Jind news : डॉ. प्रेरणा कौशिक ने बनाई च्युइंगम, यात्रा के दौरान नहीं आएगी उल्टी, चक्कर
हरियाणा डायरी, जींद। जींद के सफीदों क्षेत्र (Jind news) की बेटी डॉ. प्रेरणा कौशिक ने पेटेंटेड मेडिकेटेड च्युइंगम बना कर इतिहास रच दिया है। इस च्युंइगम के चबाने से यात्रा या सफर के दौरान उल्टी, चक्कर नहीं आएंगे।
एमडीयू रोहतक के फार्मास्युटिकल साइंसेज विभाग की पूर्व शोधार्थी सफीदों निवासी डा. प्रेरणा कौशिक ने अपने शोध सहयोगियों विभागाध्यक्ष प्रो. दीपक कौशिक और एसोसिएट प्रोफेसर डा. विनीत मित्तल के साथ मिलकर मोशन सिकनेस से बचाव के लिए एक विशेष मेडिकेटेड च्युइंग गम विकसित की है। इसे भारतीय पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट प्रदान किया गया है।
डॉ. प्रेरणा कौशिक की यह उपलब्धि न केवल सफीदों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है। डा. प्रेरणा ने कहा कि यह टीम वर्क का परिणाम है और विश्वविद्यालय द्वारा मिले सहयोग ने इस शोध को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रेरणा कौशिक ने बताया कि मोशन सिकनेस यानी यात्रा के दौरान होने वाली उल्टी और चक्कर जैसी समस्याएं आम हैं।
Jind news : हजारों लोगों को होती है परेशानी
जो लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं। बस, ट्रेन या कार में सफर करते समय कई लोग इस परेशानी से जूझते हैं, जिससे उनका सफर बेहद असहज हो जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह एक समाधान विकसित किया है। जो न केवल प्रभावी है बल्कि उपयोग में भी बेहद आसान है।
मोशन सिकनेस के उपचार में उपयोग होने वाली प्रमुख दवा प्रोमेथाजीन का स्वाद अत्यंत कड़वा होता है, जिससे कई बार मरीजों को दवा लेने में दिक्कत होती है और उल्टी या मतली की समस्या और बढ़ जाती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्वाद छिपाने की विशेष तकनीक का उपयोग करते हुए मेडिकेटेड च्युइंग गम तैयार की है।
Jind news : ये है च्युइंगम की खासियत
इस च्युइंगम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लेने के लिए पानी की आवश्यकता नहीं होती। यात्री इसे सफर के दौरान कभी भी और कहीं भी आसानी से उपयोग कर सकते हैं। च्युइंग गम चबाने की प्रक्रिया खुद भी मतली और चक्कर को कम करने में सहायक मानी जाती है, जिससे इसका प्रभाव और भी बेहतर हो जाता है।
प्रेरणा कौशिक का मानना है कि भविष्य में यह पेटेंटेड उत्पाद बड़े स्तर पर व्यावसायिक रूप से विकसित किया जा सकता है, जिससे यात्रियों और मरीजों को व्यापक स्तर पर लाभ मिलेगा। यह नवाचार फार्मास्युटिकल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।










