chemicals in chickpeas: भुने चने में मिलाया जा रहा कैमिकल बढ़ रहा कैंसर का खतरा
राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा स्वास्थ्य मंत्री को पत्र
chemicals in chickpeas: अक्सर हर हम हल्की भूख को शांत करने के लिए भूने हुए चने को खाते हैं। यह बहुत ही अच्छा स्नैक भी माना जाता है, लेकिन इसको लेकर बहुत ही भयावह बात सामने आई है। इसको जानकार आप भी चौंक जाएंगे। यदि आपको बताया जाए कि भूने हुए चने में कैंसर बढ़ाने वाला कैमिकल मिलाया जा रहा है तो आप भी चौंक जाएंगे। इसको लेकर राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिख कर अलर्ट जारी करने की मांग की है। आईए जानते हैं इसकी पूरी कहानी।
बाज़ार में बहुत ही आसानी से मिल जाने वाले स्नैक भूने चने को सभी चाव से खाते हैं। इसके व्यवसायिक उत्पादन करने वाले लोग गंभीर मिलावट कर रहे हैं। इसके कारण भूने चने में कैंसर बढ़ापने वाले तत्व मिलाए जा रहे हैं। इसका नाम है आरामाइन-O। इंटरनेट मीडिया पर वायर हुई एक रील में इसको लेकर दावा किया जा रहा है।
इसमें बताया गया है कि भुने चन में आरामाइन-O मिलाया जा रहा है। यह एक सिंथेटिक पीला रंग होता है। इसका प्रयोग कपड़ा, चमड़ा, और कागज को रंगने के लिए किया जाता है। हालांकि प्रयोगशालाओं में इसका प्रयोग फ्लोरोसेंट स्टेन के रूप में किया जाता है। विशेषकर माइकोबैक्टीरिया को पहचानने के लिए। यह डाई कैंसरकारी रसायन होता है।
अब दावा किया जा रहा है कि इसको भुने चने में मिलाया जा रहा है। ऐसा होने पर स्वास्थ्य को बहुत ही गंभीर खतरा हो सकता है। इससे लिवर, किडनी पर असर के साथ कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। दावा यह भी किया जा रहा है कि इस डाई की मिलावट से चना चमकीला पीला होता है। इससे चना अच्छा तो दिखता ही है, साथ में यह खाने में कुरकुरा भी लगता है।
हालांकि आरामाइन-O को खाने के सामाने में प्रयोग करने पर बैन और यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही हानिकारक है। World Health Organization का भी कहना है कि इससे कैंसर तक हो सकता है। इस मिलावट को देखते हुए ज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिख कर कार्रवाई की मांग की है। सांसद ने मंत्रालय से आरामाइन-O की मिलावट पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य अलर्ट जारी करने को कहा है। साथ में देश भर में भुने चने की जांच भी करवाने की मांग की है।
chemicals in chickpeas : लाभ के लिए स्वास्थ्य से खिलवाड़
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिलावट लाभ के लिए की जा रही है। यहां तक कहा जा रहा है कि चने के अलवा अन्य खाद्य पदार्थों में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इसके प्रयोग से वस्तु चमकीली और सुदंर दिखती है। इसको बिक्री बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है। हालांकि Food Safety and Standards Act, 2006 के अनुसार आरामाइन-O को खाने वाले रंग की तरह प्रयोग नहीं किया जा सकता। यह गैर कानूनी है और इस पर कार्रवाई हो सकती है।

chemicals in chickpeas : डीएनए में भी बदलाव की आशंका
आरामाइन-O को खाद्य पदार्थों में मिलाने से इसके गंभीर परिणाम आते हैं। हालांकि यह लिवर और किडनी पर असर तो डालता ही है। इसके अलावा स्प्लीन का आकार बढ़ने का भी खतरा रहता है। इससे एनीमिया जैसी गंभीर समस्या हो सकती है। इसके अलावा अलग-अलग शोध में सामने आया है कि इससे डीएनए तक बदल सकता है। WHO की एजेंसी International Agency for Research on Cancer द्वारा आरामाइन-O को group 2B carcinogen बताया गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि आरामाइन-O के प्रयोग से कैंसर हो सकता है।
chemicals in chickpeas : घर पर भी कर सकते हैं पहचान
यह मामला सामने आने के बाद निश्चित रूप से आपक भूने हुए चने के सेवन को छोड़ने की बात सोच रहे होंगे, लेकिन ऐसा नहीं है। आपके भूने चने में आरामाइन-O की मिलावट की गई है या नहीं, इसकी जांच घर पर ही की जा सकती है। सबसे पहले यह जांच ले की आपके चने अत्याधिक पीले और चमकीले तो नहीं है। इसको गीले हाथ से छू कर देख सकते हैं। गीले हाथ लगने पर यदि चने से रंग छुट रहा है तो इसमें आरामाइन-O की मिलावट होने की संभावना है। आजकल जगह-जगह चने भूनने वाले रहते हैं। बाजार से कच्चे चने लेकर यहां भुनवाया जा सकता है। यह सुरक्षित रहेगा।










