Animal Management In Winter : सर्दियों में ऐसे करें पशुओं की देखभाल, दूध नहीं होगा कम
जरा सी सावधानी पशुओं को बचाएगी सर्दी से
Animal Management In Winter : सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है और इसका असर इंसानों के साथ पशुओं पर भी पड़ता है। विशेष कर दूध देने वाले पशुओं की सही देखभाल नहीं होने पर दूध कम हो जाता है। साथ ही पशु बीमार होने पर किसानों को आर्थिक नुकसान भी होता है। ऐसे में जरा सी सावधानी रख कर पशुओं को सर्दी से बचाया जा सकता है।
हरियाणा के जींद जिला में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप मंडल अधिकारी डा. सुरेंद्र कुमार बताते हैं कि यह मौसम पशुओं के लिए बहुत ही विशेष होता है। किसानों व पशु पालकों को चाहिए कि पशुओं को सर्दी से बचाने के लिए विशेष प्रबंध करें। क्योंकि ठंड लगने पर दुधारू पशुओं की उत्पादन क्षमता पर भी काफी असर देखा जाता है। गाय-भैंस (cow buffellow) के साथ इनके बच्चों और भेड़-बकरियों में सर्दी काफी असरदार होती है। इससे कई बार पशु की जान भी चली जाती है। अभी सर्दी की शुरूआत है, ऐसे में पशुपालकों को अभी से इसकी तैयारी करनी करनी चाहिए। डा. आर्य के अनुसार पशुओं की देखभाल इस प्रकार करें, जैसे हर स्वयं की या अपने बच्चों की करते हैं।
Animal Management In Winter : खुराक का रखें ध्यान
डा. आर्य के अनुसार दुधारू पशुओं की खुराक में बिनौला अधिक मात्रा रखना चाहिए। बिनौला दूध के अंदर चिकनाई की मात्रा बढ़ाता है। पशुओं के खाने-पीने और रहने के लिए अच्छा प्रबंध करें ताकि वो बीमार नहीं पड़ें और दूध के उत्पादन पर प्रतिकूल असर नहीं पड़े। सर्दियों में पशुओं को संतुलित आहार दें, जिसमें ऊर्जा, प्रोटीन, खनिज तत्व, पानी, विटामिन व वसा आदि पोषक तत्व मौजूद हों। इन दिनों में पशुओं को विशेष देखभाल की जरुरत होती है, ऐसे में पशुओं के खान-पान व दूध निकालने का समय एक ही रखना चाहिए।
शीतलहर के दिनों में पशु के चारे में सैंधा नमक का ढ़ेला रखें। इससे पशु जरूरत के अनुसार उसको चाटता रहेगा। किसी भी संतुलित आहार में 15 प्रतिशत से अधिक बाजरा नहीं मिलाना चाहिए। सर्दी में पशुओं को हरा चारा जैसे बरसीम खिलाएं, परंतु ध्यान यह दें कि सिर्फ हरा चारा खिलाने से आफरा व अपच की समस्या हो सकती है। ऐसे में हरे चारे के साथ सूखा चारा मिलाकर खिलाएं। पशु को सप्ताह में दो बार गुड़ जरूर खिलाएं। गुनगुना, ताजा व स्वच्छ पानी भरपूर मात्रा में पिलाएं।

Animal Management In Winter : सर्दी से बचाने का करें प्रबंध
अधिक ठंड बढ़ने पर पशुओं को खुली जगह में नहीं रखें। यह सुनिश्चित कर लें कि पशुओं को सीधी ठंडी हवा नहीं लगे। अंदर के पशु बाड़े में भी रोशनदान, दरवाजों व खिड़कियों को ढक दें। इस दौरान ऊपर की ओर कुछ खुली जगह रखी जा सकती है, जहां से सीधी हवा पशु तक नहीं पहुंचे। पशु बाड़े में गोबर और मूत्र निकासी का प्रबंधन अच्छा होना चाहिए। पशुओं के नीचे लगातार गीला रहने से बीमार हो सकते हैं। पशु ग्रह में ऐसी व्यवस्था रखें की यह नमी एवं सीलन से बचा रहे। हो सके तो पशुओं को ताजा पानी पिलाएं। अधिक ठंड होने पर पशुओं को गर्म पानी मिलाकर पिलाना चाहिए। बिछावन में पराली या गद्दे को प्रयोग में लाया जा सकता है।
Animal Management In Winter : गर्मी की करें व्यवस्था
पशुओं के बाड़े में रात के समय उचित गर्मी की व्यवस्था करें। इसके लिए अलावा जलाया जा सकता है, लेकिन इसमें धुआं पूरी तरह से निकलने के बाद ही पशु बाड़े में रखें और कुछ देर के बाद इसको बाहर निकला लें। छोटे बच्चों को जन्म लेने पर खीस या पहला दूध जरूर पिलाएं। इसमें बीमारी से लड़़ने की क्षमता में अधिक होती है और बच्चा मजबूत होता है। कभी भी पशु के प्रसव के बाद मां को ठंडा पानी नहीं पिलाएं।
ठंड लगने पर लक्षण : Animal Management In Winter
डा. सुरेंद्र कुमार आर्य के अनुसार पशु पालकों को ठंड के प्रभाव से होने वाले लक्षणों का पता होना चाहिए। ठंड के प्रभावित पशु के शरीर में कंपकंपी हाेती है। बुखार के लक्षण होते हैं, ऐसे पशुओं को तुरंत निकटतम पशु चिकित्सक को दिखाना चाहिए। पशु खाना कम कर देगा और सुस्त भी रहेगा। इससे समझ लें कि पशु ठंड की चपेट में है। साथ ही नाक से पानी भी बहने लगेगा। पशु का गोबर भी पतला आएगा।










