Lunar Eclipse : पूरे भारत में दिखेगा चंद्र ग्रहण, 1.155 होगा मैग्नीट्यूड
3 मार्च को हो रही है अद्भुत खगोलीय घटना, कुछ हिस्सों में अंतिम चरण में दिखेगा ग्रहण
Lunar Eclipse : इस साल का पहला सूर्य ग्रहण 3 मार्च को होने जा रहा है। यूं तो चंद्र ग्रहण अद्भुत खगोलीय घटना होती है, लेकिन इसकी अपनी धार्मिक मान्यताएं भी हैं। भारत जैसे विशाल देश में कई बार सूर्य ग्रहण अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई देता है, लेकिन इस बार पूरे भारत में दिखेगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में ग्रहण अंतिम चरण में दिख पाएगा। इसकी लिए खगोल शास्त्री भी अपने स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। इस बार चंद्र ग्रहण का मैग्नीट्यूड 1.155 होगा। इसका अर्थ हुआ कि पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।
क्योंकि भारत में चंद्र या सूर्य ग्रहण धर्म से भी जुड़ा हुआ है, ऐसे में इसको लेकर भी लोग तैयारी कर रहे हैं। चंद्र ग्रहण को लेकर होली पूजन या होलिका दहन में भी बदलाव किया गया है। आमतौर पर दुलहंडी से एक दिन पहले ही होलिका दहन होता है, लेकिन इस बार होलिका दहन 2 मार्च को हो रहा है और रंगों का पर्व खेला जाएगा 4 मार्च को। इसमें एक दिन का अंतर आ रहा है। यह व्यवस्था ज्योतिषाचार्यों द्वारा चंद्र ग्रहण को देखते हुए की गई है। क्योंकि चंद्र ग्रहण के दौरान धार्मिक कार्य वर्जित होते हैं। और सूतक काल के कारण होलिका पूजन पहले किया गया है।
क्या होता है मैग्नीट्यूड
दरअसल मैग्नीट्यूड को हिंदी में परिमाण कहा जा सकता है। परिमाण का अर्थ है किसी वस्तु का संख्यात्मक मूल्य। खगोल भौतिकी की भाषा में परिमाण किसी पिंड द्वारा संपूर्ण विद्युत चुंबकीय वर्णक्रम मे उत्सर्जित ऊर्जा का मूल्य होता है। इसको किसी पिंड की चमक कहा जा सकता है। मैग्नीट्यूड का अर्थ हुआ किसी चीज का आकार परिमाण मात्रा या इसकी महत्ता। विज्ञान गणित के हिसाब से किसी चीज की तीव्रता या विशालता भी हो सकती है।
क्यों हाेता है चंद्र ग्रहण
दरअसल चंद्र ग्रहण के दौरान, चांद पृथ्वी की छाया में चला जाता है। इससे सूर्य की राेशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती और यह दिखाई नहीं देता। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार चंद्र ग्रहण का मैग्नीट्यूड 1.155 रहेगा। इससे यह पूर्ण ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आने के कारण होता है। इसमें पृथ्वी की स्थिति सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। इसके चलते चंद्र ग्रहण हो जाता है।
क्या होता है ब्लड मून
जब ग्रहण होता है, चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देने लगता है। इसको ब्लड मून कहा जाता है। दरअसल इसका कारण यह है कि पृथ्वी के वायु मंडल से लाल रोशनी ही चंद्रमा तक पहुंच पाती है। इसके कारण से यह लाल दिखाई देता है। इसमें नीली रोशनी भी होती है, लेकिन वह वायु मंडल बिखर जाती है और चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती।
इन हिस्सों में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण
आईएमडी के अनुसार भारत के अधिकतर हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखेगा। हालांकि अलग- अलग क्षेत्रों में विजिबिलिटी यानी दृश्यता के अनुसार इसमें असर आ सकता है। अधिकत क्षेत्रों में चंद्रोदय के समय ग्रहण का आखिरी फेज देखने को मिलेगा। भारत के उत्तर- पूर्वी हिस्सों के साथ अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में ग्रहण का आखिरी चरण में ही दिखेगा।
भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण
भारतीय समय के अनुसार चंद्र ग्रहण की बात की जाए तो इसकी शुरूआत दोपहर बाद 3:20 बजे होगी। वहीं करीब 1 घंटे बाद यानी शाम 4:34 बजे पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। शाम 5:33 बजे पूर्ण चंद्र ग्रहण की समाप्ति होगी और ग्रहण 6:48 बजे तक चलेगा। चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को ही हाेता है। वहीं होली पर्व भी फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। ऐसे में ग्रहण के चलते इस बार होलिका दहन का समय 2 मार्च को निश्चित किया गया।










