Campaign against polythene : पर्यावरण को बचाने के लिए सोनीपत से अजय अभियान

सोनीपत के अजय ने 11 महीने में 8 हजार सिंगल यूज प्लास्टिक को हटाया

Campaign against polythene : बड़ी मुहिम के पीछे हमेशा ही छोटी पहल होती है। विशेषकर ऐसे मुद्दों पर जिनको लोग गंभीर तो मानते हैं, लेकिन निपटने के लिए आगे नहीं आते। इनमें से एक मुद्दा है पर्यावरण। लगातार बिगड़ते पर्यावरण में पालीथिन की भूमिका बहुत अहम है। पर्यावरण को बचाने के लिए और पालीथिन को हटाने के लिए सोनीपत के अजय पांचाल ने अहम पहल शुरू की है। इसके परिणाम स्वरूप 11 महीने में अजय सार्वजनिक स्थानों से 8 हजार सिंगल यूज प्लास्टिक को हटा चुके हैं। हालांकि उनका लक्ष्य है कि वे 1.50 सिंगल यूज प्लाटिक को हटाए। इसके लिए अजय व उनके साथी लगातार अभियान चला रहे हैं।

सोनीपत की ब्रह्म कालोनी निवासी अजय ने इस अभियान की शुरूआत अकेले ही करते हुए आगे बढ़ाया। इस अभियान की शुरूआत उन्हाेंने कुंभ मेले से की थी। अब 11 महीने ही 8 हजार सिंगल यूज प्लास्टिक को सार्वजनिक स्थानों और प्रयोग से बाहर किया जा चुका है। सार्वजनिक स्थानों से हटो के बाद प्लास्टिक को अजय पांचाल व उनके साथी गत्ते की पेटियों में रख रहे हैं। अब लोगों को इस अभियान से जोड़ने व सिंगल यूज प्लास्टिक के नुकसान के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की भी योजना बनाई है।

Campaign against polythene : आकर्षक कलाकृति बनाते है प्लास्टिक कचरे से

इस प्लास्टिक को अन्य तरीके से प्रयोग करने के लिए भी विकल्प तलाशे जा रहे हैं। इसमें पालीस्थन से सजावटी सामान बाने का एक कार्य किया जा रहा है। इसमें फाइन आर्ट की छात्रा सीता द्वारा अन्य कई लोगों को इसी अभियान के साथ जोड़ कर पालीथिन से सजावटी सामान व अन्य सामग्री बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह मुहिम भी रंग ला रही है और इनका कारवां बढ़ रहा है। यहां बनाए जा रहे सामान को कई विशेष मौकों पर दिए जाने वाले ताेहफों के रूप में प्रयोग किया जाता है।

Campaign against polythene: Ajay campaign from Sonipat to save the environment
पर्यावरण को बचाने के लिए सोनीपत से अजय अभियान

Campaign against polythene : गोवंश की मौत का कारण बन रहा पालीथिन

सोनीपत की ब्रह्म कालोनी निवासी अजय पांचाल नगर निगम में क्लर्क के पद पर काम करते थे। हालांकि अब वे बीआर आंबेडकर यूनिवर्सिटी में नौकरी कर रहे हैं। नगर निगम में नौकरी के दौरान 2016 से 2020 तक पालीथिन मुक्त अभियान से जुड़े। तब पालीथिन को लेकर एक शोध सामने आया कि पालीथिन को खाने से गायों की मौत हो रही है। इसने ही अजय के मन को बदल दिया।

अजय के अनुसार इसके बाद से वे इस अभियान को लेकर तैयार हो गए थे। क्योंकि निगम की नंदीशाला में जिन गोवंशियों की मौत हो रही है, उनमें से 90 प्रतिशत का कारण पालीथिन ही होता है। कुछ मामलों में तो मृतक गोवंशियों के पेट से 30 से लेकर 40 किलोग्राम तक पालीथिन भी निकाला गया है। जिन पालीथिन में लोग सब्जियां या फलों के छिलके डालकर फैंक देते हैं, गाय उनको खा लेती हैं।

Campaign against polythene : 2000 कपड़े के बैग बांटे

सोनीपत निवासी अजय पांचाल राष्ट्रीय स्वयं संघ से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उन्होंने अभियान को व्यापक रूप देने के लिए युवाओं की टोली तैयार कर अभियान चलाया। इसके तहत उन्होंने अपने खर्च से लोगों को 2000 कपड़े के थैले भी बांटे हैं। साथ ही लोगों को जागरूक कर पालीथिन का प्रयोग नहीं करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके अलावा पिछले कुछ समय से उनकी टोली सड़कों पर बिखरे हुए पालीथिन को चुन कर इकट्ठा किया जाता है।

Campaign against polythene : जागरूकता के लिए कछुए का सहारा

लोगों को जागरूक करने के लिए अजय पांचाल व उनके साथियों ने अब खास योजना बनाई है। इसके तहत प्लास्टिक से कछुए की आकृति बनाकर संदेश दिया जाएगा। इससे लोगों को बताया जाएगा कि पालीथिन किस स्तर तक खतरनाक हो सकता है। क्योंकि कछूआ पानी व जमीन पर दोनों ही जगह रहता है और दोनों ही जगह पालीथिन बढ़ रहा है। इसके कारण कछूए की उम्र भी 300 साल से घट कर आधी रह गई है।

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