El Nino Impact : सूखा, बाढ़ और भीषण गर्मी का मंडराया खतरा, मानसून भी रह सकता है फीका

प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया एल नीनो के कारण बन रही स्थिति, बढ़ेगा तापमान

El Nino Impact : इस बार कड़ाके की सर्दी के बाद लोगों को बेहतर मानसून का इंतजार था, लेकिन इस पर पानी फिरता नजर आ रहा है। साथ ही प्रशांत महासागर के पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में तापमान में भी इजाफा रहोगा। यह सब एक प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया एल नीनो के कारण हो रहा है। ऐसे में देश में इस बार मानसून पर भयंकर असर देखने को मिलेगा। इससे देश में भीषण बाढ़ और सूखे का खतरा मंडरा रहा है।

वैज्ञानिकों द्वारा दी गई इस चेतावनी ने सभी की चिंता बढ़ा दी है। क्योंकि इस वर्ष समुद्री सतह का तापमान भी तेजी से बढ़ने वाला है। जो प्राकृतिक प्रक्रिया हो रही है यह से भी अत्यधिक प्रभावशाली सुपर एल नीनो का रूप ले सकता है। इससे पर्यावरण पर व्यापक असर आएगा। ऐसे में देश में कहीं बाढ़ की स्थिति होने वाली है तो कहीं सूखा भी हो सकता है। निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने इसको लेकर खुलासा किया है। एजेंसी का कहना है कि साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है।

क्या होता है सुपर एल नीनो

दरअसल यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया होती है। यह तब होती है, जब जब समुद्र का तापमान औसत से करीब 2 डिग्री या इससे भी अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में जो स्थिति बनती है, उसको सुपर एल नीनो के नाम से जाना जाता है। (super el nino) वैज्ञानिकों को कहना है कि 10 से 15 सालों में एक बार इस प्रकार की स्थिति बनती है। हालांकि इसका असर लंबे समय तक रहता है और बहुत ही बड़े स्तर पर आता है।

विश्व भर में आ सकते हैं असर

इस प्रकार की स्थिति का प्रभाव किसी एक देश या क्षेत्र में नहीं विश्व भर में आ सकता है। या यूं कहें कि विश्व भर के अलग-अलग क्षेत्रों में इसका असर दिखता है। फिलहाल बन रही स्थिति का असर दक्षिण-पूर्व एशिया और सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में सूखे के साथ अधिक गर्मी के रूप में आ सकता है।

वहीं दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तटों पर इसके प्रभाव से अत्यधिक बारिश हाेने की संभावना है। वहीं इसके प्रभाव के रूप में समुद्री तूफान भी आ सकते हैं। इससे पहले 1997-98 और 2015-16 में भी एल नीनो का प्रभाव रहा, जिससे विश्व भर में जलवायु पर गहरा असर पड़ा।

वहीं अब आ रहे सुपर एल नीनो के चलते वैश्विक तापमान में भी इजाफा होने की आशंका है। इसका असर 2027 तक प्रभावित करेगा। क्योंकि कुछ स्थानों पर रिकॉर्ड स्तर तक गर्मी और तेज हीटवेव रहेंगी। यह कारक अधिक बारिश का भी कारण बन सकता है। इससे बाढ़ की स्थिति रहेगी।

भारत में क्या होगा प्रभाव

वैज्ञानिकों का कहना है कि एल नीनो के प्रभाव के कारण भारत में मानसून व्यापक स्तर पर प्रभावित हो सकता है। इससे या तो बारिश कमजोर होती है या फिर असमान रूप से होती है। चूंकि भारत बड़ा देश है, ऐसे में अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। देश के उत्तर और मध्य क्षेत्रों में अधिक असर रहेगा।

कृषि व अर्थ व्यवस्था पर रहेगा असर

चूंकि एल नीनो के कारण बारिश असमान रूप से होगी, ऐसे में इसका प्रभाव देश की अर्थ व्यवस्था व कृषि पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। वहीं भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। बारिश कम या अधिक होने के कारण पैदावार प्रभावित होगी। इससे सीधा असर अर्थव्यवस्था पर रहेगा। साथ ही सरकार को खाद्य सुरक्षा के लिए बड़े स्तर पर प्रबंध करना पड़ेगा।

शुरूआत होगी अच्छी

हालांकि इसके लिए पूर्वानुमान देने वाली एजेंसी का कहना है कि मानसून की शुरूआत अच्छी रहेगी। क्योंकि जून महीने में बारिश 101 प्रतिशत रहेगी। वहीं मानसून के चार महीनों में पूरे देश में औसतन करीब 817 मिमी बारिश होने का अनुमान है। एजेंसी ने कहा कि 30 प्रतिशत आशंका ऐसी है, जिसमें सूखे का प्रभाव रहे। वहीं सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना 40 प्रतिशत है। इसके तहत जुलाई महीने में 95 प्रतिशत, अगस्त में 92 प्रतिशत और सितंबर में 89 प्रतिशत तक बारिश की उम्मीद है।

भारत के किस हिस्से होगा कैसा प्रभाव

इस अनुमान को जारी करने वाली एजेंसी का कहना है कि भारत के उत्तर क्षेत्र के राज्य पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के साथ उत्तर-पश्चिमी राज्यों में 30 प्रतिशत आशंका सूखे की है। वहीं पूर्वी भारत में स्थिति अच्छी रहने की संभावना है। ऐसे में उत्तर भारत के इन राज्यों में कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभिक है।

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