Nephrotic Syndrome : क्या कहता है आपका चेहरा, सुबह आइना देख कर जांच लें स्वास्थ्य का हाल
आंखों में सूजन दिखती तो किडनी पर है गंभीर प्रभाव, तुरंत करें इलाज
Nephrotic Syndrome : आधुनिक मशीनों की तरह ही मानव शरीर भी विभिन्न सेंसर के आधार पर काम करता है। जब भी शरीर का कोई अंग खराब होता है शरीर इसके लक्षण दिखाना शुरू कर देता है। इसमें एक है किडनी। इसके लिए सुबह उठ कर आइना देख लें। यदि आखों में सूजन दिखे तो समझ लें कि आपकी किडनी पर गंभीर प्रभाव है। इसके बाद योग्य चिकित्सक से इलाज जरूरी हो जाता है।
दरअसल यह लक्षण होता नेफ्रोटिक सिंड्रोम का। यह किडनी की एक ऐसी बीमारी होती है, जिससे शरीर की प्राकृतिक फिल्टर यानी किडनी सही से काम नहीं कर पाती। इसके कारण शरीर में बन रही प्रोटीन आपके यूरिन में लीक होने लगता है।
परिणाम स्वरूप शरीर में प्रोटीन की कमी होने लगती है और इसका असर आंखों पर दिखता है। या फिर पैरों के आसपास भी सूजन आ सकती है। इसके अलावा शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी बढ़ने लगती है। कुल मिलाकर यह समस्या ऐसी है, जो आपकी किडनी को डेमेज करती है।
छोटे बच्चों में आम बात
हालांकि ऐसी समस्या छोटे बच्चों में आम बात है। विशेषकर 2 से 6 साल तक के बच्चों में यह सामान्य रूप से देखी जा सकती है। वहीं यदि बड़ों में ऐसे लक्षण हैं तो इसको गंभीरता से लेना चाहिए। जाने माने चिकित्सक डा. गोपाल कुमार के अनुसार मानव शरीर में मौजूद अंग किडनी में लगभग 10 लाख नेफ्रॉन पाए जाते हैं।
इसका मुख्य कार्य खून को फिल्टर करने का होता है। इस कार्य में किडनी का प्रत्येक नेफ्रॉन में एक फिल्टर पाया जाता है। इसको मेडिकल की भाषा में ग्लोमेरुलस बोला जाता है। यह शरीर का बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। क्योंकि शरीर में मौजूद खून से अनावश्यक गंदगी और अतिरिक्त फ्लूइड इसके माध्यम से ही यूरिन के रास्ते निकलते हैं।
ऐसे होता है असर
वहीं जब शरीर में नेफ्रोटिक सिंड्रोम होता है तो किडनी के यह ग्लोमेरुलस फिल्टर करने की तकनीक को ही नुकसान पहुंचाता है। इसके कारण शरीर से निकलने वाली गंदगी प्रभावित होती है और खून सही प्रकार से साफ नहीं होता। परिणाम स्वरूप यूरिन में प्रोटीन की मात्रा अधिक बहने लगती है। इसका प्रभाव शरीर सूजन एवं कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के रूप में दिखाता है। विशेषकर जो लोग शराब का अधिक सेवन करते हैं या आहार प्रारूप सही नहीं रखते, उनमें यह दिक्कत आती है।
शरीर की बदल जाती है प्रक्रिया
दरअसल मानव शरीर एक ऑटोमेटिक सिस्टम पर चलता है। जैसे ही शरीर से अधिक प्रोटीन बाहर निकलती है, इसकी पूर्ति के लिए शरीर को अतिरिक्त प्रोटीन बनानी पड़ती है। क्योंकि शरीर को किडनी के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन तैयार करना होता है। इसके चलते ही शरीर में कॉलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स अधिक होने लगता है। यह शरीर में कॉलोस्ट्रोल को बढ़ाने लगता है। इसका प्रभाव हमारे हृदय पर भी आता है और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है।
क्यों होता है नेफ्रोटिक सिंड्रोम
डा. गोपाल कुमार बताते हैं कि मुख्य रूप से नेफ्रोटिक सिंड्रोम का कारण किडनी की छोटी ब्लड वेसल को नुकसान के कारण होता है। क्योंकि यह ग्लोमेरुली अधिक मात्रा में ब्लड प्रोटीन को ड्रेन करता है। इसका सीधा प्रभाव नेफ्रोटिक सिंड्रोम के रूप में आता है। इसके शरीर पर गंभीर प्रभाव आते हैं। इसके कारण डायबिटीज का भी असर आता है और किडनी को काफी नुकसान हो सकता है। इससे ग्लोमेरुली प्रभावित होता है।
कैसे हो इलाज
दरअसल यह प्रक्रिया बहुत ही धीरे होती है। आमतौर पर इसको देखने पर किडनी सामान्य दिखती है। इसलिए इसको मिनिमल चेंज डिजीज कहा जाता है। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप जैसे उपकरण से देखने पर इसमें आ रही खराबी को देखा जा सकता है। यदि शुरूआत में ही इसका पता लग जाए तो आसानी से इलाज भी किया जा सकता है। इसलिए यदि ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक को दिखा लें। या फिर नियमित जांच करवाते रहें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य लक्षणों के आधार पर होने वाली समस्या के बारे में बताता है। हालांकि यह जानकारी चिकित्सकों द्वारा दी गई है, लेकिन सामान्य लक्षण दिखने पर जांच करवानी जरूरी है। इसलिए कोई भी इलाज शुरू करने से पहले अच्छे चिकित्सक को दिखा लें।










