Ram Mandir Movement : अयोध्या कारसेवकों की भूमिका समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण अहम
हिसार के उकलाना में अयोध्या कारसेवकों को किया सम्मानित
Ram Mandir Movement : हिसार जिला के उकलाना में अयोध्या कारसेवकों के सम्मान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान अशोक सिंघल शोध संस्थान और गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में हुए कार्यक्रम में कई कारसेवकों ने हिस्सा लिया।
शुक्रवार को हुए अयोध्या कारसेवकों के सम्मान एवं अभिनंदन समारोह राम मंदिर जुड़े कारसेवकों ने अपने अनुभव सांझा किए। इस दौरान वक्ताओं ने अयोध्या आंदोलन एवं राम मंदिर निर्माण को लेकर कारसेवकों द्वारा दिए गए अभूतपूर्व योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि कारसेवकों ने समाज, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में विशेष भूमिका निभाई है।
भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना से जुड़ा है आंदोलन
कार्यक्रम में हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के पूर्व चेयरमैन एवं वरिष्ठ भाजपा नेता श्रीनिवास गोयल विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि अयोध्या आंदोलन भारतीय सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रभावना से जुड़ा रहा है। भारतीय संस्कृति में यह महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अध्याय दर्ज है। क्योंकि जो कारसेवक आंदोलन में शामिल रहे, उन्होंने अपने समर्पण, त्याग और संघर्ष से समाज को नई दिशा दी। ऐसे में राम मंदिरा निर्माण में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। आने वाली पीढ़ियाें को भी यह बलिदान प्रेरणा देगा।
सभी कारसेवकों का सम्मान
गोयल ने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ उन कारसेवकों का सम्मान नहीं है, जो इसमें शामिल हुए हैं। इसका बहुत ही विस्तृत संदेश है।
क्योंकि यह उन सभी लोगों का सम्मान है जो राम मंदिर निर्माण में शामिल रहे हैं। इस दौरान कारसेवकों को स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र और शॉल भेंट किए।
राम मंदिरा में क्या है कारसेवकों की भूमिका
गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर लंबा संघर्ष चला है। 6 दिसंबर 1992 को यहां विवादित ढांचा गिराया गया। इसके लिए यहां पर लाखों कारसेवक देश भर से जुटे थे। यहां पर ढांचा गिरने के बाद रातों रात ही श्रीराम जन्मभूमि पर अस्थाई मंदिर का निर्माण कर दिया गया। ऐसे में कारसेवकों के संघर्ष हमेशा याद किए जाते रहे हैं।
लंबे संघर्ष के बाद मिली सफलता
हालांकि विवादित ढांचे को 1992 में गिराया गया, लेकिन इससे काफी समय पहले से इसकी प्रक्रिया चल रही थी। ऐसे में यह मामला अदालत में चलता रहा और आखिरकार राम मंदिर की मांग कर रहे पक्ष की जीत हुई। इसके बाद
5 अगस्त 2020 को अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य भूमि पूजन के शुरू किया गया। मंदिर में गर्भगृह का किए जाने के बाद 22 जनवरी 2024 को भव्य आयोजन के साथ रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
देश भर में होते हैं आयोजन
इस प्रकार के आयोजन देश भर में कारसेवकों के लिए किए जाते रहते हैं। क्योंकि राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के लोगों की बड़ी भूमिका रही है। कई लोगों को जेल यात्रा भी करनी पड़ी। उनको समय-सयम पर सम्मानित किया जाता है।










