air pollution : आंखों व फेफड़ों का रखें ध्यान
आंखों के साथ फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचा रही जहरीली हवा
air pollution : सर्दी शुरू होने के साथ दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो चला है। यूं तो दिल्ली एनसीआर में पूरा साल ही प्रदूषण का स्तर खराब रहता है, लेकिन इस मौसम में आकर यह बहुत खराब या गंभीर श्रेणी में आ जाता है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। (air pollution) सबसे अधिक नुकसान व्यक्ति की आंखों व फेफड़ों को पहुंच रहा है। हालांकि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण व राज्य सरकारों द्वारा प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन इसका प्रभाव इतना नहीं आ रहा है।
दरअसल दीवाली के आसपास प्रदूषण का स्तर बढ़ना शुरू हो जाता है। दीवाली पर होने वाली आतिशबाजी व इसके बाद हरियाणा व पंजाब में धान की पराली जलने के कारण यह और भी गंभीर हो जाता है। इसके कारण स्वास्थ्य संबंधित कई प्रकार की परेशानियां आती हैं। सामान्य व्यक्ति को तो प्रदूषण नुकसान पहुंचाता ही है, बुजुर्गों व गर्भवती महिलाओं पर इसका बहुत ही गंभीर असर आता है। रविवार 2 नवंबर को दोपहर के समय राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित आसपास के कई क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का स्तर 400 से भी पार चला गया। यह बहुत गंभीर स्तर होता है। एक्यूआई इस स्तर पर पहुंचने के बाद चिकित्स व स्वास्थ्य विशेषज्ञ कई प्रकार की सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। एक्यूआई अधिक बढ़ने के कारण हवा जहरीली हो जाती है। ऐसे में सबसे पहले यही है कि जितना हो सके सीधा जहरीली हवा के संपर्क में नहीं आएं। फिर भी सामान्य कार्यों के लिए बाहर जाना पड़ता है तो कुछ सावधानियां जरूर बरतें।

air pollution : आंख शरीर के सबसे कोमल अंगों में से एक है। आंख पर जरा सा भी प्रभाव आने से गंभीर स्थिति बन सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि आंख का बड़ा हिस्सा हमेशा ही पर्यावरण के सीधे संपर्क में रहता है। इसके कारण यही पर्यावरण प्रदूषण से आंख को सीधा नुकसान पहुंच सकता है। इतना ही नहीं इससे आंख के साथ शरीर के अन्य अंगों पर भी असर आ सकता है। हवा में स्मोग रहने के कारण आंखों मेें जलन रहती है। इससे व्यक्ति कई बार आंखों को रगड़ लेता है। यह बहुत ही हानिकारक हो सकता है। स्मोग के कारण आंखों में गंभीर प्रतिक्रिया होती है। इसके प्रभाव से सुबह के समय भी आंखें लाल हो सकती हैं। साथ ही आंखों से पानी का रिसाव हो सकता है। (air pollution) ऐसा होने पर सीधा असर नजर पर पड़ता है। इस मौसम में हवा में कार्बन मोनोआक्साइड, नाइट्रोजन डाइआक्साइड के साथ बहुत अधिक मात्रा में धूल कण भी होते हैं। इससे आंखों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे बचने के लिए पानी अधिक पीना चाहिए और बार-बार आंखों को सामान्य पानी से छींटे मार कर धोना चाहिए।
air pollution : ऐसे करें आंखों का बचाव
वातावरण का प्रदूषण पूरे स्वास्थ्य के साथ आंखों के लिए बहुत ही हानिकारक होता है। इससे बचने के लिए वायु गुणवत्ता खराब होने पर घर के अंदर ही रहने का प्रयास करना चाहिए। जितना हो सके कम से कम बाहर निकलें। यदि बाहर जाते हैं तो आंखों को ढकने के लिए चश्मे का प्रयोग जरूर कर लें। इससे धूल व अन्य जहरीली गैस सीधे आंख तक नहीं पहुंच पाएंगी। आंख में किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया होने पर बिलकुल भी रगड़ें नहीं। (pollution) ऐसी स्थिति में आंखों को बार-बार ठंडे पानी से छींटे मारें। शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। ओमेगा-3 फैटी एसिड खाद्य पदार्थ जैसे अखरोट, बादाम, अलसी बीज व मगज का सेवन करें। फल व सब्जियों की मात्रा भी खाने में अधिक रखें। चिकित्सक की सलाह पर आंखों को लुब्रिकेंट देने के लिए दवा का प्रयोग कर सकते हैं। अपनी मर्जी से कोई भी दवा नहीं लेँ।

air pollution : फेफड़ों पर असर
बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण आंखों तरह ही फेफड़ों को भी काफी नुकसान होता है। ऐसे में इससे बचने के लिए पूरी सावधानी बरतनी चाहिएं। प्रदूषण से हवा में मौजूद जहरीली गैंसों का असर व्यक्ति के श्वसन तंत्र पर पड़ता है। इसके अध्यन को चिकित्सीय भाषा में पल्मोनोलाजी कहा जाता है। प्रदूषण का असर अस्थमा के अटैक को भी बढ़ा देता है। ऐसे में पहले से ही अस्थमा से ग्रस्त लोगों के लिए यह मौसम जानलेवा होता है। (air quality) प्रदूषित वायु में सांस लेने के कारण वायु प्रवाह सही नहीं रहता। रुकावट से सही प्रकार से सांस लेने में दिक्कत होती है। ऐसी हवा में सांस लेने के कारण फेफड़ों के ऊतकों क्षतिग्रस्त होते हैं। जहरीली हवा में सांस लेने से फेफड़े बहुत अधिक प्रभावित होते हैं और इसके कारण फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है। साथ ही बच्चों के फेफड़े पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाते। इसके कारण खतरा बढ़ जाता है। इससे फेफड़ों का विकास भी प्रभावित होता है। जो पूरे जीवन के लिए गंभीर हो सकता है।
air pollution : ऐसे करें बचाव
प्रदूषण की स्थिति बेशक गंभीर है, लेकिन इससे फेफड़ों को बचाने के लिए कई प्रकार की सावधानियां जरूरी हैं। आज कल एयर प्यूरिफायर का प्रयोग भी आम हो चला है। इसको प्रयोग किया जा सकता है। (air quality)प्रदूषण की स्थिति में बाहर जाने से बचें। यदि जाना पड़े तो प्रदूषण के साथ हवा के में धूल कणों को रोकने में सक्षम मास्क का प्रयोग जरूर करें। सांस लेने में किसी भी प्रकार की दिक्कत है तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।










