Dr HC Verma : भारत के ऐसे शिक्षक, जिन्होंने दी AI को चुनौती, हर विषय में फेल होकर भी बन गए IIT में प्रोफेसर

मां ने दिया ठेकुआ का ऑफर तो बदली गई जिंदगी

Dr HC Verma : आज के समय में हर ओर AI यानी कृत्रिम बुद्धिमता की चर्चा हो रही है, लेकिन भारत के एक ऐसे शिक्षक हैं, जिन्होंने कृत्रिम बुद्धिमता काे चुनौती दे डाली है। इसके लिए वे काफी चर्चित हैं। क्योंकि उनका जीवन काफी मुश्किल भरा रहा है। हर विषय में फेल भी हुए, लेकिन फिर उनके जीवन में कुछ ऐसा हुआ कि सब कुछ बदल गया। आज देश, दुनिया उनको वैज्ञानिक और IIT के प्रोफेसर के रूप में जानती है।

जी हां हम बात कर रहे हैं, पद्मश्री डा. एचसी वर्मा की। उन्होंने AI को देते हुए मानवीय बुद्धिमता को सबसे ऊपर बताया है। उनकी पुस्तक कॉन्सेप्ट्स ऑफ फिजिक्स भी काफी चर्चित रही है। डा. वर्मा ने बिहार के दरभंगा से निकलकर IIT कानपुर में प्रोफेसर बनने तक बहुत ही संघर्ष किया।

9 साल की उम्र में शुरू की पढ़ाई

प्रोफेसर एचसी वर्मा का जन्म 1952 में बिहार के दरभंगा में हुआ। बेहद साधारण परिस्थितियों में बचपन गुजरा। क्योंकि उनके पास शिक्षा के लिए खास संसाधन नहीं थे। डा. एचएस वर्मा आज के बच्चों की तरह 3 या 4 साल की उम्र में स्कूल नहीं जाने लगे। उन्होंने पढ़ाई की 9 साल की उम्र के बाद। उनका दाखिला सिधे छठी कक्षा में करवाया गया और उन्हें परीक्षाओं के बारे में भी कुछ नहीं पता था। इसके परिणाम स्वरूप प्रोफेसर एचसी वर्मा हर विषय में फेल हो गए।

वहीं उनके पिता की प्रेरणा ने उनको निराश नहीं होने दिया। स्वयं डा. वर्मा कहते हैं कि बेशक वे कम अंक प्राप्त करते थे, लेकिन हमेशा सीखने में बहुत रूचि रहती थी। इसी के परिणाम स्वरूप ज्ञान गहरा होता गया। आखिरकार उन्होंने पटना साइंस कॉलेज से शिक्षा लेने के बाद कानपूर आईआईटी से पीएचडी की।

1 घंटे पढ़ाई के मिले 2 केठुआ

दरअसल प्रोफेसर डा. एचसी वर्मा को पढ़ाई में रूचि और अधिक तब बढ़ी, जब मां ने केठुआ का ऑफर दिया। हालांकि मां स्वयं शिक्षित नहीं थी, लेकिन उन्होंने पढ़ाई के महत्व को समझा। ऐसे में उनकी मां ने घर में एक कांच के बर्तन में बिहार का मशहूर ठेकुआ भर दिया। साथ ही ऑफर दिया कि यदि वे 1 घंटे तक किताब लेकर बैठेंगे तो दो ठेकुआ दिए जाएंगे। इसके लालच में पढ़ाई शुरू की और फिर पढ़ाई में ऐसी रूचि हुई कि पहली बार 9वीं कक्षा में सभी विषय पास कर दिए।

गणित की राह से फिजिक्स का टर्न

हालांकि डॉ. वर्मा स्वयं कहते हैं कि वे गणित के प्रोफेसर बनना चाहते थे। इस दौरान एक शिक्षक ने उनको समझाया कि फिजिक्स डबल आनंद देगा। यह सलाह मान कर वे फिजिक्स की ओर मुड़ गए। आज उनकी पहचान फिजिक्स के ऐसे शिक्षक के रूप में है, जिनसे हर छात्र प्रेरित हो रहा है।

AI को लेकर क्या कहा

प्रोफेसर एचसी वर्मा ने आज के दौर में छात्रों को AI को लेकर बहुत ही गहरी बात कही है। जबकि डा. वर्मा का कहना है कि AI के कारण बच्चों की सोचने की क्षमता में कमी आ रही है। हालांकि एआई मानव बुद्धिमता को हरा नहीं सकता। इंसान अच्छे काम जानता है, इसलिए जीतेंगे।

सादगी का नहीं कोई तोड़

प्रोफेसर एसची वर्मा की सादगी का भी कोई तोड़ नहीं है। जिस पद्मश्री के लिए लोग रात-दिन प्रयास करते हैं, वह पुरस्कार मिलने के बाद भी उनकी नेम प्लेट पर यह दर्ज नहीं है। हालांकि वे बहुत ही प्रतिष्ठित हैं, लेकिन यह उनकी सादगी को दिखाता है। वे कहते हैं कि परीक्षा में अंक लेना और सीखना दोनों ही अलग अलग हैं। व्यक्ति को अपनी क्षमता ओं पर भरोसा रखना चाहिए।

भौतिकी जैसे गूढ़ विषय को भी बनाया जन भाषा

यूं तो प्रोफेसर एचसी वर्मा काफी चर्चित हैं, लेकिन उन्होंने भौतिकी जैसे गूढ़ विषय को भी आम भाषा दी है। वे IIT कानपूर जैसे प्रतिष्ठ संस्थान से सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं और उन्होंने भौतिकी की जटिलता को सरल रूप दिया है। उनकी प्रायोगिक विधि छात्रों को बहुत पंसद आती हैं। क्योंकि उनका मानना है कि विज्ञान सिर्फ प्रयोगशालाओं में नहीं है। अपने आसपास भी काफी कुछ है। उनके विज्ञान और इंजीनियरिंग में योगदान के लिए ही उन्हें 2021 में पद्मश्री सम्मान मिला है।

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