Women Reservation Bill 2026 : जानें कैसे बढ़ेगी संसद में महिलाओं की भागेदारी

लोकसभा की 850 सीटों में महिला सांसदों की संख्या हो जाएगी 272

Women Reservation Bill 2026 : भारत में फिलहाल संसद में लाए गए महिला आरक्षण बिल को लेकर खूब चर्चा चल रही है। हालांकि इसके साथ दो अन्य विधेयक भी संसद में पेश किए गए हैं। सरकार दावा कर रही है कि विधेयकों से लोकसभा के साथ-साथ राज्य विधानसभाओं में भी महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा।

इसके साथ ही सबसे बड़ी बहस चल रही है लोकसभा की सीटों को बढ़ाने पर। क्योंकि इसके साथ ही सरकार परिसीमन लागू करने की भी तैयारी कर रही है। विशेषकर दक्षिण भारत के राज्य लोकसभा को लेकर किए जा रहे परिसीमन पर एतराज जता रहे हैं।

यह विधेयक लोकसभा में सीटों के परिसीमन के साथ पूरी संरचना को भी बदलने वाले हैं। सरकार का कहना है कि इन विधेयकों से 2023 में पारित हो चुके नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सही प्रकार से जमीन पर उतारा जाएगा।
यह विधेयक संसद में पास होने के बाद लोकसभा के साथ-साथ राज्यों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा।

क्या है तीनों विधेयकों का मासौदा

इसके तहत एक विधेयक 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 लाया गया है। इसको सबसे प्रमुख माना जा रहा है। क्योंकि इसके माध्यम से संविधान के कुछ ऐसे प्रावधानों में संशोधन होगा, जिससे नई जनसंख्या के आंकड़ों और उनकी परिभाषा को स्पष्ट किया जाएगा।

इसके साथ ही जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए लोकसभा की सीट बढ़ाई जानी हैं। यानी लोकसभा की वर्तमान सीट 543 में वृद्धि कर इनकी संख्या 850 करने के लिए विधेयक लाया गया है। चूंकि सीटों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में इसके लिए परिसीमन की प्रक्रिया भी होनी है। इसको भी विधेयक के रूप में लाया जा रहा है।

वहीं दूसरा विधेयक केंद्र शासित प्रदेश कानून विधेयक 2026 है। यह विधेयक इसी व्यवस्था के तहत दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं क लिए होगा। यानी यहां भी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। साथ ही केंद्र शासित प्रदेशों में भी सीटों के पुनर्गठन किया जाएगा।

इसके अलावा परिसीमन विधेयक 2026 है। चूंकि पिछली बार लोकसभा के लिए सीटों का परिसीमन 1976 लागू किया गया। इसके बाद से इसमें बदलाव नहीं हुआ है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि परिसीमन का आधार 2011 की जनगणना होगी। जबकि 2027 की जनगणना के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सबसे पहले परिसीमन की जरूरत

विशेषज्ञों की मानें तो बेशक महिला आरक्षण का विधेयक 2023 में पास हो चुका है। ऐसे में इसको लागू करने के लिए परिसीमन की जरूरत है। अर्थता जनसंख्या के आधार पर नए लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित होंगे। ऐसे में 2029 के होने वाले आम चुनाव पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

वहीं अभी चल रही जनगणना की प्रक्रिया के तहत यह व्यवस्था की जाती है तो 2029 के चुनाव से इसको लागू नहीं किया जा सकेगा। फिलहाल लोकसभा की बात की जाए तो कुल 543 में से 74 महिला सांसद चुनी गई हैं। हालांकि यह निर्वाचन बिना किसी आरक्षण के आधार पर है। लोकसभा में कुल सीटों की संख्या 850 हो जाएगी और इनमें 272 सांसद महिलाएं चुनी जाएंगी।

किस राज्य में कितनी बढ़ेंगी लोकसभा की सीट

दिए प्रस्ताव के अनुसार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीट बढ़ाई जानी हैं। इसके तहत उत्तर प्रदेश में फिलहाल लोकसभा की 80 से बढ़कर 120-140 होने की संभावना है। वहीं बिहार में अब 40 सीट हैं और इसको बढ़ाकर 60-73 किया जा सकता है। मध्य प्रदेश की 29 सीटों को 44-51 करने की योजना है।

राजस्थान में सीट 25 से बढ़कर 38-48 हो सकती हैं। गुजरात में लोकसभा की सीट 26 से बढ़कर 39-42 हो सकती हैं। महाराष्ट्र की सीट 48 से बढ़कर 72-79 हो जाएंगी। तमिलनाडु में 39 सीट हैं और इनकी संख्या 58 से 60 हो सकती है। केरल की 20 सीट बढ़कर 30 हो सकती हैं।पश्चिम बंगाल की 42 सीट हैं और यहां 63-64 सीटें हो जाएंगी।

दक्षिण राज्यों में हो रहा विरोध

परिसीमन को लेकर देश के दक्षिण राज्यों में अधिक विरोध हो रहा है। क्योंकि इन राज्यों में परिवार नियोजन पर सफलतापूर्वक काम हुआ है और यहां जनसंख्या कम बढ़ी है। ऐसे में उनका कहना है कि इन राज्यों को फिलहाल संसद में 24.3% हिस्सेदारी मिल रही है। यह घट सकती है। हालांकि सरकार कह रही है इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

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