Ayatollah Ali Khamenei : 11 साल की उम्र में मौलवी बन गए थे आयतुल्ला अली खामेनेई, करोड़ों की संपत्ति के मालिक
ईरान में साढ़े 3 दशक से भी अधिक समय तक सुप्रीम लीड रहे
Ayatollah Ali Khamenei : ईरान पर हुए इजराइयली और अमेरिकी हमलों में वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत हो चुकी है। ईजराइली टीवी ने भी इसकी पुष्टि कर दी है। आयतुल्ला अली खामेनेई का अंत जिस प्रकार संघर्ष के बीच हुआ है, उनका उदय भी संघर्षों की ही कहानी बताता है। महज 11 साल की उम्र में मौलवी बनने वाले खमेनेई साढ़े 3 दशक तक ईरान के सुप्रीम लीड रहे। वे हमेशा ही इजराइल को अपने निशाने पर रखते थे। ऐसे में हमेशा ही उनकी इजराइल से तल्खी रही। आखिरकार हमले में उनका अंत हो गया। हालांकि उनकी संपत्ति करोड़ों की बताई जाती है।
ईरान के सुप्रीम लीडर रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई का जन्म 1939 में ईरान के शहर मशहद में हुआ। इस शहर को वहां का सबसे अधिक पवित्र शहर माना जाता है। उनके पिता मौलवी थे और उनके पदचिन्हों पर चलते हुए खामेनेई भी 11 साल की उम्र में मौलवी बन गए। उनकी धार्मिक शिक्षा प्रसिद्ध धार्मिक केंद्र कुम में हुई। इस समय ईरान में शाह मोहम्मद रजा पहलवी का शासन था। पहलवी वंश के राजा के राजतंत्र में चल रही सत्ता को बदलने के लिए भी प्रयास चल रहे थे। हालांकि वहां के राजा शाह पंथनिरपेक्ष थे, लेकिन बाद में ईरान इस्लामिक गणराज्य बना।
इसराइल को ट्यूमर बताते थे खामेनेई
शुरू से ही ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई इसराइल को लेकर अपनी सोच साफ रखते थे। बीबीसी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि खामेनेई खुलकर इसराइल के अस्तित्व को मिटाने की बात करते थे। खामेनेई इसराइल को पश्चिम एशियाई क्षेत्र का एक ऐसा कैंसरग्रस्त ट्यूमर बताते थे। वे कहते थे कि इसको उखाड़ फेंकना जरूरी है। ऐसे में वे इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के निशाने पर रहे।
200 अरब डालर की संपत्ति
आयतुल्लाह अली खामेनेई की संपत्ति हालांकि कभी सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन अलग-अलीग रिपोर्ट में उनकी संपत्ति अलग बताई गई है। खामेनेई ईरानी राजनीति में 1979 की क्रांति से ही सक्रिय हो गए थे। इसके बाद वे 1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता बने। माना जाता है कि उनकी संपत्ति 95 अरब डालर से 200 अरब डालर तक आंकी गई है। इसको सेताद नामक संस्था के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। भारतीय रुपये में इसकी तुलना की जाए तो 18215 करोड़ बनती है। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि करना संभव नहीं है।
1981 में बने राष्ट्रपति
बहुत सारे लोगों को ईरानी की राजनीतिक व्यवस्था की जानकारी नहीं है। वहां राष्ट्रपति भी होता है और सबसे ऊपर होता है सुप्रीम लीडर। खामेनेई 1979 में हुई क्रांति के बाद ईरान के राष्ट्रपति बने। शाह के शासन के बाद ईराम ने सरकार का गठन हुआ तो ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में खामेनेई तेजी से उभरे। वे 1981 में ईरान के राष्ट्रपति बने। इसके बाद 1989 में जब वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह रुहोल्लाह खोमैनी का निधन हुआ तो खामेनेई सर्वोच्च नेता नियुक्त हुए। तभी से वे ईरान की सत्ता चला रहे थे। फिलहाल मसूद पेजेश्कियन ईरान के राष्ट्रपति हैं। उनका चुनाव 2024 में हुआ था।
वैश्विक राजनीति में रहा प्रभाव
आयतुल्लाह अली खामेनेई का प्रभाव वैश्विक राजनीति में भी खासा रहा है। वे खुल कर अमेरिकी नीतियों का विरोध करते रहे। वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में रूप में उन्होंने अपना नजरिया साफ रखा। उन्होंने लंबे समय तक ईरान की सत्ता को अपने नियंत्रण में रखा। हालांकि सुप्रीम लीडर के पद पर उन्होंने अपनी नियुक्ति संविधान में बदलाव करवा कर की। वे अपने आसपास साधारण लोगों को ही रखते थे। इससे एक तो जनता में उनका विश्वास बना रहा और दूसरा विद्रोह की आशंका नहीं रही। बहराल अब ईरान का नया दौर शुरू हो रहा है।










