Bahadurgarh Mahesh Chand : 55 की उम्र में जिद्द की गर्मी से पिंघलाई हिमालय की बर्फ, बहादुरगढ़ के महेश चंद ने रचा इतिहास
3 चरणों में हुई प्रतियोगिता में दिखाई हौसलों की उड़ान,16 अप्रैल को शुरू हुई थी खास दौड़
Bahadurgarh Mahesh Chand : 55 की उम्र में जब लोग रिटायरमेंट की योजना बना रहे होते हैं, कुछ लोग अपने हौसले और जुनून से इतिहास रच देते हैं। यही कर दिखाया है हरियाणा के बहादुरगढ़ निवासी 55 वर्षीय महेश चंद ने। उन्होंने हिमलाय की दुर्गम चोटियों में 113 किलोमीटर की ट्रेल रन को पूरा कर इतिहास रच दिया है।
55 वर्षीय महेश चंद बहादुरगढ़ रनर ग्रुप यानी बीआरजी के सदस्य हैं। अब उन्होंने किसी समतल मैदान में नहीं हिमालय की दुर्गम चोटियों में अपने हौसले का दम दिखलाया है। उन्होंने 113 किलोमीटर की इस रन को पूरा किया और दिखा दिया कि बेशक उम्र 55 की है, लेकिन उनके हौसले युवाओं से कम नहीं हैं। यह उपलब्धि महेश चंद ने भारतीय सेना द्वारा आयोजित सूर्य देव भूमि चैलेंज 2.0 में प्राप्त की है।
सेना प्रमुख ने की थी शुरूआत
दरअसल इस इवेंट का शुभारंभ 16 अप्रैल को भारतीय सेना के प्रमुख जनरल अनिल चौहान ने बद्रीनाथ धाम से किया था। सूर्य देव भूमि चैलेंज 2.0 के इस इवेंट में बीआरजी के रनर महेश चंद ने 55 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में तीन दिन में निर्धारित 113 किलोमीटर की ट्रेन पूरी की। यह रन किसी आम समतल रास्ते पर नहीं हई। इसका आयोजन बहुत ही दुर्गम चौटियों में किया गया। इसमें बहादुरगढ रनर ग्रुप से 55 वर्षीय महेश चंद ने सफलता प्राप्त की।
तीन चरणों में किया गया आयोजन
महेश चंद के अनुसार इय इवेंट का आयोजन 3 चरणों में किया गया। ट्रेल रन में प्रथम दिन 36 किलोमीटर की यात्रा पूरी हुई। इसमें 17 अप्रैल को मंडल से कालगोट तक रन हुई। अगले दिन यानी 18 अप्रैल को कालगोट से मंडल 39 किलोमीटर की रन हुई और तीसरे दिन सानी 19 अप्रैल को मंडल से ऊखीमठ तक 38 किलोमीटर की यात्रा रही।
32 घंटे 38 मिनट में पूरी की रन
इस इवेंट के दौरान बहुत ही दुर्गम मार्गों को चुना गया। कहने को तो यह महज 113 किलोमीटर था, लेकिन इसका रास्ता ऐसा था, जिस रास्ते पर प्राचीन समय में संयासी चलते थे। यह रास्ता पहले बद्रीनाथ से केदारनाथ की पदयात्रा के रूप में प्रयोग होता था। ऐसे में यहां की चढ़ाई बेहद कठिन है। क्योंकि रास्ते पूरी तरह से बर्फ से ढके रहते हैं और यहां बेहद संकरी पगडंडियों से पहाड़ी रास्ता है। इस रास्ते पर महेश चंद ने 32 घंटे 38 मिनट 10 सेकंड में यह रन पूरी कर ली। यह टाइमिंग निर्धारित समय से काफी कम रही।
मुख्यमंत्री धामी ने किया सम्मानित
इस रन का समापन हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय में 20 अप्रैल को किया गया। इसमें सभी विेजेताओं के साथ महेश चंद को भी सम्मानित किया गया। इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में शरीक हुए और उन्होंने विजेताओं का हौसला बढ़ाया।
बेहद अच्छे प्रबंधन
महेश चंद ने बताया कि रन के लिए भारतीय सेना द्वारा काफी अच्छे प्रबंध किए गए थे। क्योंकि धावकों के लिए दुर्गम रास्तों पर भी पानी, सुरक्षा के साथ रेस्क्यू की व्यवस्था बहुत ही बेहतरीन रही। ऐसे में धावकों को कोई परेशानी नहीं आई। हालांकि यह रन दुर्गम और चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन इसको पूरा करने के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए।










