NCR Reduction : हरियाणा के इन जिलों को मिलेगी राहत, हो सकते हैं NCR से बाहर, 16 जून को बैठक होगा फैसला
लंबे समय से उठ रही है मांग, जींद, करनाल, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी को एनसीआर के बाहर करने पर विचार
NCR Reduction : हरियाणा के 5 जिलों के लोगों को बड़ी राहत मिलने जा रही है, क्योंकि यह जिले एनसीआर से बाहर हो सकते हैं। इसका फैसला 16 जून को होने वाली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में लिया जा सकता है।
दरअसल हरियाणा के 13 जिले फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) का हिस्सा हैं। अब 5 जिलों को एनसीआर से बाहर होने के बाद भी 8 जिले एनसीआर में रह जाएंगे। फिलहाल हरियाणा के जींद, भिवानी, चरखी दादरी, करनाल और महेंद्रगढ़ जिलों को क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) से बाहर निकलने की योजना है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मांग भी उठ रही थी।
क्यों उठ रही थी एनसीआर से बाहर निकालने की मांग
दरअसल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में होने के कारण उद्योग सहित कई क्षेत्रों पर असर पड़ता है। क्योंकि एनसीआर में प्रदूषण को लेकर कड़े प्रतिबंध होते हैं। जींद लंबे समय तक प्रदूषण के मामले में विश्व के टॉप शहरों में शामिल रहा। इसके अलावा एनसीआर में वाहन पंजीकरण से लेकर वाहन की लाइफ को लेकर भी कई प्रकार की सीमाएं हैं। क्योंकि एनसीआर में वाहन की लाइफ कम रहती है।
नहीं मिला एनसीआर का लाभ
हालांकि यह जिले एनसीआर में तो शामिल कर लिए गए, लेकिन एनसीआर में आने के बावजूद यहां उचित लाभ नहीं मिल पाया। क्योंकि एनसीआर में आने के बाद विकास के लिए कम ब्याज पर राशि मिल जाती है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा एनसीआर प्लानिंग बोर्ड भी इन जिलों को लेकर कभी खास ध्यान नहीं दे पाया।
पिछली सरकार के समय में हुए प्रयास
हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, मेवात, जींद, रोहतक, रेवाड़ी, सोनीपत, झज्जर, पलवल, पानीपत, महेंद्रगढ़, भिवानी और करनाल जिले शामिल हैं। इनमें से कई जिलों को एनसीआर से बाहर करने के लिए पूर्व की मनोहर लाल सरकार के समय में प्रयास हुए थे।
हालांकि पिछले साल भी इसका प्रस्ताव आया था, लेकिन एनसीआर प्लानिंग बोर्ड इस पर फैसला नहीं कर सका। अब रीजनल प्लान-2041 एनसीआर की सीमाएं नए सिरे से निर्धारित की जानी हैं। ऐसे में इन जिलों को लाभ मिल सकता है।
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हरियाणा के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश को भी लाभ
नई सीमा निर्धारण में एनसीआर का दायरा 100 किलोमीटर तक किया जा सकता है। यह आंकलन राजघाट को केंद्र मान कर किया जाएगा। ऐसे में हरियाणा के अलावा राजस्थान और उत्तर प्रदेश के भी कई क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है। हालांकि अब पूरे जिलों को शामिल करने की बजाय उन तहसीलों को शामिल किया जाएगा, जो इस दायरे में आती हैं।
दिल्ली से काफी दूर होने के बाद भी अनावश्यक प्रभाव
हरियाणा के इन जिलों को दिल्ली एनसीआर से बाहर करने की मांग कर रहे लोगों को कहना है कि यह क्षेत्र दिल्ली से इतनी दूर हैं कि भौगोलिक रूप से इनका कोई औचित्य नहीं बनता। जींद के सफीदों निवासी सुनील कुमार के अनुसार बिना किसी कारण ही सिर्फ एनसीआर के नाम पर इन जिलों में कई प्रकार के अतिरिक्त प्रतिबंध रहते हैं। जबकि यह दिल्ली से बहुत दूर हैं और कोई असर भी नहीं डालते। इतना ही नहीं सरकारी निर्माणों और आधारभूत ढांचे पर भी इसका असर पड़ता है।
वास्तविक क्षेत्र को मिले लाभ
सुनील कुमार के अनुसार इन जिलों को एनसीआर से हटाने के कारण वास्तविक क्षेत्र को लाभ मिलेगा। चूंकि फरीदाबाद, गुरुग्राम, रोहतक व सोनीपत जैसे क्षेत्र दिल्ली से सटे हैं। यहां पर एनसीआर प्लानिंग बोर्ड से काफी कार्य हो सकते हैं।
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड द्वारा दी जाने वाली सुविधा यहां सही प्रकार से लागू हो सकेगी। इसके अलावा बाहर होने वाले जिलों से सिर्फ एनसीआर का टैग ही हटना है। यहां कोई लाभ तो दिया नहीं गया। ऐसे में यदि यह फैसला होता है तो काफी लाभ होगा।










