First Hydrogen Train : हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की योजना को झटका, प्लांट से नहीं हो पा रहा पर्याप्त गैस का उत्पादन

प्लांट की खामियों को दूर करने में लगी इंजीनियर्स की टीम

First Hydrogen Train : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन में अब नई दिक्कत आ गई है। क्योंकि हरियाणा के जींद स्थित रेलवे जंक्शन पर बनाए गए हाइड्रोजन प्लांट पर्याप्त मात्रा में गैस का निर्माण नहीं हो पा रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि नई तकनीक के कारण इस प्रकार परेशानियां आना स्वाभाविक हैं। इनको दूर करने के लिए इंजीनियर्स की टीम लगी हुई है। जल्द ही इस समस्या का भी समाधान कर लिया जाएगा।

गौरलब है कि रेलवे द्वारा इस साल के शुरूआत में ही नई हाइड्रोजन चालित ट्रेन को जींद लाया गया था। यहां से इस ट्रेन को जींद- सोनीपत के बीच चलाने की योजना है। यह देश की पहली ट्रेन होगी। भविष्य में अन्य ट्रेन भी इसी तकनीक पर चलाई जानी हैं। ऐसे में शुरूआती दौर के कारण कई प्रकार की दिक्कत आ रही हैं।

3 बार हो चुका है ट्रायल

हाईड्रोजन ट्रेन को चलाने के लिए 3 बार ट्रायल हो चुका है। जो परिचालन के लिहाज से सफल रहा है। एक महीने पहले ट्रायल की शुरूआत हुई थी। इस दौरान अलग-अलग दूरी के हिसाब से ट्रेन को चला कर देखा गया है। हालांकि ट्रेन को पटरियों पर लाने से पहले भी कई गहन टेस्ट किए गए हैं। क्योंकि ट्रेन को 1 जनवरी को दिल्ली के शकूर बस्ती यार्ड से डीजल इंजन की मदद से जींद लाया गया। यहां पर तभी तक अलग-अलग तकनीकी टीम जांच कर रही हैं।

लंबित है औपचारिक उद्घाटन

क्योंकि यह देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है, ऐसे में इसका बड़े स्तर पर औपचारिक शुभारंभ होगा। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस शुभारंभ कर सकते हैं, लेकिन तकनीकी खामियों को सुलझाने में लग रहे समय के कारण रेलवे भी शुभारंभ की तारीख तय नहीं कर पा रहा है। अभी ट्रेन के इंजन और बोगियों का ट्रायल चल रही था, हाइड्रोजन उत्पादन को लेकर नई दिक्कत आ गई है।

बाहर से भरी जा रही हाइड्रोजन

जींद के हाइड्रोजन प्लांट में तकनीकी दिक्कत आने के कारण बाहर से ट्रेन में हाइड्रोजन भरी जा रही है। इसके चलते ट्रेन को सही प्रकार से चलाने की योजना नहीं बन पाई है। क्योंकि लगातार ट्रेन की परफार्मेंस ट्रायल चल की जा रही थी और इसके बीच में ही हाइड्रोजन आपूर्ति संबंधित समस्या आ गई।

ऐसे में ट्रायल का शेड्यूल भी प्रभावित हुआ। अधिकारियों का कहना है कि हाइड्रोजन प्लांट में तकनीकी दिक्कत के चलते गैस का उत्पादन सुचारू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में बाहर से हाइड्रोजन गैस ट्रेन में भरने की प्रक्रिया की जा रही है। इसमें अधिक समय लगने के कारण काम रूका हुआ है।

RDSO ने भी की जांच

ट्रेन के जींद आने के बाद विभिन्न एजेंसियों द्वारा जांच की गई है। इसी कड़ी में भारतीय रेलवे के अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) की टीम ने भी जांच करते हुए हाइड्रोजन ईंधन से ट्रेन के चलाने को लेकर अपनी जांच की। वहीं दिल्ली के अलावा दूसरे केंद्रों से भी रेलवे के इंजीनियर इस परियोजना पर काम कर रहे हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि यात्रियों के लिए ट्रेन कब से चलेगी।

600 यात्रियों की व्यवस्था

फिलहाल जींद पहुंची ट्रेन जब भी यात्रियों के लिए चलेगी, इसमें एक बार में 600 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था होगी। ट्रेन के दोनों छोरों पर 2 इंजन हैं और इसके कुल कुल 8 कोच है। यात्रियों के लिए सुविधा रहेगी कि यह ट्रेन कम समय में अधिक दूरी तय करेगी। क्योंकि इसी स्पीड अधिक रहेगी। हालांकि पहले यह भी माना जा रहा था कि जींद-सोनीपत रेलवे ट्रैक इस ट्रेन के लिए उपयुक्त नहीं है, लेकिन इस ट्रेन का परिचालन ट्रायल के दौरान सफल रहा।

चीन व जर्मनी जैसे देशों की श्रेणी में आएगा भारत

हाइड्रोजन ट्रेन के परिचालन से भारत विश्व के ऐसे देशों में शामिल हो जाएगा, जो इस प्रकार के प्रदूषण रहित ट्रेन का संचालन कर रहे हैं। क्योंकि इस ट्रेन के चलने से धुआं नहीं सिर्फ भांप ही बाहर निकलेगी। हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन की बात की जाए तो अभी तक जर्मनी, चीन, जापान, फ्रांस और स्वीडन देशों में चलाई जा रही हैं।

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