Basmati Export Affected : ईरान संकट का असर भारत के बासमती निर्यात पर, 55 हजार करोड़ का व्यापार हो सकता है प्रभावित

ईरान सहित कई खाड़ी देशों को निर्यात होता है भारत से चावल

Basmati Export Affected : पिछले 3 दिन से ईरान पर इजराइल व अमेरिका द्वारा हमले किए जा रहे हैं। इससे वैश्विक राजनीति बदल रही है। व्यापार पर भी इसका असर दिख रहा है। हालांकि ईरान युद्ध का असर सिर्फ क्रूड आयल पर ही माना जा रहा है, लेकिन इससे भारत के निर्यात पर बुरा असर पड़ रहा है। यह असर आएगा बासमती चावल के निर्यात में। क्योंकि ईरान, साउदी अरब, यमन और दुबाई जैसे देशाें में भारत से चावल निर्यात किया जाता है।

वर्तमान संकट से भारतीय एक्सपोर्टर सकते में हैं। क्योंकि भारत से करीब 55 हजार करोड़ रुपये की बासमती चावल का निर्यात प्रभावित हो रहा है। इसका असर हरियाणा व पंजाब जैसे राज्यों पर भी पड़ रहा है। निर्यात की बात की जाए तो अकेले पंजाब और हरियाणा से करीब 75 प्रतिशत बासमती चावल अरब देशों को निर्यात होता है। बासमती चावल का उत्पादन भी इन्हीं प्रदेशों में अधिक होता है।

पंजाब से होता है 18 हजार करोड़ का बासमती निर्यात

भारत से बासमती चावल के निर्यात की बात की जाए तो अकेले पंजाब से 18 हजार करोड़ रुपये का बासमती खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। इनमें ईरान, साउदी अरब, यमन और दुबई जैसे देश शामिल हैं। भारतीय निर्यातकों का कहना है कि इजरायल और अमेरिका के साथ हो रहे ईरान के युद्ध के कारण बासमती निर्यात भारी गिरावट आएगी। ऐसे में भारतीय निर्यातकों को जबरदस्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

सुधर रहा था कारोबार

बासमती कारोबार फिलहाल सुधर रहा था। बासमती निर्यात एसोसिएशन के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों इस व्यवसाय को काफी प्रभाव पड़ रहा है। क्योंकि एक्सपोर्ट होने वाला माल बंदरगाहों पर अटक गया है। अभी तक निर्यातकों को पिछले सालों का भुगतान भी नहीं मिल पाया है। पिछले साल यानी साल 2025 में इजरायल-ईरान तनाव के कारण भी व्यापार पर असर पड़ा था। अब यह युद्ध यमन, दुबई और सऊदी अरब तक प्रभावित कर रहा है। अब व्यापारियों को व्यापार में सुधार की उम्मीद लग रही थी, लेेकिन युद्ध से सब उल्टा हो गया।

बड़ा निर्यातक देश है भारत

चावल निर्यात की बात की जाए तो भारत काफी बेहतर स्थिति में है। चावल निर्यात के वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदार 30% से अधिक है। 2024-25 की बात की जाए तो भारत ने 21.55 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक चावल निर्यात किया था। हालांकि इसमें गैर-बासमती चावल भी था। गैर बासमती चावल के निर्यात में 25% की वृद्धि हुई और बासमती चावल के निर्यात में 8% वृद्धि शामिल रही। यह चावल मुख्य रूप से सऊदी अरब, बेनिन, इराक और संयुक्त अरब अमीरात में निर्यात किया गया। वर्ष 2025 में भारत से करीब 21.55 मिलियन टन चावल का निर्यात किया गया। हालांकि 2022 में निर्यात 22.3 मिलियन टन रहा है।

सीआईएफ समझौतों से बचें निर्यातक

युद्ध की स्थिति के कारण भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) द्वारा सलाह जारी की गई है कि संघ के सदस्य ईरान और खाड़ी देशों के लिए नए कॉस्ट, इंश्योरेंस एंड फ्रेट (CIF) समझौतों से बचें। इस समझौते के तहत विक्रेता द्वारा माल खरीदार के बंदरगाह तक पहुंचाने तक लागत, बीमा और मालभाड़ा वहन करना होता है। ऐसी स्थिति में जो भी खर्च होगा, वह भारतीय निर्यातकों पर पड़ेगा। क्योंकि भारत का करीब 50 % निर्यात सऊदी अरब, ईरान, इराक, यूएई और यमन देशों में होता है।

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