World pneumonia Day : सर्दी के मौसम में गंभीर हो सकता है निमोनिया
वायरल फ्लू समझ कर निमोनिया को न लें हल्के में
World pneumonia Day : सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में खांसी जुकाम आम बात होती है। इसके चलते बुखार भी हो जाता है। वहीं इस मौसम में निमोनिया का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में यदि निमोनिया को साधारण वायरल फ्लू समझ लिया तो यह खतरनाक हो सकता है। इसलिए वायरल फ्लू व निमोनिया के बीच का अंतर समझ लें।
निमोनिया होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं और सही इलाज लें। ऐसा नहीं होने पर गंभीर परिणाम आ सकते हैं।
वायरल फ्लू और निमोनिया pneumonia के लक्षण काफी मिलते जुलते हैं। इसके चलते व्यक्ति pneumonia को बुखार समझ कर लापरवाही कर देता है। यही लापरवाही गंभीर रूप ले लेती है और बीमार व्यक्ति की जान पर भी बन आती है। निमोनिया में फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं। यह संक्रमण बहुत ही गंभीर होता है और मरीज को सांस लेने में दिक्कत होती है। वहीं कई बार इसका संक्रमण बहुत अधिक होता है। यहां तक की बीमार व्यक्ति को संभलने तक का मौका नहीं मिलता। इसलिए यह जरूरी है कि शुरूआत में ही निमोनिया की पहचान हो जाएगा और इसका सही इलाज हो सके।

World Pneumonia Day 2025
निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाव व जागरूकता के लिए 12 नवंबर को हर साल विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। इसके प्रति जागरूक हो कर ही इससे बचा जा सकता है। दरअसल बदलते मौसम में शरीर में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। विशेषकर इस मौसम में प्रदूषण का स्तर भी काफी चल रहा है। ऐसे में खांसी-जुकाम काफी लोगों को घेर लेते हैं। इसके साथ्ज्ञ वायरल फ्लू भी हो जाता है। यह लक्षण निमोनिया के भी हैं। निमाेनिया का संक्रमण फेफड़ों को बहुत अधिक प्रभावित कर देता है। यहां तक कि यदि मरीज को समय पर सही प्रकार से इलाज नहीं दिया जाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। इसलिए निमोनिया व साधारण वायरल फ्लू में अंतर हर किसी को पता होना चाहिए। इस वर्ष World pneumonia Day का थीम Child survival रखा गया है। निमाेनिया को पहचानने के लिए इसके लक्षणों की जानकारी होना जरूरी है। pneumonia में लगातार तेज बुखार होता है। इसके साथ ही कंपकंपी और ठंड लगती है। ऐसा होने पर खांसी भी होती है और इसके साथ फेफड़ों से हरे या पीले रंग का बलगम भी निकलता है। इससे सीने में दर्द होता है या फिर भारीपन महसूस होता है। सांस लेने में दिक्कत होती है और सांस फूलने लगता है। हालांकि वायरल फ्लू 3 से 4 दिन में ठीक होने लगता है, लेकिन निमोनिया में स्थिति गंभीर होने लगती है। इसलिए यदि इन लक्षणों के साथ बुखार ठीक नहीं हो तो छाती का एक्स रे जरूर करवाएं। कोई भी दवा या इलाज चिकित्सक के अनुसार ही लें। ध्यान रखें की किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं करें। यह जान पर भी भारी पड़ सकती है।
World pneumonia Day : क्या है निमोनिया
यह बीमारी शरीर पर गंभीर प्रभाव डालती है। यह एक प्रकार को संक्रमण होता है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है। यह संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया या फंगस के कारण भी होने की आशंका रहती है। बहराल pneumonia होने के कारण फेफड़ों पर सूजन चढ़ जाती है। फेफड़ों में बलगम जम जाता है। इसके कारण ही सांस लेने में दिक्कत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार निमोनिया का असर बच्चों पर अधिक रहता है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में pneumonia सबसे अधिक मौत का कारण बनता है। विश्व भर में निमोनिया से हर साल करीब 7.25 लाख से अधिक बच्चों की जान चली जाती है। इनमें से करीब दो लाख बच्चे नवजात होते हैं। नवजात बच्चों में रोग रोधक शक्ति पूरी तरह से विकसित नहीं होती और ऐसे में वे जल्दी निमोनिया का शिकार बन जाते हैं।










