Petrol Diesel Price Hike : तेल कंपनियों को हो रहा मोटा घाटा, चुनाव के बाद कीमत बढ़ाना तय, कितना बढ़ेगा पेट्रोल और डीजल का दाम
महंगाई बढ़ने के साफ संकेत, कई पड़ोसी देशों में बढ़ चुके हैं दाम
Petrol Diesel Price Hike : अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो चुकी है, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों ने अभी तक पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं की है। ऐसे में वैश्विक वित्तीय सेवा समूह मैक्वेरी ग्रुप द्वारा जारी इंडिया फ्यूल रिटेल रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल-डीजल की वर्तमान कीमतों के चलते कंपनियों को प्रति लीटर पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये नुकसान उठाना पड़ रहा है। क्योंकि अभी क्रूड ऑयल की कीमत प्रति बैरल 135-165 डॉलर तक पहुंच गई हैं।
ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण तेल की कीमतों पर असर पड़ा है। इसके चलते भारतीय कंपनियों को पेट्रोल में प्रति लीटर 18 रुपये और डीजल में प्रति लीटर 35 रुपये का सीधा घाटा हो रहा है। इसके कारण कंपनियों ने पिछले महीने प्रतिदिन करीब 2400 करोड़ रुपये तक घाटा उठाया है। हालांकि इसको कम करने के लिए एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती की गई है। इसके बावजूद घाटा 1,600 करोड़ रुपये हो रहा है।
जरूरत का अधिकतर तेल होता है
दरअसल भारत कच्चे तेल के मामले में विश्व के सबस बड़े आयातकों में से एक है। देश में जिस मात्रा में तेल की खपत होती है, इसका 88 प्रतिशत दूसरे देशों से आयात होता है। इसमें भी 45 प्रतिशत तेल अकेले मिडिल इस्टे देशों से आता है। वहीं 35 प्रतिशत तेल का आयात रूस से हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके चलते चालू वर्ष की पहली तिमाही में घाटा बढ़ कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। लोगों काे सस्ता तेल देने के लिए सरकार द्वारा लगातार एक्साइज ड्यूटी में कमी की जा रही है। 2017 में तेल पर 22% एक्साइज ड्यूटी थी। इसको बार-बार घटाया गया और अब यह 8 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे देश के खजाने को लगातार नुकसान हो रहा है।
विश्व के कई देशों में बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
हालांकि भारत में अभी तक पेट्रोल डीजल के दाम नहीं बढ़े हैं, लेकिन इसकी सुगबुगाहट हो रही है। वहीं विश्व के कई देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा जा चुकी हैं। इसमें अमेरिका, इंग्लेंड जैसे देश भी शामिल हैं। इसके अलावा भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई हा चुकी हैं। वहीं भारत में पिछलीे बार अगस्त 2022 में कीमत बढ़ाई गई थी।
असहनीय हो रहा घाटे का बोझ
भारतीय कंपनियों पर तेल के घाटे का बोझ अब सहनीय हो रहा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव के तुरंत बाद देश में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आएगा। क्योंकि ईरान पर हमले के बाद की बात की जाए तो 46 दिनों में कच्चे तेल की कीमत काफी बढ़ी हैं।
ईरान पर 28 फरवरी को हमला हुआ था और 27 फरवरी को क्रूड ऑयल की कीमत प्रति बैरल 73 थी। इसके बाद अब यह कीमत प्रति बैरल करीब 100 डॉलर तक पहुंच गई हैं। कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमत में हर हर 10 डॉलर की वृद्धि होने पर भारतीय कंपनियों को प्रति लीटर करीब 6 रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है।
हालात सामान्य होने में लगेगा समय
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाड़ी युद्ध समाप्त भी हो जाए तो हालात सामान्य होने में समय लगेगा। क्योंकि तेल के उत्पादन से लेकर इसको भारत तक पहुंचने और यहां से ग्राहकों तक पहुंचने में काफी समय लगता है। फिलहाल देश में पेट्रोल व डीजल की उपलब्धता स्थित है, लेकिन यह रिपोर्ट लोगों को विचलित कर रही है। क्योंकि पहले ही रसोई गैस को लेकर काफी मारामारी चल रही है। ऐसे में डीजल -पेट्रोल को लेकर अब नई चिंता सताने लगी है।










