Cancer Surgery : कैंसर की पहली बार ऐसी सर्जरी, 90 प्रतिशत पेट हटा कर छोटी आंत से जोड़ा
6 घंटे चला आपरेशन, लेप्रोस्कोपिक तकनीक बनी सहायक
Cancer Surgery : देश में चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में लगातार नए प्रयोग हो रहे हैं, जो गंभीर से गंभीर बीमारियों में भी मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल रही है। ऐसा ही मामला आया है हिमाचल की राजधानी शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में। आइजीएमसी शिमला के चिकित्सकों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो देश में पहली बार हुआ है।
चिकित्सकों की टीम ने एक कैंसर पीड़ित महिला का ऐसा जटिल आपरेशन किया है, जिससे महिला को काफी राहत मिली है। इसमें लेप्रोस्कोपिक तकनीक से आपरेशन करते हुए पेट का 90 प्रतिशत हिस्सा हटा दिया और इसको छोटी आंत से जोड़ा गया है। इस प्रकार का जटिल आपरेशन करने वाला आइजीएमसी प्रदेश का पहला सरकारी अस्पताल बन कर उभरा है। साथ ही कैंसर पीड़ितों को भी नई उम्मीद जगी है।
इस सफल आपरेशन के बाद इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल के चिकित्सकों के नाम यह खास उपलब्धि जुड़ गई है। चिकित्सकों की टीम ने एक महिला शन्ना देवी का आपरेशन किया है, जो पेट के कैंसर से पीड़ित थी। मिला शिमला जिले के रामपुर उपमंडल के ननखड़ी की रहने वाली है। 44 वर्षीय महिला का कहना है कि वह अब ठीक है। आपरेशन की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है इस आपरेशन में 6 घंटे का समय लगा। हालांकि आपरेशन 2 फरवरी को हुआ था और इसके बाद महिला को 10 फरवरी को अस्पताल से घर भेज दिया गया।
पेट के कैंसर से ग्रस्त थी शन्ना देवी
चिकित्सकों का कहना है कि ननखड़ी निवासी यह महिला पिछले करीब 6 महीने से पेट के कैंसर से पीड़ित थी। जब वह अस्पताल आई तो उसकी हालत काफी खराब थी। इसके बाद इस 44 वर्षीय महिला के आपरेशन की योजना बनाई गई। इसके तहत पहले लेप्रोस्कोपिक तकनीक से पेट का अधिकतम 50 प्रतिशत हिस्सा हटाया गया। इसके बाद बाकी का काम किया गया। अब महिला पूरी तरह से स्वस्थ है।
एडवांस स्टेज में था कैंसर
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जब शन्ना देवी इलाज के लिए मेडिकल कालेज पहुंची तो वह काफी गंभीर थी। जांच में पाया गया कि उसको एडवांस स्टेज का गैस्ट्रिक कैंसर है। ऐसे में अस्पताल द्वारा आपरेशन की तैयारी की गई। इसमें पूरी टीम का गठन किया। हालांकि इस टीम के लिए यह आपरेशन काफी चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन आखिरकार इसमें सफलता मिल ही गई। क्योंकि लेप्रोस्कोपिक तकनीक से इतने बड़े हिस्से का ऑपरेशन करना बहुत ही अधिक जटिल प्रक्रिया थी।
जानें लेप्रोस्कोपी तकनीक के बारे में
चिकित्सकों के अनुसार आजकल सर्जरी यानी आपरेशन में काफी आधुनिक तकनीक आ चुकी हैं। इसमें से ही एक है लेप्रोस्कोपी। साधारण भाषा में इसको दूरबीन वाला आपरेशन कह सकते हैं। इसमें यह सुविधा रहती है कि बड़ा चीरा नहीं लगाना पड़ता, छोटे-छोटे छेद किए जाते हैं। एक छेद करीब 0.5 से सेंटीमीटर का होता है। इससे आपरेशन किया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस विधि यानी लेप्रोस्कोपी से आपरेशन करने में दर्द तो कम होता ही है, मरीज के शरीर से खून भी कम रिसता है। ऐसे में सक्रमण होने की आशंका भी कम हो जाती है और मरीज जल्द ठीक रिक्वर करता है।
नई तकनीक से होते हैं आपरेशन
हालांकि यह तकनीक नई है, लेकिन आजकल अधिकतर आपरेशन इसी तकनीक से हाेने लगे हैं। इसको लेकर चिकित्सक बेहतर परिणाम की उम्मीद करते हैं। क्योंकि इस तकनीक में संक्रमण का खतरा कम रहता है, ऐसे में चिकित्सक और मरीज दोनों के लिए यह सुरक्षित उपाया है। हालांकि बड़े आपरेशन इस तकनीक से नहीं हो रहे हैं, लेकिन इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज व अस्पताल शिमला के चिकित्सकों ने इसको भी कर दिखाया है। यह आने वाले समय में चिकित्सा विज्ञान विशेषकर सर्जरी के क्षेत्र में बड़ृी क्रांति हो सकती है।










