65th Rank In UPSC : बहादुरगढ़ की राखी ने जुनून से पाई जीत, पति व सास-ससुर ने दिया साथ यूपीएससी में पाया 65 वां रैंक
यूपीएससी की परीक्षा के लिए छोड़ दी नौकरी, अब बनी आईएएस
65th Rank In UPSC : मन में कुछ करने का हौसला हो तो सब कुछ संभव है। यह कर दिखाया है बहादुरगढ़ की राखी दलाल ने। उन्होंने कड़े संघर्ष से आईएएस की परीक्षा में 65वां रैंक प्राप्त कर अपनी सफलता की कहानी लिख दी। हालांकि इसके लिए परिवार का भी पूरा सहयोग मिला। राखी ने आईएएस की परीक्षा देने के लिए नौकरी भी छोड़ दी। कड़ी मेहनत कर परीक्षा दी और अब यूपीएससी की परीक्षा में 65वां रैंक प्राप्त किया है।
राखी दलाल को इसके लिए परिवार का भी पूरा सहयोग मिला। यहां तक की पति, सास-ससुर ने कह दिया कि पैसे की कोई दिक्कत नहीं है। अगर हिम्मत है तो तैयारी करे और करियर बनाए। बस परिवार का इतना ही सहयोग राखी दलाल के लिए बहुत बड़ा मौका मिल गया। उसने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया और दिखा दिया कि परिवार की मदद और खुद के हौसले से हर बाधा को दूर किया जा सकता है। यह कहानी है बहादुरगढ़ के सैक्टर 6 निवासी राखी दलाल की।
5 साल की बेटी घर की जिम्मेदारी सब मैनेज किया
ऐसा नहीं है कि राखी दलाल ने यूपीएससी की परीक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारियां छोड़ दी हों। उनकी 5 साल की बेटी भी है। बेटी प्रीशा का जन्म 2021 में आ। ऐसे में परिवार के साथ बेटी की जिम्मेदार भी थी। इस बस के बीच बेहतर प्रबंधन करते हुए पढ़ाई जारी रखी। हालांकि परिवार का पूरा सहयोग मिला और इसके बदल पर ही वे यूपीएससी जैसी परीक्षा उत्तीर्ण कर पाई हैं। क्योंकि पति पति लविश चौधरी के साथ सास हरभजन कौर और ससुर परमिंदर जीत ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया। जब तैयारी के लिए लाइब्रेरी में जाती थी तो यही लोग बेटी को संभालते थे।
5वें प्रयास में मिली सफलता
राखी दलाल ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा-2025 में 65वां रैंक प्राप्त किया है। हालांकि यह सफर आसान नहीं रहा। इससे पहले राखी दलाल को 4 प्रयासों में असफलता मिल चुकी थी। अब उन्होनें 5वें प्रयास में अपनी मेहनत की कहानी लिख दी है। हालांकि पहले 4 प्रयासों में भी उन्होंने जीतोड़ मेहनत की, लेकिन सिलेबस पूरा नहीं हो पाया। इससे वह परीक्षा भी पास नहीं कर पाई, लेकिन इस बार पिछली कमियों को दूर करते हुए व्यवस्थित तरीके से पढ़ाई की। इसके परिणाम स्वरूप परीक्षा भी पास हुई और साक्षात्कार भी। इससे वे पहले ही चयन के लिए आश्वस्त हो गई थी।

छोड़ दी पीओ की नौकरी
दरअसल राखी दलाल मूल रूप से बहादुरगढ़ के पास स्थित मांडौठी गांव की हैं। उनके माता-पिता बहादुरगढ़ के सेक्टर-6 में रहते हैं। 7 साल पहले राखी की शादी चंडीगढ़ निवासी लविश चौधरी से हुई थी। लविश चौधरी एसबीआई में बैंक मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं, वहीं राखी भी एसबीआई में पीओ के पद तैनात थी। राखी को यूपीएससी की परीक्षा पास करने का जुनून था। वे 2015 में पीओ की नौकरी पर लगी थी और इसके चलते 2020 में नौकरी छोड़ दी।
आईआईटी रूड़की से पास आउट हैं राखी
राखी दलाल विज्ञान की छात्रा रही हैं। उन्होंने रूड़की स्थित आईआर्टी से बायोटेक्नोलॉजी में बीटेक की है। बीटैक के बाद पंजाब विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएशन किया और इसके बाद फैसला लिया कि वे सिविल सेवा परीक्षा में जाएंगी। ऐसे में उन्होंने यूपीएससी में पॉलिटिकल साइंस एवं इंटरनेशनल रिलेशंस वैकल्पिक विषय रखा। हालांकि बैंक में नौकरी करते हुए उन्हें प्रशासनिक अनुभव हुआ। तभी मन में आया कि प्रशासनिक सेवा के माध्यम से समाज के लिए व्यापक स्तर पर काम किया जा सकता है।
पहले 4 प्रयासों में प्रारंभिक परीक्षा भी नहीं हुई पास
राखी दलाल बताती हैं कि इस मंजिल तक पहुंचने के लिए उन्हाेंने लंबा संघर्ष किया है। इससे पहले उन्होंने 4 बार यूपीएससी की परीक्षा दी, लेकिन प्रारंभित परीक्षा भी पास नहीं कर पाई। इससे न तो हार मानी और न ही निराशा को आने दिया। प्रयास जारी रखा। जहां-जहां कमियां रही, उनको पहचाना और तैयारी की रणनीति को बदल कर इस बार सिलेबस व्यवस्थित तरीके कवर किया। इससे परीक्षा काफी आसान हो गई।










