New Income Tax Rule : 1 अप्रैल से सैलरी स्ट्रक्चर में भी होगा बदलाव, जानें क्या पड़ेगा आप पर असर
कंपनी की सुविधाएं और भत्ते भी आएंगे आयकर की श्रेणी में, मैनेजमेंट पर दें ध्यान
New Income Tax Rule : नया वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो रहा है। ऐसे में नया वित्त वर्ष शुरू हो रहा है और हर साल की तरह ही इस बार भी यह तारीख कई प्रकार के बदलाव लेकर आ रही है। नए वित्त वर्ष में जो भी बदलाव हो रहे हैं, उनका असर हर किसी पर पड़ने जा रहा है।
विशेषकर नौकरी पेशा लोगों के। क्योंकि नई आयकर व्यवस्था में अब टैक्स के नियमों में कुछ बदलाव हो रहे हैं। इसके तहत कई भत्ते और सुविधाओं का प्रयोग करने पर भी टैक्स देना होगा। क्योंकि यह राशि भी आपकी कमाई में जुड़ रही है। इससे आयकर भरने वालों की टैक्स राशि बढ़ सकती है।
नए वित्त वर्ष 2026-27 में होने वाले बदलावों में कर्मचारियों की CTC पर भी असर पड़ेगा। हालांकि इन कर्मचारियों को वेतन पहले की तरह ही मिलेगी। इसका असर कैश इन हैंड पर पड़ सकता है। क्योंकि 1 अप्रैल 2026 से नए इनकम टैक्स नियमों को लागू किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले कंपनियाें द्वारा कर्मचारियों के वेतन में कुछ लचीलापन रखा जाता था। साथ ही कई प्रकार की सुविधाएं दी जाती थी और भत्तों के नाम पर भी कुछ राशि दी जाती थी। पहले यह राशि कर्मचारी की सीधी कमाई में नहीं जोड़ी जाती थी। इससे इस राशि पर टैक्स नहीं देना होता था। लेकिन अब यह राशि भी आयक की श्रेणी में आ जाएगी।
अधिक टैक्स राशि का करना होगा भुगतान
विशेषज्ञों की मानें तो नई व्यवस्था से आयकर की राशि अधिक होगी। यानी जिस कर्मचारी को कंपनी द्वारा रहने को घर दिया गया है, या फिर वह कंपनी के कार्यों से होटल में ठहरता है और इसका भुगतान कंपनी द्वारा किया जाता है, यह राशि भी कर्मचारी की कमाई में जोड़ दिया जाएगा।
इतना ही नहीं यदि कंपनी गाड़ी भी कोई कर्मचारी प्रयोग कर रहा है, उसकी राशि भी कमाई में जुड़ेगी। इसके अलावा ड्राइवर को मिलने वाले पैसे भी उस अधिकारी या कर्मचारी के खाते में जाएंगे। इससे टैक्स की अधिक राशि जमा करवानी होगी। इसके अलावा अन्य कई इस प्रकार के खर्च हैं, जो आपकी टैक्स राशि को बढ़ा रही हैं।
सैलरी स्ट्रक्चर पर भी पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कई कंपनियों को अपने ऐसे कर्मचारियों का सैलरी स्ट्रक्चर फिर से बदलना पड़ सकता है। क्योंकि नए हिसाब से सैलरी स्ट्रक्चर तैयार करने से कर्मचारी के अन्य भत्तों का समायोजन इस प्रकार से होगा कि उसके टैक्स पर असर नहीं पड़े।
ऐसे में यह सुविधाएं बंद भी की जा सकती हैं और इससे मिलने वाली सुविधाओं की राशि सीधे वेतन में जोड़ दी जाएंगी। इससे सीटीसी पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन जिस राशि पर टैक्स का भुगतान होता है, वह बढ़ जाएगी। साथ ही पीएफ और ग्रेच्युटी की राशि पर भी असर पड़ने जा रहा है।
क्योंकि नए लेबर कोड में यह भी साफ हो गया है कि सीटीसी में से बेसिक सैलरी 50 प्रतिशत का नियम भी बन गया है। इससे कंपनी की ओर से मिलने वाली राशि जो कर्मचारियों के हाथ में आती है, उसमें कुछ कमी आ सकती है।
बेहतर बचत के लिए क्या करें
अब साफ है कि आयकर सीमा में आने वाले कर्मचारियों को कुछ बदलाव करने होंगे। ऐसे में जिन कर्मचारियों का वेतन इसके साथ HRA, 80C निवेश और दूसरी छूट अधिक हैं, वे पुरानी व्यवस्था में रहेंगे तो लाभ होगा। वहीं सैलरी स्ट्रक्चर को बदल कर भत्ते कम हो रहे हैं तो बदल कर तैयार की गई नई व्यवस्था लाभदायक हो सकती है। ऐसे में इसके लिए अपने सीए का टैक्स विशेषज्ञ से जानकारी ली जा सकती है।
जान लें अपनी सीटीसी का ब्योरा
अब यह तय हो गया है कि सीटीसी में बदलाव हो रहा है। ऐसे में अपनी सीटीसी का ब्योरा जान लें। इसमें यह पता चल जाएगा कि ऐसी कौनसी सुविधाएं हैं, जिन पर आपको टैक्स देना होगा। नई और पुरानी व्यवस्थाओं के अनुसार इनमें अंतर साफ हो जाएगा। कंपनी का एचआर भी इसकी जानकारी दे सकता है।










