Tribal Family : घने जंगल को बनाया घर, आदी मानव की तरह जी रहा यह परिवार

जंगल से बाहर लाने का प्रयास कर रहा प्रशासन, लेकिन मंजूर नहीं

Tribal Family :  आज कल हर कोई आलीशान घर और तमाम सुख सुविधाओं के बीच जीना चाहता है, लेकिन आज भी देश के एक हिस्से में ऐसा परिवार है, जिसको कथित सुविधाओं की कोई जरूरत नहीं है। यह परिवार घने जंगल को ही अपना घर बना कर रह रहा है। हालांकि प्रशासन द्वारा इनको जंगल से बाहर लाने का प्रयास किया गया, लेकिन यह परिवार इसको मंजूर नहीं कर रहा है।

जी हां यहां जिक्र हो रहा है भारत के तेलंगाना राज्य के भद्राद्री कोतागुडेम जिला के अश्वरावुपेटा मंडल में पड़ने वाली एक एक ऊंची पहाड़ी का। यहीं पर यह आदिवासी परिवार पिछले 25 वर्षों से रह रहा है। परिवार अपनी सभी जरूरत जंगल से ही पूरी करता है और गर्मी, सर्दी व बारिश में यहीं रहता है। तीन सदस्यों वाले परिवार में दंपती के साथ उनका बेटा भी रहता है। इस परिवार में बेटी भी थी, लेकिन उसकी शादी कर दी गई है।

Tribal Family: Made the dense forest their home, this family is living like a primitive human being
घने जंगल को बनाया घर, आदी मानव की तरह जी रहा यह परिवार

Tribal Family In Forest : प्रशासन ने किए प्रयास

हालांकि जहां पर यह परिवार रह रहा है, इससे करीब 3 किलोमीटर नीचे आकर इंसानी बस्ती है। प्रशासन ने कई बार इस परिवार को उनके रिहायस वाले स्थान से नीचे शिफ्ट करने की योजना बनाई, लेकिन परिवार यहां से हटने को राजी ही नहीं हुआ। जहां पर यह परिवार रहता है, वहां तक लोगों का आना जाना भी नहीं होता। परिवार के लोग करीब 3 किलोमीटर नीचे मंदिर तक आते हैं।

यहां बैनर के लिए प्रयोग होने वाले फ्लेक्स को अपनी झोंपड़ी पर डालने के लिए भी ले आते हैं। हालांकि यहां पर रहने अन्य करीब 39 परिवार प्रशासन के प्रयासों से वर्ष 2000 में नीचे आबादी वाले क्षेत्र में आ गए। इनके लिए कवादिगुंडला पंचायत क्षेत्र के कोथकन्नई गुडेम क्षेत्र में पुनर्वास कॉलोनी का निर्माण किया गया है। बस इस एक परिवार को छोड़ कर सभी लोग इस कालोनी में रहते हैं। इस परिवार में परिवार के मुखिया गुरुगुंटला रेड्डैया, उसकी पत्नी लक्ष्मी और बेटा गंगि रेड्डी रह रहे हैं।

Tribal Family : पुराने नाम से ही बनाई बस्ती

प्रशासन को इन आदिवासी परिवारों को उनके मूल स्थान से नए क्षेत्र में लाने में करीब 10 साल का समय लग गया। जहां पर यह परिवार रहते थे, उस जगह का नाम गोगुलापुडी था। चूंकि इन परिवार को एक नई बस्ती में बसाया गया, ऐसे में इस नई बस्ती का नाम भी उसी जगह के नाम पर गोगुलापुडी रख दिया गया। प्रशासन का कहना है कि यहां पर इन परिवारों को आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। जो कि जंगल में पहाड़ी पर संभव नहीं थी। इसके अलावा बच्चों को शिक्षा भी दिलवाई जा सकती है।

Tribal Family: Made the dense forest their home, this family is living like a primitive human being
घने जंगल को बनाया घर, आदी मानव की तरह जी रहा यह परिवार

Tribal Family :अलाव जलाकर बीतती है सर्दी

बीबीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह परिवार इसी स्थान पर रहना चाहता है। बीबीसी का कहना है कि गुरुगुंटला रेड्डैया की पत्नी लक्ष्मी अपने पति और उनके बेटे गंगि रेड्डी अपने पिता के साथ रहना चाहते हैं। इन लोगों ने कहा कि गुरुगुंटला रेड्डैया जहां रहेंगे, वे वहीं रहेंगे। लक्ष्मी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें दिन वार तक का पता नहीं होता। न ही समय से कोई वास्ता है।

यह परिवार बिना डरे यहां रहता है। हालांकि अपनी सुरक्षा के लिए रात को आग जलाता है। सर्दी के मौसम में अलाव जलाकर यह परिवार अपना गुजारा करता है। मूल रूप से परिवार खेती करता है और सब्जियों के साथ चावल और ज्वार उगाता है। इस परिवार को बीमारियों से भी कोई वास्ता नहीं है। लक्ष्मी के कुल नौ बच्चे हुए थे। इनमें से सात की मौत हो गई एक बेटा और बेटी बचे हैं। बेटी की शादी कर दी गई है।

Tribal Family : 5 झोपडि़यों की बस्ती

बेशक यहां पर सिर्फ एक ही परिवार रहता है, लेकिन कुल 5 झोपड़ी बनाई गई हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से 3 झोपड़ी इस परिवार के लिए हैं तो दो झोंपड़ी मूर्गियों व कुत्तों के अलावा इंधन को सुरक्षित रखने के लि भी झोंपड़ी बनाई गई है। लक्ष्मी का कहना है कि वे अपनी बेटी से मिलने नीचे बस्ती में जाती रहती हैं। वहीं पर उसका आधार कार्ड व राशन कार्ड भी बना है। परिवार के दो अन्य लोगों का आधार कार्ड नहीं बना है।

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