Physical Buttons Car Control : गाड़ियों में फिर लौटने लगे पुराने जमाने के बटन
टच स्क्रीन से मोह हो रहा भंग, विदेशी कारों में शुरू हुआ पुराना पैटर्न
Physical Buttons Car Control : आज कर मोटर कार के इंटीरियर में टच स्क्रीन सबसे अहम हो चली है। हालांकि पुराने जमाने की गाड़ियों में टच स्क्रीन की जगह पर बटन मलते थे। अब फिर से बटन का जमाना लौटने लगा है। इसका मुख्य कारण टच स्क्रीन को लेकर यूजर्स का अनुभव है। क्योंकि लंबे समय तक टच स्क्रीन की बजाय बटन सिस्टम बेहतर रहता है। ऐसे में विदेशी कारों में अब पुराना बटन वाला पैटर्न शुरू हो गया है।
यूं तो पिछले करीब दो दशक में कार निर्माता कंपनियों द्वारा इंटीरियर को पूरी तरह से बदल दिया गया है। पुराने समय की कारों में जहां गाड़ी के एसी, वाइपर, म्यूजिक के साथ लाइट्स के लिए भी बटन लगाए जाते थे। इसके लिए अलग-अलग नाब्स दिए जाते थे। हालांकि अब यह पूरी तरह से बदल गया हे। इनमें से कई चीजों को अब आपरेट करने के लिए बटन की जगह ऐसे विकल्प दिए जाते हैं, जिनको छूने मात्र से मनचाही कमांड दी जा सकती है। यह सारा कंट्रोल अब टच स्क्रीन से जोड़ दिया गया है। हालांकि टच स्क्रीन का सिस्टम गाड़ी में मार्डन होने के साथ प्रीमियम अनुभव भी देता है। वहीं अब यह नए जामने की तकनीक बदल कर पुराने जमाने की तकनीक में ढल रही है।
Physical Buttons Car Control : फिजिकल बटन की वापस
गाड़ियों में फिर से पैटर्न बदल रहा है। इसके परिणामस्वरूप 2025–26 तक कई जानी मानी कार निर्माता कंपनियों द्वारा फिजिकल बटन और नाब्स सिस्टम को शुरू किया जा रहा है। इन कंपनियों की बात की जाए तो भारतीय बाजार में अपनी खास पहचान रखने वाली Volkswagen, Hyundai और Mercedes-Benz जैसे नाम शामिल होते हैं। इस बदलाव के पीछे कंपनियों द्वारा पुराने समय का अनुभव दिलवाना नहीं है। बल्कि यह बदलाव करने के पीछे यात्रियों की सुरक्षा, नियमों की सख्ती के साथ ग्राहकों के अनुभव महत्वपूर्ण हैं।

Physical Buttons Car Control : ड्राइविंग के दौरान सुरक्षा पर असर
विशेषज्ञों की मानें तो टच स्क्रीन के कारण गाड़ी चलाते समय सुरक्षा पर असर पड़ता है। हालांकि यह टच स्क्रीन स्मार्ट तो दिखती है, लेकिन जब ऐसी को सैट करना हो, या म्यूजिक सिस्टम में आवाज अधिक या कम करनी हो तो टच स्क्रीन के कारण ड्राइविंग से ध्यान हटता है। इसके कारण हादसा हो सकता है। वहीं फिजिकल बटन के माध्ययम से बहुत ही आसानी से मसल मेमोरी के आधार पर नियंत्रित हो जाती है।
ऐसे में बटन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत नहीं होती। ऐसे में बटन की पुरानी व्यवस्था को बेहतर माना जा रहा है। इसके अलावा Euro NCAP के नियमों में सख्ती भी मुख्य कारण है। यूरोप की प्रमुख कार सेफ्टी एजेंसी Euro NCAP ने संकेत दिया है कि 2026 से सेफ्टी को लेकर नियम अधिक सख्त किए जाएंगे।
इसके तहत इंडिकेटर, वाइपर, हार्न, इमरजेंसी काल जैसी प्रणाली सिर्फ टच स्क्रीन से आपरेट होने पर गाड़ी को 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग नहीं दी जाएगी। इसके चलते ही ऊंची सेफ्टी रेटिंग के लिए फिजिकल बटन वाला नियंत्रण सिस्टम अपनाया जा रहा है।
Physical Buttons Car Control : खर्चीला होता है टच स्क्रीन
इसके अलावा टच स्क्रीन को लेकर ग्राहकों का अनुभव भी यही रहा है कि यह अधिक खर्चीला होता है। हालांकि शुरू शुरू में टच स्क्रीन का कंट्रेाल काफी पंसद आता है, लेकिन बाद में इसकी परेशानियां सामने आने लगती हैं। इसका मुख्य कारण उबड़-खाबड़ रास्तों स्क्रीन को प्रयोग करना काफी परेशानी भरा रहता है। इससे लोग मानसिक रूप से परेशान होते हैं। अधिक ध्यान लगा कर विकल्प चुनने पड़ते हैं। वहीं इसमें गड़बड़ी आने पर यह बहुत महंगा पड़ता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में नए टच स्क्रीन मार्डन विकल्प की बजाय पुराने समय के फिजिकल बटन वाले कंट्रोल ही देखने को मिल सकते हैं। इससे कारों को इंटीरियर पूरी तरह से बदल जाएगा।










