Jind news : जींद में दिव्यांग प्रमाण पत्र के नाम पर 44 हजार की रिश्वत लेते CMO का ड्राइवर रंगे हाथ काबू
हरियाणा डायरी, जींद।
Jind news ACB Raid : हरियाणा के जींद में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग में सिविल सर्जन की गाड़ी पर तैनात ड्राइवर को 44 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि दिव्यांग प्रमाण पत्र को रिन्यू करवाने के नाम पर रिश्वत मांगी गई थी।
जानकारी के अनुसार जींद स्वास्थ्य विभाग में सिविल सर्जन ऑफिस गाड़ी पर तैनात ड्राइवर जगदीश के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम को शिकायत मिली थी कि दिव्यांग प्रमाण पत्र रिन्यू करवाने की एवज में वह रिश्वत मांग रहा है। इस पर सिरसा एसीबी यूनिट के इंस्पेक्टर सुरेश कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया और शिकायतकर्ता फुलियां खुर्द निवासी सोनू को 44 हजार रुपए पाउडर लगा कर दे दिए।
Jind news : हाथ धुलवाए तो रंग हो गया लाल
टीम के निर्देश के बाद जैसे ही सोनू ने रिश्वत के 44 हजार रुपए ड्राइवर को दिए, टीम ने उसे तुरंत दबोच लिया और रिश्वत की राशि बरामद कर ली। आरोपी के हाथ धुलवाए गए तो उसके हाथों का रंग लाल हो गया। इसके बाद टीम उसे जींद स्थित एसीबी कार्यालय में ले गई और पूछताछ कर रही है।
इस मामले में सिविल सर्जन डॉ. सुमन कोहली से बात की गई तो उसने कहा कि जगदीश मेरी निजी गाड़ी का ड्राइवर नहीं है। वह सिविल सर्जन कार्यालय की गाड़ी चलाता है और रिश्वत के केस से उसका कोई लेना देना नहीं है। वह रिश्वत वाले मामले के बारे में कुछ नहीं जानती।
Jind news : बड़ी मछली तक आ सकती है आंच
एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम की कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने और रिन्यू करवाने वाले डिपार्टमेंट की कुंडली एसीबी द्वारा खंगाली जा रही है। बताया जा रहा है कि इस विभाग की शिकायत पहले भी सामने आई थी लेकिन रसूखदारों ने मामले को दबाया हुआ था। अब जांच गहराई से हुई तो परतें खुलेंगी और बड़ी मछली तक भी जांच की आंच पहुंच सकती है।
सूत्रों के अनुसार यहां से दिव्यांग प्रमाण पत्र रिन्यू करवाकर तो कुछ लोग ग्रुप डी व दूसरी नौकरी में भी लग चुके हैं। कई दलाल विभाग के ऑफिस के आसपास मंडराते रहते हैं। पहले दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ये दलाल पैसे ले लेते थे और प्रतिशत बढ़ाने के लिए भी पैसे लिए जाते थे। अब देखना यह होगा कि ड्राइवर जगदीश अकेले ही यह गुनाह कबूल करेंगे या किसी आलाधिकारी का नाम लेंगे।










