Opium Crop : राजस्थान में तोतों को चढ़ी अफीम की खुमारी, किसानों को हो रहा नुकसान
खेत में घुस कर अफीम को चट कर रहे तोते
Opium Crop : राजस्थान में अफीम की खेती करने वाले किसानों के सामने अब नई परेशानी आन खड़ी हुई है। इस बार कारण कोई प्रशासनिक आदेश या माफिया नहीं, तोते हैं। क्योंकि तोते अफीम के खेत में घुस कर खड़ी फसल को ही चट कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि किसानों ने ताेतों को रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किया, लेकिन तोते हैं कि अफीम के ऐसे दीवाने हुए, जो अब मान ही नहीं रहे हैं। तोतों पर अफीम की यह खुमारी किसानों पर भारी पड़ रही है।
गौरतलब है कि सरकार द्वारा अफीम की खेती के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों को नोटिफाइड किया है। यहां कुछ क्षेत्रों में सरकारी लाइसेंस से अफीम की खेती की जाती है। किसानों का कहना है कि यह ताेते अफीम के नशे के आदी हो चुके हैं। इसे कारण लाख प्रयास करने के बाद भी किसान उनको खेत में आने से नहीं रोक पा रहे हैँ। यह समस्या आ रही मेवाड़ क्षेत्र में। क्योंकि यहां उगाई जा रही अफीम की खेती को अब तोते अपना निशाना बना रहे हैं। काफी संख्या में ताते एक साथ आकर अफीम के फल से निकले वाले उस द्रव्य को खाते हैं, जो किसानों को मोटी आमदनी देता है। राजस्थान राज्य के चितौड़गड़, भीलवाड़ा, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, उदयपुर और बारां जिलों में किसान अफीम की खेती करते हैं।
खरीद प्रक्रिया की भी तैयारी
अब फसल तैयार होने वाली है। ऐसे में सरकार द्वारा इसकी खरीद की प्रक्रिया की तैयारी की जा रही है। जोकि 8 अप्रैल से डोडा की खरीद शुरू हो रही है। बिना चीरा लगा अफीम डोडा की बिक्री सबसे पहले 8 अप्रैल से झालावाड़ में होगी। इसके बाद 11 अप्रैल से चित्तौड़गढ़ में खरीद होगी। वहीं राज्य के प्रतापगढ़ प्रथम खंड में 12 अप्रैल से, प्रतापगढ़ द्वितीय खंड में 13 अप्रैल से, भीलवाडा में 16 अप्रैल से शुरू हो रही है।
तोतों पर भी दुष्प्रभाव किसानों को नुकसान
किसानों का कहना है कि इससे किसानों को मोटा नुकसान हो रहा है। इसके अलावा तोतों पर भी इसका दुष्प्रभव पड़ रहा है। क्योकि अब यह ताते अफीम के नशे की लत में घिर चुके हैं। खेत में घुस कर ताेते अफीम के पौधे पर लगे डोडे को क्षतिग्रस्त कर देते हैं। इससे फसल भी खराब होती है। ऐसे में तातों का यह आतंक किसानों पर भारी पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि काफी संख्या मे ंताते एक साथ खते में घुसते हैं। इससे बड़ी संख्या में पौधे खराब हो रहे हैं। क्योंकि ताते की चोंच से डोडा खराब हो जाता है, ऐसे में इसका उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है।

पक्षियों के जाल भी नाकाफी
हालांकि किसानों ने अपनी फसल बचाने के लिए खेतों पर पक्षियों के सुरक्षा को जाल लगाए हैं, लेकिन यह सुरक्षा उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। इसके अलावा कुछ किसानों ने लाऊड स्पीकर से शोर कर ताेतों को भगाने के लिए भी जुगाड़ बनाए हैं, लेकिन यह भी अधिक प्रभावी नहीं बन पा रहे हैं। किसान प्रेम सिंह ने बताया कि इस बार मौसम अफीम की फसल के अनुकूल रहा है। विशेषकर ओलावृष्टि का असर नहीं है। इसके कारण उम्मीद थी कि बंपर पैदावार होगी। अब ताेतों ने पूरी योजना पर ही पानी फेर दिया है।
सरकार लेती है नियंत्रित कीमत पर
राजस्थान में अफीम उगाने के लिए नारकोटिक्स विभाग की कड़ी सख्ती के का पलान करना पड़ता है। अफीम निकलने के बाद सरकार किसानों से सरकारी रेट 2500 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से खरीद करती है। इसके विपरीत अवैध नशे के कारोबार में इसकी कीमत करीब 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से भी अधिक रहती है। ऐसे में अफीम का कारोबार बहुत बड़ा होता है। हालांकि अवैध से अफीम बेचना आसान काम नहीं है। क्योंकि अफीम की खेती करने वाले किसानों पर नारकोटिक्स अधिकारियों की कड़ी नजर रहती है।










