Goa Liberation Day : गोवा को आजाद करवाने में लगे 14 साल
19 दिसंबर को मनाया जाता है गोवा मुक्ति दिवस
Goa Liberation Day : आज भारत में जब भी मुख्य पर्यटन स्थलों की बात होती है तो गोवा का नाम सबसे ऊपर आता है। समुंद्र तट पर बसा यह राज्य आज भारत देश का हिस्सा है, लेकिन गोवा को भारत में शामिल करने के लिए हुए संघर्ष भी बहुत रोचक हैं। 19 दिसंबर के दिन गोवा को पुर्तगाली शासन से आजादी मिली थी। ऐसे में इस दिन को गोवा मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसके पीछे देश के महान क्रांतिकारियों के संघर्षों की गाथा है। आइए आज आपको बताते हैं गोवा मुक्ति दिवस की पूरी कहानी।
यूं तो भारत देश 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश हुकुमत से आजाद हो गया था, लेकिन कुछ क्षेत्र फिर भी बचे हुए थे। इसमें गोवा भी एक है। हालांकि इसके बाद देशी रियासतों को भारत देश में मिलाने का काम हुआ, लेकिन गोवा देसी रियासत नहीं हो कर सीधे पुर्तगाल के नियंत्रण में था। (Goa News) इसके लिए आजादी की लड़ाई की तरह ही आंदोलन चले और 1947 के बाद भी इस राज्य को पुर्तगाली शासन से मुक्त करवाने में 14 साल लग गए।
आखिरकार 19 दिसंबर 1947 को गोवा आधिकारिक रूप से भारत देश का हिस्सा बना। जिस प्रकार गोवा मुक्ति दिवस विशेष है, ऐसे ही गोवा की मुक्ति में एक दिन ओर जुड़ा हुआ है। यह है 18 जून। यही वह दिन है जब गोवा की मुक्ति के लिए आंदोलन शुरू हुआ। यह दिन आजादी के एक साल बाद आया था। तब डा. राममनोहर लोहिया के नेतृत्व में चले आंदोलन के बाद गोवा को पुर्तगाल से आजादी मिल पाई थी। डा. राममनोहर लोहिया को गोवा की पराधिनता बहुत अखर रही थी। हालांकि देश आजाद हो चुका था, लेकिन गोवा को यह सौभाग्य नहीं मिला था। ऐसे में डा. राममनोहर लोहिया ने 18 जून 1946 को गोवा पहुंचकर पुर्तगालियों के खिलाफ किया आंदोलन
इसलिए उन्होंने 18 जून, 1946 को गोवा पहुंचकर पुर्तगाली सत्ता के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया। डा. लोहिया का साथ मिला तो आंदोलन तेज हुआ और गोवा के लोगों को भी लगा कि यह लड़ाई उनकी आजादी की है। (Goa News) इसलिए आंदोलन में गोवा के लोग भी हजारों की संख्या में शामिल हुए। लंबे संघर्ष के बाद गोवा को 19 दिसंबर 1961 में आजादी मिल पाई। ऐसे में 18 जून को हर साल गोवा क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है और 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस के रूप में।
Goa Liberation Day : 2 दिसंबर को शुरू हुआ अभियान
बेशक गोवा को पुर्तगाल के नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए लंबी लड़ाई चली, लेकिन इसमें कुछ दिन बहुत अहम रहे। गोवा मुक्ति लड़ाई के बाद 1961 में भारतीय सेना के तीनों अंगों को पुर्तगाली सेना के खिलाफ युद्ध के लिए तैयार रहने के आदेश दे दिए गए थ। यह अभियान 2 दिसंबर को शुरू कर दिया गया, जिसमें गोवा मुक्ति करवाने के लिए पूरा प्लान तैयार था। तब मेजर जनरल केपी कैंडेथ 7 इन्फैंट्री डिवीजन और 50 पैरा ब्रिगेड की कमान संभाल रहे थे।

Goa Liberation Day : पुर्तगाली गवर्नर ने किया आत्समर्पण
गोवा को पुर्तगाल से मुक्त करवाने के लिए भारतीय सेना ऊतर चुकी थी। वायुसेना द्वारा 8 और 9 दिसंबर को पुर्तगालियों के ठिकाने पर बमबारी की गई। इस अभियान में कई पुर्तगाली मारे गए और भारतीय सैनिकों ने भी शहादत दी। दस दिन की लड़ाई के बाद 19 दिसंबर, 1961 को तत्कालीन पुर्तगाली गवर्नर मैन्यू वासलो डे सिल्वा ने भारत के समक्ष समर्पण कर दिया। उस समय दमन दीप भी गोवा का ही हिस्सा होता था। ऐसे में गोवा के साथ इस शानदार द्वीप समूह को भी भारत ने अपने नियंत्रण में ले लिया।
Goa Liberation Day : केंद्र शासित प्रदेश रहा गोवा
पुर्तगाल से आजादी के बाद गोवा को केंद्र शासित राज्य का दर्जा दिया गया। 1961 में गोवा को आजादी तो मिल गई, लेकिन इस रूप में नहीं आया था, जिस रूप में आज हम देखते हैं। आजादी के करीब एक साल यहां चुनाव करवाए गए। इस चुनाव के बाद यहां के पहले मुख्यमंत्री बने दयानंद भंडारकर। हालांकि गोवा का महाराष्ट्र में विलय का प्रस्ताव भी आया, लेकिन तब यहां के लोगों ने जनमत संग्रह में इस प्रस्ताव को नकार दिया। इसके बाद 30 मई 1987 को गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला और यह भारत का 25वां राज्य बना।










