Mustard Prices : राजस्थान में नई सरसों की आवक शुरू, देश भर में रिकार्ड उत्पादन की उम्मीद
अधिक नमी के बावजूद 6400 रुपये प्रति क्विंटल तक खरीद रहे व्यापारी
Mustard Prices : रबी की प्रमुख नकदी फसल सरसों मंडियों में पहुंचनी शुरू हो गई है। देश भर में इस बार सरसों की अच्छी पैदावादार होने की उम्मीद है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार मौसम फसल के अनुकूल रहा है। ऐसे में बंपर फसल मंडियों में आ सकती है। सरकार भी तिलहन के मामले में उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है।
दरअसल राजस्थान देश में प्रमुख सरसों उत्पादक राज्य है। देश में होने कुल वाले सरसों के उत्पादन का करीब 45 % राजस्थान में ही होता है। इसके अलावा दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में बड़े स्तर पर सरसों की खेती होती है। राजस्थान की बात की जए तो यहां जयपुर के आसपास, अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले सरसों बहुत बड़े क्षेत्र में सरसों का उत्पादन होता है। वहीं हरियाणा की मंडियों में 7 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक सरसों की बिक रही है।
शुरू हो चुकी है आवक
राजस्थान की विभिन्न मंडियों में सरसों की आवक शुरू हो चुकी है। अनुमान है कि सभी मंडियों में इस बार रिकार्ड उपज पहुंच सकती है। राजस्थान की लालसोट और मंडावरी मंडियों में सरसों की आवक में लगातार तेजी आ रही है। यह मंडियां उपज बिक्री के लिए काफी प्रसिद्ध है। हालांकि अभी सरसों में नमी की मात्रा अधिक चल रही है, इसके बावजूद सरसों की कीमत प्रति क्विंटल 6400 रुपये तक जार रही है। हालांकि कम गुणवत्ता वाली सरसों की कीमत कम मिल रही है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सरसों की फसल कम खर्च की है। ऐसे में किसान इसकी ओर अधिक बढ़ रहे हैं। साथ ही इसके भाव भी अधिक मिल रहे हैं।
समर्थन मूल्य में वृद्धि
केंद्र सरकार ने इस बार सरसों के समर्थन मूल्य में 250 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। रबी सीजन 2026-27 के लिए सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5950 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। पिछले साल यनी 2024-25 वर्ष में एमएसपी 5650 रुपये था।
लगातार बढ़ रही आवक
राजस्थान की विभिन्न मंडियों में आवक अब बढ़ रही है। लालसोट मंडी के कारोबारी प्रवीण कुमार ने बताया कि पिछले 2 दिन में आवक बढ़ी है। अब जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, किसान अपनी तैयार सरसों की फसल को मंडी में लेकर पहुंच रहे हैं। हालांकि अभी तक देश भर की मंडियों में ही सरसों की कीमत तेजी पर चल रही है। वहीं राजस्थान की विभिन्न मंडियों में दुकानों के आगे सरसों की ढेरी देखी जा सकती हैं। राजस्थान की बात करें तो इस बार 35 लाख हैक्टेयर से अधिक में सरसों की बिजाई हुई है। यह पिछले सालों के मुकाबले काफी अधिक है। वहीं मध्यप्रदेश की बात की जाए तो यहां करीब 15 लाख हैक्टेयर में सरसों की बिजाई हुई है। वहीं हरियाणा में करीब 8 लाख हैक्टेयर सरसों बोई गई है।
बढ़ रही है सरसों की मांग
देश में ही नहीं विश्व भर में सरसों की मांग काफी रहती है। देश खाद्य तेल की बात करें तो सरसों इनमें प्रमुख है। वहीं भारत अपनी जरूरत का 50 प्रतिशत से अधिक खाद्य तेल आयात करता है। वहीं सरसों तेल स्वास्थ्य के लिए काफी अच्छा भी माना जाता है। ऐसे में सरसों की मांग लगातार बढ़ रही है। फिलहाल मंडियों में पहुंच रही सरसों में 15 प्रतिशत तक नमी आ मिल रही है। जो काफी अधिक है। इसके बावजूद व्यापारी 5600 से 6400 रुपये प्रति क्विंटल तक सरसों की खरीद कर रहे हैं। यह कीमत पिछले साल के मुकाबले अधिक है।
हरियाणा में देरी से आती है सरसों
राजस्थान के मुकाबले हरियाणा में सरसों की फसल कुछ देरी से तैयार होती है। इसका मुख्य कारण फसल चक्र भी है। दरअसल खरीफ फसल के रूप में हरियाणा में अधिकतर क्षेत्र में बिजाई होती है। इसके कारण बाजरा या कपास की फसल कटने के बाद ही सरसों की बिजाई करनी पड़ती है। इसमें राजस्थान के मुकाबले कुछ देर हो जाती है। यही कारण है कि सरसों की फसल पकने और इसको मंडी में पहुंचने भी समय लगता है।










