Life On Earth : पृथ्वी पर कैसे पनपा जीवन, रहस्यों भरा करोड़ों सालों का सफर

निर्जीव धधकते लावा से धड़कते जीवन की कहानी

Life On Earth : आज के दौर में हम जो आसान और सुरक्षित जीवन जी रहे हैं, यह कोई चमत्कार नहीं, करोड़ों सालों की जटिल प्रक्रिया का हिस्सा है। क्योंकि यह प्रक्रिया पूरी होने और पृथ्वी पर जीवन संभव होने के बीच लंबा कालखंड पड़ता है। करीब 4.5 अरब साल की यह यात्रा पृथ्वी पर जीवन का बीजारोपण करने वाली है।

आज जब हम अत्याधुनिक यंत्रों से पृथ्वी को देखते हैं तो यह बहुत ही आकर्षक लगती है, लेकिन करीब 4.5 करोड़ साल पहले यह गोला एक धधकता हुआ पिंड था। परिवार स्वरूप वायु मंडल में जहरीली गैस रहती थी और अंतरिक्ष से लगातार उल्कापिंडों की बारिश होती थी। उस दौर के वायुमंडल को सोच कर जीवन की कल्पना करना भी मुश्किल है। हालांकि आधुनिक समय में हुए भूवैज्ञानिक शोधों से पता चलता है कि यही उथल-पुथल जीवन के बीज रोपित करने वाली घटनाएं थी।

कौन थे पृथ्वी के पहले निवासी

जीवन की शुरूआत के लिए आज के वातावरण को बहुत ही जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ा है। इसको कुछ लोग जादुई घटना भी कहते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह घटना पूरी तरह से रसायन विज्ञान की एक जटिल प्रक्रिया से ही संभव हो पाया है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि विभिन्न रासायनिक प्रक्रियाओं के बीच सबसे पहले विभिन्न गैसें ही आई। हालांकि कि अंतरिक्ष की चट्टानों पर हुए शोध से पता चलाता है कि इनमें कार्बनिक अणु और पानी की मात्रा प्रचुर है। इससे यह साफ होता है कि जीवन के जरूरी तत्व कॉस्मिक डिलीवरी के माध्यम से पृथ्वी पर आए। यहीं से जीवन की शुरूआत हो सकती है।

समुद्र में हुई जीवन की शुरूआत

हालांकि अलग-अलग समय पर वैज्ञानिकों की थ्योरी बदलती रहती हैं। लेकिन सबसे प्रचलित थ्याेरी यही है कि आधुनिक जीवन का विकास समुद्र में हुआ है। क्योंकि यह पृथ्वी के सबसे गहरे प्राकृतिक स्थान हैं। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों का मत है कि डीएनए से पहले जन्म हुआ है आरएनए का।

बिना आक्सीजन वाला जीवन

ऐसी भी मान्यता है कि पहले जीवन बिना ऑक्सीजन के चलता था। हालांकि यह जीवन बहुत ही सूक्ष्म था। ऐसा माना जाता है कि करीब 2.4 अरब साल पहले ग्रेट ऑक्सीकरण इवेंट हुआ। प्राकृतिक रूप से वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ गई। इससे अनेक जीवों का जीवन समाप्त हो गया। यहीं नए जीवन का आरंभ हुआ है। इसके बाद जटिल कौशिकाएं बनी। यह काल करीब 2 अरब साल पहले रहा हुआ।

विभिन्न वैज्ञानिकों की थ्योरी

पृथ्वी पर जीवन को लेकर विभिन्न वैज्ञानिकों ने अपनी थ्योरी दी हैं। इसमें चार्ल्स डार्विन द्वारा 1871 एक छोटे गर्म तालाब की कल्पना करते हुए जीवन को समझा। डार्विन के अनुसार प्रोटीन के यौगिक बनने जीवन बना है।

इसका जन्म अमोनिया, फास्फोरिक लवण, प्रकाश, ऊष्मा के साथ बिजली की उपस्थिति में रसायनिक प्रक्रिया से हुआ है। वहीं एलेक्जेंडर ओपेरिन और जे.बी.एस. हाल्डेन का मानना है कि प्रारंभिक वातावरण में ऑक्सीजन नहीं थी। वहीं इसी थ्योरी को 1953 का मिलर-यूरी प्रयोग भी सही ठहराता है।

आरएनए में रही आनुवांशिक जानकारी

आज जिस प्रकार डीएनए की बात होती है, इससे पहले आरएनए की भूमिका रही है। क्योंकि आरएनए की भूमिका डीएनए से भी अधिक रही है। इससे आनुवंशिक जानकारी के साथ एंजाइम की तरह रासायनिक प्रक्रिया को तेज करने की क्षमता थी।

लुका से बनी जीवन की विविधताएं

वैज्ञानिकों का मानना है कि करीब 4 अरब साल पहले वायु मंडल में मौजूद रसायनों ने एक वसायुक्त झिल्ली में स्वयं को कैद कर लिया। यहीं से कोशिका का जन्म होता है। इस प्रक्रिया को ही लुका यानी LUCA (Last Universal Common Ancestor) नाम मिलता है। इससे सरल और एक कोशिकीय जीव पनपे।

इसके बाद सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा बनाते हुए अन्य जीवों ने ऑक्सीजन छोड़ी और मात्रा बढ़ गई। इसको ही जीवन की प्रक्रिया में ग्रेट ऑक्सीकरण इवेंट कहते हैं। क्योंकि इससे पृथ्वी का वायुमंडल पूरी तरह बदल गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button