Ramlala Surya Tilak : 26 मार्च को रामनवमी, अयोध्या में राम लला का होगा सूर्य अभिषेक
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान कर रहा व्यवस्था, 10 साल के लिए होगा अनुबंध
Ramlala Surya Tilak : करोड़ों भारतीयों की आस्था का केंद्र अयोध्या फिर से श्रद्धालुओं की बाट देख रहा है। मौका होगा रामनवमी का। इस बार रामनवमी 26 मार्च को है। इस दिन लोग अयोध्या पहुंच कर भगवान श्रीराम के दर्शन करते हैं। वहीं इस बार भी राम लला की मूर्ति को सूर्य तिलक किया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान द्वारा व्यवस्था की जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान की टीम होली के बाद यहां पहुंच कर अपनी व्यवस्था करेगी।
मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि राम मंदिर में इस वर्ष की रामनवमी भी आस्था के विज्ञान के अद्भुत संगम की गवाह बनने जा रही है। क्योंकि विशेष तकनीक के माध्यम से राम मंदिर के मुख्य शिखर से भूतल पर विराजमान रामलला के मस्तक पर खासतौर पर सूर्य की किरणाें से तिलक होने जा रहा है। हालांकि यह नजारा महज 4 से 5 मिनट तक ही रहेगा। इसके लिए विशेष तौर पर तैयारी की जा रही हैं।
पहले भी हो चुका है सूर्य तिलक
ऐसा नहीं है कि राम लला की मूर्ति पर पहली बार सूर्य तिलक होगा। इससे पहले भी 2024 में ऐसा हो चुका है। इस बार फिर से यह प्रक्रिया केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान द्वारा की जाएगी। तब भी रामनवमी के मौके पर ही ऐसा किया गया था। अब फिर से इसी मौके पर यह आयोजन होगा। इतना ही नहीं अब हर बार रामनवमी पर ऐसे ही सूर्य तिलक किया जाएगा। इसके लिए श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा योजना बनाई गई है कि केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) के साथ 10 साल के लिए अनुबंध किया जाएगा।
2024 में हुआ था सूर्य तिलक
दरअसल राम मंदिर में 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद पहली रामनवमी के मौके पर राम लला का सूर्य तिलक करवाया गया था। यह ऐतिहासिक पल बहुत ही मनोहर रहा। इसके लिए विशेष वैज्ञानिक तकनीक अपनाई गई। इसके लिए विशेष योजना बनी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा दिए र्निदेश के बाद सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआइ) रुड़की, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आइआइए) बेंगलुरु और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा पूरी टीम को लगाया गया था। इसके बाद यह अद्भुत नजारा बना था।
4 मिनट के लिए लगा था सूर्य तिलक
तब वैज्ञानिकों द्वारा की गई व्यवस्था के तहत 4 मिनट के लिए सूर्य की किरणें राम लला के मस्तिष्क पर आई थी। इससे प्राकृतिक रूप से सूर्य तिलक बन गया। इसके लिए खास परीक्षण किया गया। इससे ही यह तकनीक विकसित हो पाई। इसी तकनीक से राम मंदिर के दूसरे तल के ऊपर स्थित मुख्य शिखर से पीतल के पाइप व लेंस को सैट कर सूर्य के प्रकाश की किरणों को भूतल पर विराजित रामलला के मस्तक तक पहुंचाया गया। यह सूर्य तिलक दोपहर 12 बजे से 4 से पांच मिनट के लिए किया गया।










