Kedarnath Yatra Preparations : कब खुलेंगे केदारनाथ धाम के कपाट, 15 फरवरी को होगा तय

प्रशासन ने शुरू की तैयारी, कैदारनाथ यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन कर रहा प्रबंध

Kedarnath Yatra Preparations : बाबा केदारनाथ के विश्व प्रसिद्ध धाम केदारनाथ कपाट कब खुलेंगे, इसका फैसला 15 फरवरी महाशिवरात्री को होगा। इस बार श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए प्रशासन के साथ-साथ बदरी केदार मंदिर समिति द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। जैसे ही केदारनाथ के कपाट खोलने की तारीख तय हो जाएगी, चारधाम यात्रा के लिए भी तैयारी की जाएंगी। मंदिर के कपाट खुलने से लेकर बंद होने तक हर साल 15 से 20 लाख के बीच श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन व्यापक रूप से व्यवस्था बनाने में जुटा हुआ है।

हर साल मंदिर के कपाट खोलने और बंद करने की तारीख तय की जाती हैं। इस बार भी हर साल की तरह ही
गर्मी के मौसम में कपाट खोलन का फैसला महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी को होने जा रहा है। इसके लिए खास व्यवस्था होती है। मंदिर के कपाट खोलने की तिथि तय करने के लिए ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ पंचांग गणना के तहत गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में पंचगाई, हक-हकूकधारियों, मंदिर समिति, तीर्थपुरोहितों व प्रशासन की मौजूदगी में यह फैसला लिया जाता है।

अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर से धाम रवाना होने की तिथि भी निर्धारित हो जाएगी। रास्ते से लेकर धाम तक हर जगह यात्रियों के लिए उपयुक्त व्यवस्था की यात्रा से पहले करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

सर्दियों में बर्फबारी के बाद हो रहा है आंकलन

दरअसल सर्दियों में बाबा केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाते हैं। ऐसे में सर्दी के कारण मंदिर के रास्ते भी बंद होते हैं। बर्फबारी के बाद जब मौसम मर्ग होने लगता है तो यहां सुरक्षा का पूरा आडिट किया जाता है। इसके बाद ही आगे का फैसला लिया जाता है। प्रशासन का कहना है कि इसके आंकलन के लिए विभिन्न विभागों की संयुक्त टीम अभी काम पूरा नहीं कर पाई है। ऐसे में यह साफ नहीं है कि मार्ग किस स्थिति में हैं। इससे पहले कोई भी फैसला नहीं लिया जा सकता।क्योंकि अभी तक लिनचोली तक व्यवस्थाओं का आंकलन किया गया है। इससे आगे बर्फबारी अधिक होने के कारण मार्ग बंद है।

रामबाड़ा रूट पर पूरी नहीं सुविधाएं

हालांकि रामबाड़ा से केदारनाथ तक का रास्ता तैयार हो चुका है, लेकिन इस मार्ग पर जरूरी सुविधाएं अभी तैयार नहीं हुई हैं। इसमें पेयजल व अन्य जरूरत सुविधाएं शामिल हैं। इसके चलते अभी इस मार्ग से यात्रा की अनुमति मिलना असंभव लग रहा है। गौरतलब है कि 2013 की केदारनाथ आपदा में यह रास्ता पूरी तरह से टूट गया था। अब रामबाड़ा से गरुड़चट्टी के बीच 5.35 किमी लंबा और 1.8 मीटर चौड़ा रास्ता तैयार किया गया है। यह मार्ग पैदल यात्रियों के लिए ही है। ऐसे में यात्रा शुरू होने से पहले ही प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो।

नया रास्ता तैयार

इसके बाद सरकार द्वारा मंदाकिनी नदी की दांई ओर केे किनारे से नया मार्ग तैयार किया गया है। यह मार्ग 9 किलोमीटर लंबा है। इससे रामबाड़ा – भीमबली- लिनचोली-रुद्रा प्वाइंट और केदारनाथ धाम तक पहुंचा जा सकता है। इस रास्ते पर कुछ जगह तो मई महीने तक बर्फ जमी रहती है। ऐसे में 2017 में रामबाड़ा से केदारनाथ तक पुराने पैदल मार्ग को पुनर्जीवित करने की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई थी।

अब रामबाड़ा से केदारनाथ तक पुराने पैदल मार्ग का निर्माण कर इसको तैयार कर दिया है। अब यहां पर अन्य जरूरी सुविधाएं जुटाई जानी हैं। अब प्रशासन द्वारा यहां पर विभिन्न विभागों के सहयोग से तैयारी की जा रही है। इसके तहत बिजली आपूर्ति से लेकर रास्ते की सफाई तक के काम की योजना बनाई गई है।

आनलाइन पंजीकरण जरूरी

गौरतलब है कि केदारनाथ यात्रा के लिए पहले आनलाइन पंजीकरण जरूरी है । इसके बाद यात्रा से पहले खुद को शारीरिक तौर पर भी तैयार कर लें। क्योंकि यह यात्रा खड़ी चढ़ाई और ठंडे वातावरण में होने वाली है, ऐसे में सर्दियों के अनुरूप ही कपड़े भी रखने चाहिएं। इसके अलावा यहां मौसम बदल सकता है। ऐसे में रेनकोट भी जरूरी सामान के रूप में आता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केदारनाथ जाने से पहले ही ठहरने की व्यवस्था को सुनिश्चित कर लें। इसके अलावा मौसम के बदलावों को लेकर अपडेट रहें।

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