Rogan Art : दुनिया में सिर्फ भारत के एक परिवार के पास है यह खास कला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं मुरीद

अरंडी के तेल से होती ऐसी कलाकारी आप भी जानकर चौंक जाएंगें

Rogan Art : भारत विभिन्नताओं से भरा देश है। विशाल देश भारत के हर क्षेत्र में कोई न कोई ऐसा हुनर जरूर है, जो अपने आप में बहुत खास होता है। ऐसा ही हुनर गुजरात के कच्छ क्षेत्र के एक परिवार के पास है। वर्तमान दौर की बात की जाए तो विश्व भर में यह हुनर सिर्फ एक ही परिवार के पास बचा हुआ है। इसका डंका विश्व भर में बजता है। यहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस परिवार के हुनर के मुरीद हैं।

दरअसल यह हुनर एक प्रकार की कला है। जो अरंडी के तेल में रंगों को मिलाकर की जाती है। यह कला इस परिवार के हाथों का जादू तो है ही, साथ में कुदरत का करिश्मा भी है, जो आज भी इस कला को जीवत रखे हुए है। इस कला का नाम है रोगन आर्ट। इससे होने वाली चित्रकारी बहुत ही अनोखे ढंग से की जाती है। इसके कारण ही इसकी काफी मांग भी रहती है। यहां तक की कई विशेष कला को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2014 में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को उपहार में भी दिया गया।

निरोना गांव में बची है यह कला

एक समय में बहुत अपनी खास विद्या के लिए जानी जाती है। आज यह कल कला गुजरात के कच्छ क्षेत्र के निरोना गांव में बची है। इस गांव निवासी पद्मश्री अब्दुल गफूर खत्री द्वारा इसको किया जा रहा है। उनके द्वारा रोगन आर्ट से बनी वृक्ष जीवन (Tree of Life) पेंटिंग अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को भेंट स्वरूप दी गई थी।

राजा- महाराजाओं की पंसद रही

रोगन आर्ट एक समय में बहुत ही विशेष रही है। इस कला से बने वस्त्र कभी राज-महाराजाओं की पंसद होते थे। विशेषकर शाही परिवार की औरतें भी विशेष मौकों पर इस कला से बने वस्त्रों का प्रयोग करती थी। जैसे दुल्हन के लहंगे, बेडशीट जैसे कामों में इसका प्रयोग अधिक होता था। मान्यता है कि इस कला का आरंभ करीब 400 साल पहले ईरान में हुआ था। फारसी भाषा के शब्द रोगन यानी तेल से इसका नाम पड़ा है। जैसे ही ईरान से खत्री परिवार भारत आया, यह कला उनके साथ ही भारत आ गई।

अरंडी के तेल का होता है प्रयोग

रोगन आर्ट जैसे की नाम से ही साफ हो रहा है कि इसमें तेल का प्रयोग होता है। इसके लिए अरंडी (Castor Oil) का प्रयोग होता है। इसको काफी देर के लिए उबाला जाता है। इसके बाद इसका गाड़ा पेस्ट बना कर इसमें प्राकृतिक रंगों को मिलाया जाता है।

इससे रंग पक्के हो जाते हैं और इनसे पेंटिंग करने पर यह जम जाते हैं। एक दौर में इस काल का वैभव बहुत अधिक रहा है। हालांकि आज यह विलुत्प हो रही है। क्योंकि इस प्रकार से तैयार किया गया यह तेल रंग के साथ कपड़े के अंदर तक जाकर हमेशा के लिए अपनी जगह बना लेता है।

दुनिया में सिर्फ भारत के एक परिवार के पास है यह खास कला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं मुरीद
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एक छड़ी से उकेरे जाते हैं रंग

इस विद्या में अरंडी के तेल में मिले रंगों को कलाकार हथेली पर रख कर एक विशेष छड़ी या कलम के साथ पेंटिंग तैयार करता है। यह डिजाइन बहुत ही महीन होता है। अलग-अलग रंगों का मिश्रण होने पर यह बहुत ही शानदार बनती है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के कैमिकल का प्रयोग नहीं होता, जो स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा होता है।

मशीनीकरण के कारण संकट

हालांकि इस विद्या पर मशीनीकरण के कारण संकट है। हाथ से काम होने के कारण इससे तैयार माल महंगा हाता है। ऐसे में बाजार में मांग नहीं होने के कारण इस काम में लगे अनेक परिवारों ने इसको छोड़ दिया। अब कच्छ के निरोना गांव निवासी खत्री परिवार ही इस विद्या को जीवित रखे हुए है। हालांकि राष्ट्रपति बराक ओबाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रोगन आर्ट से बने ट्री ऑफ लाइफ पेंटिंग से बाइ से इस कला को नई पहचान मिली है।

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