का भी बेहतर प्रबंधन किया गया है। इसमें कुएं, पानी को एकत्रित करने और निकासी की बेहतर व्यवस्था पाई गई है। आज जिस प्रकार की व्यवस्थाओं को आदर्श माना जाता है, ठीक उसी प्रकार की तकनीक प्रयोग हुई है।

नए रूप में हो रहा प्राचीन धरोहर का विकास

यह सभी अवशेष पाए जाने के बाद राखी गढ़ी का विकास नए स्वरूप में सामने आ रहा है। क्योंकि सरकार ने यहां ग्लोबल हब बनाने की तैयारी शुरू की है। यहां विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा ही 500 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं। इस स्थान पर विश्वस्तरीय पुरातात्विक संग्रहालय के साथ विशेष शोध संस्थान भी विकसित हो रहा है। 22 करोड़ रुपये से आधुनिक संग्रहालय का निर्माण किया जा चुका है।

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