Strict action against defaulting consumers : हरियाणा में बिजली बिल वसूली का सबसे बड़ा अभियान, 8200 करोड़ रुपये की होगी वसूली

बकाया बिजली बिल नहीं भरने वालों की संपत्ति होगी कुर्क

Strict action against defaulting consumers : लगातार बकाया बिजली बिल के कारण घाटा झेल रहे हरियाणा बिजली निगम ने अब वसूली के लिए कड़ा रूख अपना लिया है। इसके तहत प्रदेश का सबसे बड़ा वसूली अभियान शुरू किया जाएगा। इसके तहत बिजली निगम द्वारा 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा। इस समय सीमा में बिल का भुगतान नहीं करने पर संपत्तियों को कुर्क किया जाएगा। इसके लिए सरकार ने खास याेजना तैयार की है।

लगातार बिजली बिल का भुगतान नहीं करने वालों पर अब सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक शुरू होने वाली है। इससे सरकार बकाया 8200 करोड़ रुपये वसूलने की तैयारी कर रही है। हरियाणा में बिजली आपूर्ति का जिम्मा सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियां उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) द्वारा किया जाता है। इन दोनों कंपनियों का उपभोक्ताओं पर करीब 8200 करोड़ रुपये बकाया है।

बिजली मंत्री ने दिए कार्रवाई के निर्देश

इसको लेकर हरियाणा के बिजली मंत्री मंत्री अनिल विज द्वारा अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। इससे ऐसे उपभोक्ताओं पर शिकंजा कसा जाएगा, जिनके बिजली बिल लंबे समय से भरे नहीं गए हैं। बकाया राशि 8200 करोड़ रुपये होने के कारण अब सरकार ने इस राशि को वसूलने के लिए हरियाणा लैंड रेवेन्यू एक्ट का सहारा लेने की योजना बनाई है।

इसके तहत सरकार ने सख्त एक्शन प्लान तैयार करते हुए कड़ी कार्रवाई का फैसला लिया है। अभी तक बकाया बिल वाले उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन काट दिया जाता था, लेकिन अब सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि डिफाल्टर उपभोक्ताओं उपभोक्ताओं की संपत्तियों की पहचान की जा रही है।

ऐसे डिफाल्टर उपभोक्ताओं को 15 दिनों का अंतिम देकर चेतावनी दी जा रही है। इस तय समय में जो उपभोक्ता बकाया बिजली बिल का भुगतान नहीं करेंगे लैंड रिकवरी एक्ट के तहत उनकी जमीन या अन्य संपत्ति को कुर्क (Seize) करने की कार्रवाई की जाएगी।

कड़ा किया जा रहा शिकंजा

इतना ही नहीं बिजली बकाया राशि वसूली के लिए सरकार ने और भी कड़ा शिकंजा कर दिया है। ऐसे डिफाल्टर उपभोक्ताओं को मिलने वाली सरकारी सेवाओं पर भी रोक लगेगी। क्योंकि डिफाल्टर उपभोक्ताओं का डेटा परिवार पहचान पत्र (PPP) में अपडेट हो जाएगा। इससे जो भी लाभ वह उपभोक्ता सरकार से लेता है, उन पर भी तुरंत प्रभाव से रोक लगाई जा सकेगी।

हरियाणा में लंबा और उलझा हुआ है बिजली बकाया मुद्दा

हरियाणा में बिजली बिल बकाया का मुद्दा काफी लंबा और उलझा हुआ है। इसकी शुरूआत 20 के दशक के अंतिम वर्षों में हुई थी। तब क्षेत्र दल इंडियन नेशनल लोकदल द्वारा आह्वान किया गया था कि उनकी सरकार बनने पर बकाया बिजली बिल माफ किया जाएगा।

तब इनेलो की सरकार में ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री बने, लेकिन उन्होंने वादा पूरा नहीं किया। इस पर किसानों ने बड़ा आंदोलन किया। इसमें 10 से अधिक किसानों की मौत हुई थी। इसको इतिहास में कंडेला आंदोलन या कंडेला कांड के नाम से जाना जाता है। हालांकि इसके बाद 2004 में कांग्रेस की सरकार बनने पर 1600 करोड़ का बकाया बिजली बिल माफ कर दिया गया था। यह राशि फिर से बढ़ कर 8200 करोड़ पहुंच गई है।

सरकारी विभागों पर भी करोड़ों बकाया

सिर्फ निजी उपभोक्ता ही नहीं सरकारी विभागों पर भी करोड़ों रुपये की देनदारी बाकी है। प्रदेश में किसी न किसी सरकारी कार्यालय का कनेक्शन कटने का समाचार आता रहता है। इसके अलावा बिजली निगम और स्थानीय निकाय के बीच भी आपसी लेनदेन का पेंच फंसा रहता है।

हालांकि इस योजना में सरकारी कार्यालयों को शामिल नहीं किया गया है। हालांकि प्रदेश में लाइन लोस भी 15 % से अधिक चल रहा है। यह बिजली निगम का घाटा बढ़ा रहा है। अब इस घाटे को पाटने के लिए सरकार ने सख्त रूख अपनाया है। इसमें कितनी सफलता मिलती है, यह समय ही बताएगा।

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