Ken Betwa Project : पहली नदी जोड़ो परियोजना का क्यों हो रहा है विरोध, 44 हजार करोड़ की परियोजना पर लोगों का अड़ंगा

केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध कर रहे हैं स्थानीय लोग, मुआवजे और पुनर्वास के बावजूद क्यों अड़े हैं किसान

Ken Betwa Project : भारत में नदियों के पानी का बेहतर प्रबंधन करने के लिए नदियों को आपस में जोड़ने की परियोजना बहुत पुरानी है, लेकिन अब यह परियोजना धरातल पर उतरने लगी है। इसके तहत पहली नदी जोड़ो योजना के अंतर्गत केन-बेतवा लिंक परियोजना पर काम किया जा रहा है।

वहीं स्थानीय निवासियों ने इस परियोजना को विराेध कर दिया है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय निवासियों ने यहां तक कह दिया है कि वे मर जाएंगे, लेकिन भागेंगे नहीं।इस परियोजना पर 44600 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। 25 दिसंबर 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना की आधारशिला रख चुके हैं। अब ऐसी स्थिति क्यों बनी है। आइए इसको विस्तार से समझते हैं।

विस्थापन का डर, पर्यावरणीय चिंताएं

दरअसल स्थानीय लोगों को इस परियोजना से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसके लिए बन रहे रूट के कारण 24 गांव विस्थापित होंगे। यही मुख्य कारण है कि इन गांवों के लोग इस परियोजना के विरोध में उतर आए हैं। वहीं 8 गांव ऐसे हैं, जो डूब वाले क्षेत्र में आ रहे हैं। अब सबसे अधिक विरोध भी यहीं हो रहा है। इसके अलावा टाइगर रिजर्व के भी 16 गांव इस परियोजना में प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि इसके लिए बनने वाले बांध के कारण काफी संख्या में पेड़ों की कटाई होगी और इससे वन्य जीव प्रभावित होंगे।

क्या है परियोजना का महत्व

दरअसल यह परियोजना मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश राज्यों के विशेष भू भाग बुंदेलखंड के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस परियोजना से बुंदेलखंड क्षेंत्र में करीब 6 लाख हेक्टेयर खेतों को सिचांई के लिए पानी मिलेगा। परियोजना के तहत मध्यप्रदेश की केन नदी में बेतवा से करीब 1074 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी पहुंचेगा।

इस पानी की मात्रा में से 266 एमसीएम पानी को 250 किलोमीटर लंबी नहर के रास्ते में मध्यप्रदेश के पन्ना, टीमकगढ और छतरपुर के साथ उत्तर प्रदेश के यूपी के झांसी, बांदा और महोबा जिले सिंचाई की व्यवस्था की जाएगी।

इतना ही नहीं अन्य कार्यों में प्रयोग होने के बाद बेतवा नदी में 591 एमलीएम पानी पहुंचेगा। इस परियोजना के तहत बेतवा में 4 नए बांध बनाने की योजना है। इससे मध्यप्रदेश के विदिशा और रायसेन जिलों में भी पानी उलब्ध करवाया जा सकेगा।

जानें नदियों की भौगोलिक स्थिति

इस परियोजना को समझने के लिए जिन नदियों को जोड़ा जाना है, उनकी भौगोलिक स्थिति को जानना बेहद जरूरी है। सबसे पहले बात करते हैं केन नदी की। यह नदी मध्यप्रदेश में कैमूर की पहाड़ियों से निकल कर 427 किलोमीटर तक बहते हुए उत्तर प्रदेश के रास्ते यमुना नदी समा जाती है।

हालांकि केन नदी पर और इसकी सहायक नदियों पर 5 बांध बन चुके हैं। वहीं बेतवा नदी मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से निकलती है और उत्तर प्रदेश में हमीरपुर के पास यमुना नदी का हिस्सा बन जाती है। इस नदी का रूट करीब 576 किलोमीटर का है। बेतवा इसकी सहायक नदियों पर 24 बांध बना लिए गए हैं।

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यह है योजना

इन दोनों नदियों को समझने के बाद अब इस योजना को समझें। दरअसल यह परियोजना इन दोनों नदियों को जोड़ रही है। यानी केन और बेतवा नदी को मध्य प्रदेश के छतरपुर में डोढन गांव के पास जोड़ा जाना है। यहीं पर मुख्य बांध बनेगा। इसके साथ ही यहां पर 78 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए पावर हाउस के निर्माण भी की योजना है। साथ ही यहां से 220 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण होगा, जो उत्तर प्रदेश के झांसी स्थिति बरुआसागर तालाब पानी पहुंचाएगी।

लंबे समय से चल रहा है आंदोलन

इस परियोजना में जहां ग्रामीण विस्थापन का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं मुआवजे और पुर्नवास जैसी समस्याएं भी समाने आई हैं। इसको चलते लंबे समय से आंदोलन रहा है। इसके तहत जहां ग्रामीण भ्रष्टाचार का आरोप लगा कर 5 अप्रैल को छतरपुर जिला गांव डोढन में प्रतीकात्मक चिताओं पर लेट कर भी आंदोलन कर चुके हैं। इसके अलावा नदी में प्रतीकात्मक फंदे लगा कर भी आंदोलन किया गया है।

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