Goa Day : गोवा राज्य का स्थापना दिवस दमन, संघर्ष, आजादी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनने की कहानी

देश की आजादी के बाद भी गोवा ने झेली गुलामी की मार, आज बनाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

Goa Day : जब भी गोवा का जिक्र आता है, जहन में सुंदर और आकर्षक समुंद्र तट, विदेशी पर्यटकों की भरमार और मौज-मस्ती ही आती है। लेकिन आज गोवा जिन विशेषताओं के लिए जाना जाता है, इसके पीछे संघर्ष, दमन और आजादी का बहुत लंबा इतिहास है। यही इतिहास गोवा को अपने आप में विशेष बनाता है।

आज जिस गोवा को हम देखते हैं, उसकी स्थानपा बहुत नई है। क्योंकि 40 साल पहले 30 मई को गोवा भारत के 25वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। गोवा राज्य स्थापना दिवस 30 मई को मनाया जाता है। क्योंकि 1987 में गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा हुआ और देश का 25वां पूर्ण राज्य बना।

पुर्तगाली शासन से मुक्ति की कहानी

हालांकि यहां तक पहुंचने का इतिहास इतना सा नहीं है। देश की आजादी यानी 1947 के बाद भी गोवा आजाद नहीं हो पाया। यह पुर्तालियों के अधीन रहा। हालांकि इसके लिए देश में बड़े और लंबे संघर्ष हुए। गोवा को 1961 में पुर्तगाली शासन से आजादी मिली और इस को केंद्र शासित प्रदेश के रूप में घोषित किया गया। हालांकि भारत सरकार ने 1987 के गोवा, दमन और दीव पुनर्गठन अधिनियम के माध्यम से गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा देते हुए गोवा को नई पहचान दी।

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समृद्ध इतिहास, राजशाही से उपनिवेश के बीच रही विशेष पहचान गोवा का इतिहास बहुत ही समृद्ध रहा है। क्योंकि सत्ता की बात की जाए तो गोवा ने कई राजों के साथ विदेशी सत्ता प्रभव को भी झेला है। इसके बावजूद गोवा अपनी समृद्ध विरासत को संजा कर सुरक्षित रखे हुए है। क्योंकि एक जमाने में गोवा को सुनापरान्त नाम से जाना जाता था। यह दौर था लौह युग और मौर्य साम्राज्य का।

इतिहासकारों की मानें तो मौर्योत्तर काल में इस क्षेत्र में सातवाहन वंश का प्रभाव रहा। इसी दौर में गोवा यानी सुनापरान्त में आधुनिक शासन व्यवस्था के साथ व्यापार जैसे संस्थान विकसित हुए।

गोवा का स्वर्ण काल

इतिहासकारों के अनुसार 10वीं से 14वीं शताब्दी तक का समय गोवा का स्वर्ण काल रहा। इस समय इस क्षेत्र पर कदंबा राजवंश की सत्ता रही। इस दौरान में गोवा ने व्यापारिक रूप से नई ऊंच्चाईयों को छूआ। यूनानियों और रोमनों के गोवा के नए व्यापारिक रिश्ते बने। गोवा की स्थिति बेहतर जममार्ग के कारण बहुत ही अहम होती चली गई। क्योंकि उस समय अंतरराष्ट्रीय में व्यापार पूरी तरह जलमार्गों पर ही चलता था।

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औपनिवेशिक काल का प्रभाव और सत्ता परिवर्तन

गोवा का यह स्वर्ण काल बहुत लंबा नहीं चल पाया और फिर गोवा ने औपनिवेशिक काल को झेला। यह लंबा समय रहा। जो 1510 से 1961 तक गोहवा पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन के अधीन रहा। जिस समय गोवा पर पुर्तगालियों ने कब्जा किया, यह बीजापुर सल्तनत के अधीन थ। इसके बाद गोवा में यूरोपीय संस्कृति के साथ धर्म भी खूब फलाफूला।

देश की आजादी के बाद भी रहा गुलाम

हालांकि भारत देश 1947 में आजाद हो गया, लेकिन गोवा तब भी पुर्तगाल के अधीन रहा। आखिकार कार 1961 में गोवा को पुर्तगाली उपनिवेश से मुक्ति मिल पाई। इसको ही गोवा का मुक्ति काल भी कहते हैं। क्योंकि 1961 में गोवा को मुक्त हुआ और यहां चल रहे विदेशी शासन का अंत हो गया। हालांकि आजादी के बाद भी गोवा को पूर्ण राज्य बनने में 26 वर्ष का समय लग गया।

देश का सबसे छोटा राज्य है गोवा

भारत में राज्यों के क्षेत्रफल की बात की जाए तो गोवा सबसे छोटा है। क्योंकि गोवा का क्षेत्रफल महज 3,702 वर्ग किलोमीटर है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय पर्यटन की बात की जाए तो गोवा देश के सबसे अग्रणी राज्यों में है। गोवा में काफी संख्या में विदेशी पर्यटक आते हैं। हालांकि स्थानीय पर्यटकों की भी भरमार रहती है। क्योंकि यह राज्य अपने खूबसूरत समुद्र तटों के साथ मनमोहक दृश्यों के लिए जाना जाता है। इसके कारण ही गोवा में पर्यटन उद्योग काफी फलफूल रहा है।

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