SIP Investment Creates Record : SIP पर गहरा भरोसा 1 महीने में ही 32087 करोड़ रुपये का निवेश, देश में वित्तीय हिसाब का स्वर्णिम पन्ना जुड़ा
निवेश बता रहा है भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती की कहानी
SIP Investment Creates Record : SIP यानी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान। आजकल निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। छोटी राशि से लेकर बडी पूंजी तक का निवेश एसआईपी मं हो रहा है। अब मार्च-अप्रैल 2026 का महीना भारतीय वित्तीय हिसाब में स्वर्णिम पन्ना जोड़ गया है। क्योंकि अकेले SIP में एक महीने में लोगों ने 32087 करोड़ रुपये का निवेश किया है।
यह उस दौर में है, जब मार्केट में असमंजस की स्थिति है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रतीक है। भारतीय निवेशकों को मार्केट पर भरोसा है। इसके कारण ही निवेश बढ़ रहा है। 32087 करोड़ रुपये का निवेश अब तक के सर्वाधिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। इससे बाजार भी उत्साहित है। इसको लेकर एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा ताजा आंकड़े जारी किए गए हैं।
10 साल में बड़ी छलांग शून्य से शिखर तक पहुंचा SIP निवेश
दरअसल SIP निवेश पिछले करीब 10 साल में काफी तेजी से बढ़ा है। छोटे शहरों और ग्रामीण निवेशक भी इसमें आगे आए हैं। इसको घरेलू बचत की तरह ही रखा गया है। इसका असर यह हुआ कि 10 साल में SIP निवेश शून्य से शिखर तक पहुंच गया।
आर्थिक विश्लेषक डा. ओपी गुप्ता के अनुसार निवेश के मामले में लोगों की सोच में बदलाव आया है। अब घरेलू बचत सिर्फ बैंक एफडी तक सीमित नहीं है। एसआईपी निवेश बढ़ा है। पहले लोग एफडी के अलावा सोना या जमीन खरीदने में ही निवेश करते थे। अब यह ट्रेंड बदला है। वहीं देश मेें SIP निवेश की बात की जाए तो साल 2016- 2017 में करीब 4000 करोड़ के आसपास रहा।
डिजिटल बैंकिंग से बढ़ा उत्साह
डा. ओपी गुप्ता बताते हैं, डिजिटल बैंकिंग के कारण यह प्रक्रिया काफी आसान हो गई। क्योंकि अपने बैंक खाते को उपभोक्ता स्वयं ही नियंत्रित रखता है। अब SIP में निवेश के लिए किसी के पास जाने या मदद लेने की जरूरत नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार SIP का क्रेज लगातार बढ़ा है। क्योंकि कोरोना संकट के दौरान भी बेशक बाजार में बड़ी गिरावट रही, लेकिन लोगों को निवेश का नया फंडा पता चला।
क्योंकि लोगों को गिरावट में खरीदारी के बारे में पता चला। इसी का परिणाम हुआ कि 2021 में SIP का आंकड़ा 10,000 करोड़ रुपये से पार चला गया था। अब निवेश के लिए कई सारी एप हैं और वित्तीय साक्षरता बढ़ी है। इसी का परिणाम है कि निवेश का आंकड़ा 32 हजार करोड़ रुपये से पार हो गया है।
छोटे निवेश ने दी बड़ी ताकत
दरअसल SIP में छोटा निवेश भी बड़ी ताकत बनकर उभरा है। क्योंकि लोगों ने 500 या 1000 रुपये से भी निवेश शुरू किया। इससे आम लोगों का विश्वास भी SIP पर बढ़ा है। बेशक यह निवेश छोटा रहा है, लेकिन इनकी संख्या बहुत अधिक हो गई। इसके कारण SIP में शानदार ग्रोथ दर्ज की गई है। यह भारतीय वित्तीय इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।
सोच में आया बदलाव
SIP को लेकर आए आंकड़े लोगों की सोच में आए बदलावों को भी दिखाते हैं। अब लोग सिर्फ बचत को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं। बचत की राशि पर भी कुछ ग्रोथ चाह रहे हैं। इसी का परिणाम है कि SIP में निवेश तेजी से बढ़ा है। इसका जिक्र AMFI की रिपोर्ट में भी किया गया है।
क्योंकि निवेशों ने स्मॉल कैप और मिड कैप फंड्स में सबसे अधिक विश्वास जताया है। कुल निवेश का 80% हिस्सा इक्विटी ओरिएंटेड स्कीमों में लगाया गया है। यहां निवेश से होने वाली बचत का अब अन्य Index Funds में भी लगाया जा रहा है।
अभी ओर बढ़ेगा निवेश
आर्थिक जानकारों का मानना है कि एसआईपी में निवेश अभी और अधिक बढ़ेगा। जल्द ही यह निवेश 50 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है। यह परिणाम अगले 2 वर्षों में ही सामने आ सकता है। क्योंकि इससे औद्योगिक विकास को भी बल मिलेगा। इससे अगले दशक में निवेश के मामले में नया भारत बनेगा।










