World Eye Day : मौत के बाद भी जिंदा है उजियारा, सृष्टि फाउंडेशन ने बदली 58 लोगों की दुनिया

हरियाणा डायरी, जींद।
World Eye Day : हरियाणा के जींद शहर की सामाजिक संस्था सृष्टि फाउंडेशन ने अब तक 29 लोगों की आंखें दान करवाकर 58 लोगों की जिंदगी में उजियारा किया है। सृष्टि फाउंडेशन के संस्थापक संयोजक डा. विवेक सिंगला ने अपनी माता सावित्री देवी की आंखें दान करके 10 जून 2016 में नैना कार्यक्रम की शुरुआत की थी। संस्था द्वारा समय-समय पर लोगों को आंखें दान करने के लिए अभियान भी चलाती है।

सृष्टि फाउंडेशन की स्थापना काफी वर्ष पहले हुई थी। पहले संस्था लोगों की आंखों के चेकअप से लेकर अन्य सामाजिक कार्य करती थी। इसके बाद जो लोग इस संसार को देख नहीं सकते, उनकी आंखों को रोशनी देने के लिए संस्था ने अभियान शुरू की। पहले लोगों को नेत्रदान के लिए जागरूक किया जाने लगा। काफी लोगों ने नेत्रदान के लिए आवेदन भी किए।

खुद डा. विवेक सिंगला ने अपनी माता सावित्री देवी की 65 साल की आयु में निधन होने पर 10 जून 2016 को आंखें दान करके नैना कार्यक्रम की शुरुआत की। जिले की नेत्र विशेषज्ञ डा. अर्चना सिंघला ने सावित्री देवी की आंखें दान करने के लिए निकाली थी। इसके बाद इन आंखों को श्राफ आई केयर अस्पताल गाजियाबाद को दे दिया। अब जब भी कोई व्यक्ति आंखें दान करने के लिए सृष्टि फाउंडेशन के पास फोन करता है, तो श्राफ आई केयर अस्पताल की टीम आकर आंखें लेकर जाती है।

World Eye Day : 58 लोगों की जिंदगी में आई रोशनी

जो व्यक्ति आंखें दान करता है, उसकी दोनों आंखें निकाली जाती हैं। यह आंखें एक व्यक्ति की बजाय दो लोगों को लगाई जाती हैं। इससे दो लोगों की जिंदगी में रोशनी होती है। जींद के तीन लोगों को आंखें लगाई गई हैं। आंखें लगाने के बाद इन लोगों को रुटीन चेकअप करवाना होता है। कुछ सप्ताह बाद यह आंखें आम लोगों की आंखों की तरह हो जाती हैं। इसके बाद इन लोगों को कोई परेशानी नहीं होती।

World Eye Day : आवेदन करने की जरूरत नहीं, फोन की जरूरत

सृष्टि फाउंडेशन के संयोजक डॉ. विवेक सिंगला का कहना है कि आंखें दान करने के लिए आवेदन तो बहुत से लोग करते हैं, लेकिन समय पर सूचना नहीं दे पाते। मृत व्यक्ति की आंखें चार से छह घंटे तक निकाली जा सकती हैं। पहले की बजाय लोग अब ज्यादा जागरूक हो चुके हैं।

आंखें निकालने के बाद उनके स्थान पर पत्थर की आंख लगा दी जाती है ताकि मृतक व्यक्ति का चेहरा खराब नहीं हो। काफी लोग आज तक इस संसार को नहीं देख पाए। इसलिए हमें आंखें दान करनी चाहिए ताकि हमारी मृत्यु के बाद भी हमारी आंखें इस संसार की खूबसूरती को देख सकें।

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