Zinda Terahvin Bhandara : यूपी में जीते जी ही पूरी कर दी मरने के बाद वाली रस्म, वजह जानकार हो जाएंगे हैरान
कार्ड छपवाकर दिया निमंत्रण, पूरे गांव के साथ रिश्तेदारों को भी करवाया भोज
Zinda Terahvin Bhandara : हर किसी की अपनी जिंदगी होती है। जीवन में कुछ कार्य करने के लिए व्यक्ति हमेशा ही योजना बनाता है। कोई भी ऐसा कार्य जो उसे खुशी दे, वह करता है। ऐसा ही मामला सामने आया है अब देश के उत्तर प्रदेश राज्य में। यह गांव है उत्तर प्रदेश के औरैया जिला का।
औरैया के लक्ष्मणपुर गांव निवासी 65 वर्षीय राकेश यादव ने अपने जीते जी ही मरने के बाद वाली रस्म पूरी कर डाली। इतना ही नहीं, इसके लिए कार्ड भी छपवाए गए। कार्ड से निमंत्रण देकर न सिर्फ गांव के लोगों को, रिश्तेदारों को भी भोज करवाया। राकेश यादव का कहना है कि उसने अकेलेपन और भविष्य की चिंता के चलते से अपनी जिंदा तेरहवीं करने का फैसला लिया।
इस आयोजन में कम नहीं करीब 2 हजार लोगों को भोजन करवाया गया। राकेश यादव के इस फैसले से जहां गांव चर्चा का विषय बना हुआ है, वहीं लोग भावुक होकर उनके इस आयोजन में पहुंचे। क्योंकि राकेश यादव अपने जीवन के अकेलेपन और भविष्य की चिंता को लेकर यह फैसला लिया है।
इसके लिए राकेश यादव ने स्वयं ही लोगों के पास जाकर न्यौता भी दिया है। इसके बाद लोग राकेश यादव की जिंदा तेरहवीं में काफी संख्या में पहुंचे। हालांकि लोग यहां पहुंच कर भावुक तो थे, लेकिन राकेश यादव की यह अच्छा पूरी होने पर उन्हें खुशी भी थी।
नहीं हुई है शादी, 2 भाईयों की हो चुकी है मौत
राकेश यादव 65 साल की हैं और उन्होंने शादी नहीं की है। उसके 2 भाईयों की मौत पहले हो चुकी है। इसके बाद से वह अकेला रह गया। ऐसे में राकेश यादव को चिंता सता रही थी कि निधन के बाद कोई भी उनके लिए 13वीं का कार्यक्रम आयोजित नहीं करेगा। इसके कारण उन्होंने अपने जीते जी ही खुद का तेरहवीं कार्यक्रम करने का फैसला ले लिया। राकेश यादव ने बताया कि भविष्य की चिंता करते हुए उन्होंने यह फैसला लिया है।
पैतृक घर भी किया दान
राकेश यादव ने सिर्फ रस्म तेरहवीं ही अपने जीते जी नहीं की, अपना पैतृक घर भी दान कर दिया। अब उन्होंने फैसला लिया है कि वह झोपड़ी में रहेगा। जीवन में ऐसे कम ही लोग मिलते हैं, जो पूरी मोह माया को छोड़ कर इस प्रकार रहने का फैसला करते हैं। अपने जिंदा तेरहवीं के भंडारे को राकेश यादव ने असली तेरहवीं की तरह ही किया है। कार्ड भी इस प्रकार ब्लैक एंड व्हाइट छपवाया गया। यह आयोजन 30 मार्च को आयोजित किया गया।
मेरी कस्ती वहां डूबी जहां पानी कम था
राकेश यादव ने अपने जिंदा तेरहवीं के कार्ड पर कई रोचक बातें भी लिखी हैं। इसमें उन्होंने सबसे पहले लिखा है कि उन्हें जिंदा भंडारा करने का मौका मिला है। इसके लिए लोगों को निमंत्रण का संदेश है। इसके बाद लिखा है कि हम सब अकेले हैं, हमारा कोई नहीं है। इसके नीचे राकेश यादव ने दिलवाले फिल्म का सुपरहित डायलाग भी लिखा है। कार्ड मं लिखा मुझे तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, मेरी कस्ती वहां डूबी जहां पानी कम था।
तीनों भाईयों ने नहीं की शादी
राकेश यादव व उसके 2 अन्य भाईयों में से किसी ने भी शादी नहीं की। ऐसे में 65 वर्ष की उम्र में राकेश यादव ने सोमवार यानी 30 मार्च 2026 को अपने जीते-जी अपनी तेरहवीं कर डाली। राकेश यादव अपने तीन भाइयों में सबसे बड़े हैं। दो भाईयों की मौत हो चुकी है। हालांकि परिवार में 1 बहन भी है, लेकिन वह शादीशुदा है और इस भंडारे में पहुंची।
बुढापे में साथ देने वाला कोई नहीं
इस आयोजन को लेकर राकेश यादव ने बताया कि उसके बुढ़ापे में साथ देने वाला कोई नहीं है। ऐमें उसके मरने के बाद कौन अंतिम संस्कार करेगा। यहां तक की उसकी तेरहवीं भी कौन करवाएगा। यह सोच कर उसने जीते जी ही यह तेरहवीं का भोज करवा डाला। राकेश यादव ने कहा कि उसने अपनी कमाई से यह भंडारा करवाया है। हालांकि उसे वृद्धावस्था पेंशन भी मिलती है। वह जवानी से ही जो काम करता था, उससे पैसे बचाए हैं।
कन्या पूजन भी किया
राकेश यादव ने भंडारे की शुरूआत कन्या पूजन से की। 150 कन्याओं को भोजन करवाया और इसके बाद उनको बर्तन भी दिए गए। इतना ही नहीं आयोजन में पहुंची करीब 100 महिला रिश्तेदारों को साड़ी भी भेंट की। करीब इतने ही पुरुष रिश्तेदारों को दान में बर्तन भेंट किए गए। राकेश यादव ने यह जिंदा भ्ंडारा बहुत ही बड़े स्तर पर किया। इसमें तेरहवीं की तरह साधारण सब्जी पूड़ी नहीं की। बल्कि सब्जी, पूड़ी के साथ बूंदी के लड्डू भी तैयार करवाए।










