First Hydrogen train : हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने में हर दिन नई परेशानी, फिर टला ट्रायल
बाहर से मंगवाई 4 टैंकर हाइड्रोजन, तकनीकी खामियों को दूर करने में लगे इंजीनियर
First Hydrogen train : देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन में हर दिन नई परेशानियां आ रही है। पिछले करीब 2 महीने से ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल रही। अब फिर से इंजीनियर की टीम हइड्रोजन ट्रेन में आई नई खामियों को दूर करने में लगी है। हालांकि जींद के रेलवे जंक्शन पर बनाए गए हाइड्रोजन प्लांट से भी उत्पादन में दिक्कत आ रही हैं। इसके चलते बारह से 4 टैंकर हाइड्रोजन मंगवाए गए हैं।
दरअसल देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का संचालन हरियाणा के जींद जंक्शन से सोनीपत जंक्शन तक होना है। इसके लिए पिछले करीब 3 महीने से तैयार की जा रही हैं, लेकिन अभी तक ट्रेन का संचालन तो दूर की बात है, अभी तक ट्रायल ही सही प्रकार से नहीं हो पा रहा है। करीब 2 सप्ताह के ब्रेक के बाद मंगलवार को फिर से ट्रायल शुरू किया, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।
7 अप्रैल से स्टेशन पर खड़ी है ट्रेन
दरअसल हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन देश में नई तकनीक है। ट्रेन जनवरी महीने में जींद आ गई थी, लेकिन तभी से इसकी तकनीकी जांच और ट्रायल के विभिन्न चरण चल रहे हैं। हालांकि ट्रेन हाइड्रोजन गैस से पटरियों पर दौड़ चुकी है, लेकिन अभी इसके संचालन के लिए कोई भी समय निर्धारित नहीं किया गया है।रेलवे की सुरक्षा टीम द्वारा सभी जांच करने के बाद रेलवे के सुरक्षा आयुक्त (सीआरएस) द्वारा स्वीकृति दी जानी है। इसकी तैयारियों में ही यह पूरी प्रक्रिया चल रही है।
कब होगा सीआरएस का दौरा
दरअसल रेलवे में किसी भी नई ट्रेन को चलाने के लिए सबसे प्रमुख चरण होता है सुरक्षा आयुक्त की जांच। इसके लिए सीआरएस द्वारा समय निर्धारित किया जाता है। यह समय तब निर्धारित होग, जब तकनीकी टीम यह सुनिश्चित कर लेगी कि अब ट्रेन चलाई जा सकती है और सीआरएस का दौरा करवाया जा सकता है। (Hydrogen train) यानी अभी इस प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। उम्मीद जताई जा रही है कि अब दोबारा शुरू की गई ट्रायल के दौरान सीआरएस के निरिक्षण का समय मिल सकता है।
प्लांट में भी खराबी नहीं बन रही हाइड्रोजन गैस
वहीं दूसरी ओर जींद-सोनीपत के बीच चलने वाली हाइड्रोजन ट्रेन को ईंधन उपलब्ध करवाने के लिए जींद जंक्शन पर लगाया गया हाइड्रोजन प्लांट भी उत्पादन नहीं कर पा रहा है। रेलवे की इस परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि हाइड्रोजन प्लांट का इलेक्ट्रोफायर खराब हो गया है। इसके कारण बाहर से 4 टैंकर हाइड्रोजन मंगवाई गई है। अब इसी हाइड्रोजन से ट्रेन का ट्रायल हाइड्रोजन प्लांट की खराबी को दूर कर लिया गया है।
दुनिया की सबसे लंबी ट्रेन
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह शुरूआती दिक्कतें हैं, इनको ठीक किया जा रहा है। यह ट्रेन जल्द ही चलने लगेगी। यह ट्रेन दुनिया सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है, जो ब्रॉड गेज पर चलेगी। (Hydrogen train news) ट्रने में 10 कोच होंगे और इसकी क्षमता 2400 किलोवाट है। ट्रेन के दोनों ओर ड्राइविंग पावर कार की व्यवस्था है। दोनों में 1,200-1,200 किलोवाट क्षमता है। चूंकि यह ट्रेन हाइड्रोजन गैस से चलेगी, ऐसे में इससे कार्बन का उत्सर्जन शून्य रहेगा।
हर कोच में 100 यात्रियों के बैठने की सुविधा
ट्रेन को पूरी तरह से भारतीय जरूरतों के अनुसार ही विकसित किया गया है। क्योंकि इसके 1 कोच में 100 यात्रियों की क्षमता है। ट्रेन में यात्रियों के लिए 8 कोच की सुविधा रहेगी। हालांकि विश्व के कई देशों में हाइड्रोजन ट्रेन चल रही हैं, लेकिन उनकी क्षमता कम है। जर्मनी में जब हाइड्रोजन ट्रेन की शुरूआत की गई, उसमें केवल दो ही कोच लगाए गए। यह ट्रेन चलने के बाद यात्रा का समय घटेगा, क्योंकि इसको 105 किमी प्रति घंटा की गति से चलाया जा सकता है।










