Indian independence movement : भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अमर शहीद करतार सिंह सराभा
अमेरिका में गदर पार्टी बना कर लड़ी भारतीय स्वाधीनता की लड़ाई
Indian independence movement : भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई जिस प्रकार बहुत लंबी रही, इसका इतिहास भी इतना ही लंबा व रोचक है। जाने अनजाने लाखों लोगों ने देश को अंग्रेजी सत्ता से मुक्ति दिलवाने के लिए अपने प्राणों की आहूति दी। इनमें कुछ नाम सभी को याद हैं, लेकिन कुछ नाम ऐसे भी हैं, जो समय के साथ भुला दिए गए।
देश की स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान देने वाले एक ऐसे योद्धा हैं सरदार करतार सिंह सरभा। 16 नवंबर करतार सिंह सरभा का बलिदान दिवस है। आइए आपको बताते हैं उनके जीवन व उनकी वैचारिक क्रांति से जुड़े कुछ अहम बातें। ऐसे लाखों लोग आजादी की लड़ाई में रहे, जिन्होंने भारत के अंदर रह कर ही अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ आंदोलन किया। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने देश से बाहर जा कर अंग्रेजी शासकों को ललकारा। करतार सिंह सराभा इनमें से ही एक हैं।
उन्होंने अंग्रेजी पराधीनता से छुटकारा दिलवाने के लिए गदर पार्टी में काम किया। अपने ही देश की आजादी की लड़ाई लड़़ने वाला यह किशोर अंग्रेजी सत्त को काफी चुभने लगा। ऐसे में महज 19 साल की उम्र में वर्ष 1915 में उनको लाहौर सेंट्रल जेल में फंसी पर लटका दिया गया। ऐसे में सरदार करतार सिंह सराभा देश पर बलिदान हो गए।

Indian independence movement : अमेरिका में पढ़ाई
देश की आजादी की लड़ाई में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करने वाले सरदार करतार सिंह सरभा का जन्म 1896
में हुआ। पंजाब के लुधियाना के पास गांव सराभा में मंगल सिंह ग्रेवाल और साहिब कौर नामक एक जाट सिख परिवार में जन्में करतार सिंह बहुत ही होनहार थे। जब वे बहुत छोटी उम्र में थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। ऐसे में दादा द्वारा उनका लालन पालन किया गया।
प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने गांव से ही प्राप्त की और बाद में लुधियाना के मालवा खालसा हाई स्कूल में दाखिला लेने के बाद यहां से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1912 में बर्कले स्थित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए अमेरिका गए। यहां भारतीय श्रमिकों के साथ हो रहे व्यवहार ने उनको झकझौर दिया। 1913 में जब गदर पार्टी की स्थापन हुई तो उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी।
Indian independence movement : बाबा जनरल सिंह पड़ा नाम
करतार सिंह सराभा का कम उम्र में ही गदर पार्टी से जुड़ाव हो गया। गदर पार्टी की स्थापना सोहन सिंह भकना ने की थी। उन्होंने करतार सिंह को ब्रिटिश शासन के खिलाफ आंदोलन के लिए प्रेरित किया। सोहन सिंह भकना गदर पार्टी में करतार सिंह को बाबा जनरल कहते थे। अमेरिकन से ही बूंदक चलाने के साथ विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण भी लिया। इसे अलावा उन्होंने हवाई जहाज उड़ाने का भी प्रशिक्षण लिया।

Indian independence movement : अमित शाह ने दी श्रद्धांजलि
सरदार करतार सिंह सराभा के बलिदान दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। शाह ने कहा कि सराभा का जीवन हर एक राष्ट्रभक्त के लिए मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।
शाह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर इसको लेकर पोस्ट किया है। शाह ने कहा कि “देश की स्वतंत्रता को जीवन का ध्येय बनाने वाले स्वतंत्रता सेनानी करतार सिंह सराभा जी को कोटि-कोटि नमन करता हूं। गदर पार्टी के माध्यम से उन्होंने विदेश में रह रहे भारतीयों को मां भारती की स्वाधीनता के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान से उपजे जनाक्रोश ने आजादी के आंदोलन को और अधिक प्रखर बना दिया। करतार सिंह सराभा जी का जीवन हर एक राष्ट्रभक्त के लिए मातृभूमि के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा।
Indian independence movement : हर दास को विद्रोह करने का अधिकार
करतार सिंह सराभा वैचारिक रूप से बहुत निडर थे। जब उन पर कोर्ट में मुकदमा चला तो उन्होंने अपनी लड़ाई को षड्यंत्र मानने से मना कर दिया। करतार सिंह ने कहा कि हर दास को विद्रोह करने का अधिकार है।अपने ही देश के मूल निवासियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए उठ खड़ा होना कभी अपराध नहीं हो सकता। राजद्रोह के आरोप में उन्होंने पूरा मामला अपने ऊपर लेते हुए इसको स्वीकार कर लिया। यहां तक की कम उम्र देखते हुए अदालत के जज ने भी उनको बयान बदलने की सलाह दे डाली। वहीं करतार सिंह ने ऐसा करने से मना कर दिया। यहां तक की इस फैसले के खिलाफ अपील भी नहीं की। अपनी फांसी के समय उनकी उम्र 19 साल थी। इसके बावजूद फंसी के दौरान उनका वज14 पाउंड बढ़ गया था।










